शक्तिसिंह गोहिल, सांसद और प्रवक्ता, एआईसीसी; कर्नल रोहित चौधरी (सेवानिवृत्त) और विंग कमांडर अनुमा आचार्य (सेवानिवृत्त) ने आज एआईसीसी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित किया

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शक्ति सिंह गोहिल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी का आज की प्रेस वार्ता में मैं दिल से स्वागत करता हूं। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे साथ मेरे लैफ्ट में कर्नल रोहित चौधरी जी बैठे हुए हैं, जिन्होंने 26 साल तक हमारी फौज में सेवा की है और बड़े महत्व के प्वाइंट्स पर इन्होंने सेवाएं की हैं, जम्मू और कश्मीर में एक लंबे दौर तक रहे। नॉर्थ ईस्ट स्टेट में उन्होंने सेवाएं दी और खासकर मिसाइल का जो काम होता है, वो मिसाइल वाले फील्ड में भी हमारी फौज में कर्नल रोहित चौधरी जी ने अपनी सेवाएं दी हैं।
इसके साथ-साथ मेरे एक्सट्रीम लैफ्ट में विंग कमांडर अनुमा आचार्य जी बैठी हैं। जिन्होंने 24 साल तक एयरफोर्स में हमारी फौज में सेवाएं दीं और वो जो दौर शुरू हुआ कि जब महिलाएं एयरफोर्स में ऑफिसर के तौर पर रिक्रूट होने लगीं, उस वक्त में शुरू के दौर में विंग कमाडंर अनुमा आचार्य जी फौज में भर्ती हुई थी और लंबे अर्से तक उन्होंने सेवाएं दी हैं। कांग्रेस पार्टी के लिए देश का हित दल के हित से हर वक्त ऊपर रहा है। हमने कभी भी सेना के नाम पर, आतंकवाद के नाम पर, विदेश नीति के नाम पर राजनीति नहीं की है।
आप सभी को याद होगा भाजपा की अगुवाई वाली सरकार थी, रघुनाथ मंदिर पर हमला हुआ, अक्षरधाम पर हमला हुआ, पार्लियामेंट पर हमला हुआ, यहाँ से आतंकवादियों को कंधार छोड़ने गए और कांग्रेस पार्टी ने उस वक्त की सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आतंकवाद से लड़ने में साथ दिया। हमने उस वक्त राजनीति नहीं की, ना ही हमने सरकार पर अटैक किया। आज भी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए, राष्ट्रहित में, देशहित में, दल के हित से ऊपर उठकर हम काम करते रहे हैं। हमें फ़ख़्र है, हमें नाज़ है, हमारे सेना के जवान, अर्धसेना के जवान बड़े मुश्किल दौर में राष्ट्र की सुरक्षा, हमारी सुरक्षा में तैनात रहते हैं और उसमें किसी को खरोंच भी आती है, हर देशवासी को दर्द होता है, दुख होता है।
आपको याद होगा कि पुलवामा का हमला हुआ, सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। आपके ही लोगों ने, मीडिया के साथियों ने तब हमारे नेता राहुल गांधी जी से पूछा था कि क्या इंटेलीजेंस फेल्योर नहीं है? क्या इसको हवाई मार्ग से नहीं लाया जा सकता था? चुनाव सामने था, राजनीति हो सकती थी, पर एक मैच्योर पॉलिटिशियन होने के नाते राहुल जी ने कहा था कि वक्त इन चीजों का नहीं है, ये वक्त कुछ और हैं और संवेदनाएं जताई उन 40 जवानों के परिवार के प्रति और ऐसी घटना के लिए चिंता व्यक्त की, पर कोई पॉलिटिकल बात नहीं की। लेकिन आज हम, आपका भी सवाल होगा कि जिस कांग्रेस पार्टी ने पुलवामा पर स्टैंड लिया कि हम कुछ नहीं कहेंगे, आज हम आपके साथ जिन्होंने फौज में लंबी सेवाएं दी हैं, उनके साथ बैठकर पुलवामा की बात क्यों करते हैं? आपके भी सवाल होंगे। मैं ज़रूर इस सवाल का आपको जवाब देना चाहता हूं कि हमने नहीं कहा था और अब भी हम चुप रहते, लेकिन जब 18वें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, 18वें स्थल सेना के मुखिया सबसे बड़ी पोस्ट आर्मी की, उसके ऊपर जिन्होंने सेवाएं दी, ऐसे जनरल शंकर रॉयचौधरी जी ने जो बात रखी है, वो बात हमारे ज़ज़्बात को, हमारे दिल-ओ-दिमाग को हिलाने वाली है।
