देशभक्ति पाठ्यक्रम से बच्चों में देश को समझने की इच्छा पैदा हो रही है, यह छात्रों को कट्टर देशभक्त बनना सिखाएगी- मनीष सिसोदिया

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मनीष सिसोदिया

*पहले बच्चे डॉक्टर,इंजिनियर,शिक्षक बनने के सपने देखते थे, देशभक्ति पाठ्यक्रम पढ़ने के बाद अब बच्चे कहने लगे है उन्हें कट्टर देशभक्त डॉक्टर, कट्टर देशभक्त इंजिनियर, कट्टर देशभक्त शिक्षक बनकर देश की तरक्की के लिए काम करना है-मनीष सिसोदिया

*देशभक्ति पाठ्यक्रम स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के हर कार्य, व्यवहार को देश के साथ जोड़ना सिखा रहा है, उनमें यह भाव पैदा कर रहा है कि उनके हर व्यवहार से देश प्रभावित होता है- मनीष सिसोदिया

*उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया का लगातार दूसरे दिन स्कूल का निरीक्षण किया, सर्वोदय बाल विद्यालय, वेस्ट विनोद नगर का दौरा कर देशभक्ति कक्षाओं का निरीक्षण किया, बच्चों व अध्यापकों के साथ की चर्चा

केजरीवाल सरकार अपने स्कूलों में देशभक्ति पाठ्यक्रम के जरीय अगली पीढ़ी को देशभक्त होने के असल मायने सिखा रही है| इस पाठ्यक्रम की मदद से बच्चे न केवल देश से, यहां के लोगों से, संसाधनों से प्यार करना सीख रहे है बल्कि कट्टर देशभक्त बनना भी सीख रहे है| बच्चों में आए इन्ही बदलावों को देखने और देशभक्ति पाठ्यक्रम के अंतर्गत चल रही विभिन्न गतिविधियों का निरीक्षण करने की श्रृंखला को जारी रखते हुए गुरुवार को उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने सर्वोदय बाल विद्यालय, वेस्ट विनोद नगर का दौरा कर देशभक्ति की कक्षाओं का निरीक्षण किया तथा विभिन्न एक्टिविटीज में शामिल होकर बच्चों तथा टीचर्स के साथ चर्चा की|

इस मौके पर श्री सिसोदिया ने कहा कि, देशभक्ति पाठ्यक्रम से हमारे स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों में अपने देश को समझने की जिजीविषा पैदा हो रही है और यही जिजीविषा बच्चों को अपने देश पर गर्व करना और कट्टर देशभक्त बनना सिखाएगी| उन्होंने कहा कि पहले बच्चे सपना देखते थे कि उन्हें डॉक्टर बनना है, इंजिनियर बनना है, शिक्षक बनना है, आई.ए.एस-आई.पी.एस अधिकारी बनना है लेकिन देशभक्ति पाठ्यक्रम पढ़ने के बाद से अब बच्चे कहने लगे है कि उन्हें डॉक्टर बनना है लेकिन कट्टर देशभक्त डॉक्टर बनना है, कट्टर देशभक्त इंजिनियर, कट्टर देशभक्त शिक्षक, कट्टर देशभक्त अधिकारी बनना है और खुद की तरक्की के साथ-साथ देश की यहां के लोगों की तरक्की के लिए काम करना है|

श्री सिसोदिया ने कहा कि देशभक्ति पाठ्यक्रम हमारे स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को उनके हर एक्शन को, व्यवहार को देश के साथ जोड़ना सिखा रहा है| बच्चों में यह भाव पैदा कर रहा है कि उनके हर व्यवहार से देश प्रभावित होता है| पाठ्यक्रम हर बच्चा के अंदर अपने देश के मान सम्मान को लेकर आत्मविश्वास में जीना सिखा रहा है और कट्टर देशभक्त नागरिक बना रहा है|

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अरविंद केजरीवाल जी का विज़न है कि देश का हर एक बच्चा कट्टर देशभक्त बने और मुझे यह देखकर ख़ुशी है कि देशभक्ति पाठ्यक्रम की वजह से हमारे स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों में देश के प्रति गर्व करने और कट्टर देशभक्ति की भावना बहुत तेजी से बढ़ रही है| उन्होंने कहा कि देशभक्ति पाठ्यक्रम से बच्चों में यह सपना जागने लगा है कि देश के सभी 130 करोड़ लोग पूरी देशभक्ति के साथ लग जाए तो भारत 5 साल के अंदर विश्व का नंबर.1 देश बन सकता है|

*देशभक्ति पाठ्यक्रम पर बच्चों का क्या कहना है?*

विजिट के दौरान देशभक्ति पाठ्यक्रम से जुड़े अपने अनुभवों को उपमुख्यमंत्री के साथ साझा करते हुए बच्चों ने कहा कि, देशभक्ति करिकुलम ने मुझे देशभक्ति के नए अर्थ सिखाए हैं। मैं अब यह समझने लगा हूँ कि हमारे आस-पास के लोगों के मदद के लिए किया जाने वाला हर काम जैसे अपने परिवेश को साफ रखना, जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करना भी देशभक्ति है| एक अन्य बच्चे ने कहा कि पहले मैं मानता था कि देशभक्ति की भावना एक ऐसी चीज है जिसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर मनाया जाता है। लेकिन अब मैं समझ गया हूं कि यह एक ऐसा अहसास है जिसे हर पल मनाया जा सकता है| एक अन्य बच्चे ने कहा कि मुझे पहले साइंस से बहुत डर लगता था.. देशभक्ति करिकुलम से मेरे अंदर यह समझ बनी कि जब देश की आजादी के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानी छोटी उम्र में ही अपनी जान कुर्बान कर दी तो अपने और अपने देश के बेहतर भविष्य के लिए मैं बिना डरे पढ़ाई कर सकता हूँ|

*क्या है केजरीवाल सरकार का देशभक्ति पाठ्यक्रम*

देशभक्ति पाठ्यक्रम की केजरीवाल सरकार के स्कूलों में नर्सरी से 12वीं के लिए शुरू किया गया है| यह खुद में अनोखा पाठ्यक्रम है जो किताबों और परीक्षाओं की सीमा से बाहर है। यह पूरा पाठ्यक्रम विद्यार्थी की सोच समझ और मानसिकता के आधार पर डिजाइन किया गया है। जहां वे लोगों से बात करके, अपने दोस्तों से बात करके, स्वयं के अंदर झांककर इस सवाल का जबाव तलाशते है कि देशभक्ति क्या है? देश उनके जीवन में क्या मायने रखता है? ये पाठ्यक्रम देशभक्ति को चुनिंदा परिभाषाओं तक सीमित नहीं रखता है इसलिए इस पाठ्यक्रम को सीखने के लिए कोई निश्चित सामग्री या नियम नहीं है बल्कि इसमें बच्चें अपने घर,स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकल, अपने अनुभवों, वास्तविक जीवन की घटनाओं के आधार पर खुद के लिए देशभक्ति का अर्थ जानने का प्रयास करते है। ये पाठ्यक्रम बच्चों को देशभक्ति के साथ-साथ खुद को जानने का मौका भी देता है क्योंकि पाठ्यक्रम आत्मचिंतन को बढ़ावा देता है

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