जो जवान अपनी जान की बाज़ी लगाकर सरहद पर हर दिक्कत का सामना करता है, अगर उस जवान को दिक्कतें आती हैं या 40-40 अर्धसेना के जवान सीआरपीएफ के शहीद होते हैं और उस पर जब 18वें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, 18 वें स्थल सेना के मुखिया जनरल शंकर रॉयचौधरी जी ने कहा कि ये गलत हुआ था। ये 40 जवानों की जान बच सकती थी। जब जनरल साहब कहते हैं कि इतना बड़ा काफिला पाकिस्तान से सटे हुए हाईवे से ले जाना अपने आप में वल्नरेबल था, नहीं ले जाना चाहिए, इनकी जान बच सकती थी। एयरलिफ्ट करने की मांग आई थी, सीआरपीएफ से कि हमें ऐसे रिस्की रूट पर मत ले जाइए, हमें एयरक्राफ्ट से लिफ्ट कर लीजिए, क्यों नहीं किया गया? जनरल शंकर रॉयचौधरी साहब, जिनका करियर बहुत अच्छा रहा, हम सबको उन पर फ़ख़्र है, वो कहते हैं कि 40 जवानों की जान गई, इसके लिए जिम्मेदार प्रधानमंत्री जी और एनएसए, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, वो है और इनका इंटेलीजेंस फैल्योर है।
हमने कभी पॉलिटिकल बात नहीं की, पर एक जनरल साहब जिनका डॉट लैस करियर रहा है, जब वो कहते हैं, तब हम चुप नहीं रह सकते हैं। ये काम वो आर्मी का या मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का नहीं था, क्योंकि ये सीआरपीएफ के जवान थे।
मतलब तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह का रोल था, प्रधानमंत्री का था। मैं यही कहना चाहता था कि ये जो जिम्मेदारी होम की थी, आज जिसके पास डिफेंस है, क्यों ये नहीं किया गया?
मैं, जिन्होंने सेना में लंबी सेवाएं की हैं उनसे, कर्नल रोहित चौधरी जी से बात कर रहा था, मैं हमारी विंग कमांडर अनुमा आचार्य जी से बात कर रहा था, वो कह रहे थे कि अर्धसेना के बल को ले जाने लाने के लिए आर्मी के पास जो हवाई जहाज है वो और एयर इंडिया के हवाई जहाज पास्ट में भी कोरियर सेवा कहते हैं इसे, इसके लिए इस्तेमाल होते थे और ये हो सकता था और वो क्यों नहीं हुआ, इसके लिए जिम्मेदार कौन है? ये सवाल हैं, मैं कर्नल रोहित चौधरी जी और विंग कमांडर अनुमा आचार्य जी से भी रिक्वेस्ट करूंगा कि वो आपके सामने अपनी बात रखेंगे।
आपके कोई सवाल होंगे, तो उनका भी यहाँ पर स्वागत रहेगा। पर साथ ही साथ में एक आखिरी बात सुओ-मोटो जो मुझे करना है, वो कहना चाहूंगा कि अभी गृहमंत्री अमित शाह जी गए और एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट किया उन्होंने। एक इंच भी हमारी जमीन ना किसी ने ली है, ना किसी को लेने देंगे। कुछ चैनल ने तो बार-बार चलाया अमित शाह जी का स्टेटमेंट। मैं आपको भारतीय जनता पार्टी के सीनियर एमपी तापिर गाव जी जो कि इसकी नेशनल एग्जिक्यूटिव के भी मेंबर हैं, उनका एक ट्वीट है, वो पढ़कर सुनाना चाहता हूं कि हमारे वहाँ से चीन की पीएलए हमारे लोगों को उठा कर ले जाती है, भाजपा के नेता कहते हैं। वो आगे बढ़कर कहते हैं कि “Chinese #PLA has abducted Sh Miram Taron” 17 साल के लड़के लो लेकर गए,उसके आगे कहते हैं । China has constructed inside Indian territory, Lungta Jor area, एरिया का नाम भी वो बताते हैं, “Lungta Jor area (China built 3-4 kms road inside India in 2018)” भारत के अंदर 3 से 4 किलोमीटर का इन्होंने रास्ता बना दिया है और वो मोदी जी के शासन में वो साल भी लिखते हैं, in 2018. आगे लिखते हैं “Under Siyungla area (Bishing village) of Upper Siang dist, Arunachal Pradesh.”
कौन सही है, इनके जो नेशनल एक्जिक्यूटिव के मेंबर बहुत ही सीनियर मेंबर पार्लियामेंट, जो वहीं रहते हैं, वो सच बोल रहे हैं या गृहमंत्री जी कह रहे हैं कि एक इंच जगह नहीं दी? दोनों एक ही शतरंज के चट्टे-बट्टे हैं, सत्ता पक्ष के ही दोनों लोग हैं। नेशनल एग्जीक्यूटिव के मेंबर हैं एमपी के साथ-साथ बीजेपी के।
तो इसका भी जवाब वो दें क्योंकि हमारी सेना के एक भी जवान की दिक्कत हर देशवासी के लिए चिंता का विषय है। 45 साल में चीन के बॉर्डर पर 45 साल हमारे एक भी जवान को खरोंच नहीं आई थी और मोदी जी के टैन्योर में बिहार रेजिमेंट के 20 जवान शहीद हो गए और फिर जो स्टेटमेंट आया, जिससे देश को नुकसान हुआ- यहाँ मित्रों, ना कोई आया है, ना कोई गया है, तो फिर ये 20 जवान बिहार रेजिमेंट के मेरे कैसे शहीद हो गए? तो ये हकीकत कुछ आपके सामने रखी हैं। मैं गुजारिश करुंगा कर्नल रोहित चौधरी जी को कि वो आपके सामने अपनी बात रखें।
कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि शक्ति सिंह गोहिल सर, प्रेस के मेंबर्स, विंग कमाण्‍डर अनुमा आचार्य जी, विनीत जी। ऑनरेबल प्रेस के मेंबरों, जैसा कि आपको जानकारी है कि कुछ दिन पहले हमारे जो जम्‍मू-कश्‍मीर के कॉन्‍स्‍टिट्यूशनल हैड थे, फार्मर गवर्नर सत्यपाल मलिक जी, पुलवामा इंसिडेंट के समय, उनका एक इंटरव्‍यू आया और उस इंटरव्‍यू के जरिए उन्‍होंने पुलवामा में जो घटना घटी, जो हमारे 40 जवान शहीद हुए, उसके बारे में बहुत ही सीरियस सवाल देश के सामने रखे और उन्‍होंने ये माना कि ये एक बहुत बड़ी इंटेलीजेंस फेल्‍योर हुआ, ऑपरेशनल फेल्‍योर हुआ और कॉम्पीटेंस की तरफ इशारा किया सीआरपीएफ के लिए और मिनिस्‍ट्री ऑफ होम के लिए।
उन्‍होंने ये कहा कि 5 एयरक्राफ्ट की ज़रूरत थी और उनको एयरक्राफ्ट अगर दिए जाते तो आज ये घटना नहीं घटती और हमारे जो 40 जवान शहीद हुए हैं वो आज हमारे बीच में होते। ये बहुत ही सीरियस और दु:खद सिनेरियो है जहां पर एक कॉन्‍स्‍टीट्यूशनल हेड आकर ये बात उठा रहा है कि ये एक फेल्‍योर हुआ और उसके बारे में उन्‍होंने उस समय उठानी चाही, लेकिन प्रधानमंत्री जी ने उन्‍हें कहा चुप रहें ये कोई और बात है, कोई और चीज़ है और वही चीज़ अजीत डोभाल जी, जो नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर थे उन्‍होंने भी यही चीज़ कही और इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए हमारे डिस्टिंग्विश्ड फॉर्मर आर्मी चीफ जरनल शंकर रॉयचौधरी, उन्‍होंने भी इसके ऊपर संज्ञान लेते हुए अपना वक्‍तव्‍य दिया है और ये कहा है कि 2,500 सुरक्षाकर्मियों को 78 गाड़ियों के अंदर आप जम्‍मू से श्रीनगर ला रहे हैं, रोड ओपनिंग की ड्रिल हैं, रोड ओपनिंग पार्टीज़ होती हैं, कोई भी बड़ी कॉन्वॉय अगर चलती है तो उसके अंदर एंटी आईडी जैमर्स पहले चलते हैं, रोड की सेनिटाइजेशन चलती है और जितने भी लेट्रल्‍स, आर्टीरियल रोड्स, लिंक रोड्स हाईवे को ज्‍वॉइन करते हैं उन्‍हें कवर किया जाता है ताकि कोई मिलिटेंट या कोई मिसएडवेंचर एक्टिविटी न कर सके और सत्‍यपाल मलिक जी ने भी ये अपने वक्‍तव्‍य में कहा है कि लिंक रोड पर कोई जिप्‍सी नहीं थी, कोई मैन पावर नहीं थी, कोई डिफेंस फोर्सेज नहीं थी, तो ये एक बहुत ही बड़ी ऑपरेशनल लैप्‍स है।
जनरल शंकर रॉयचौधरी ने ये कहा कि अगर जहाज सीआरपीएफ को दिए जाते तो आज ये दुर्घटना नहीं घटती। इसके अलावा उस समय इंटेलीजेंस की जो इनपुट्स पिछले 1 महीने से, 2 जनवरी, 2019 से लेकर 13 फरवरी, 2019 तक लगातार आ रही थी कि कोई भी मिलिटेंट एक्टिविटी हो सकती है, वारदात हो सकती है, सॉफ्ट टारगेट हैं कॉन्‍वॉयज़, उनके ऊपर मिलिटेंट एक्टिविटी हो सकती है, अटैक हो सकता है, ऐम्‍बुश हो सकता है, उसके बावजूद उसके ऊपर कोई एक्‍शन नहीं लिया गया।
इसके अलावा सत्‍यपाल मलिक जी ने भी कहा और उसको रीइंफोर्स किया जनरल शंकर रॉयचौधरी जी ने कि 300 किलो आरडीएक्‍स अगर एक गाड़ी के अंदर 10 से 12 दिन वहां पर घूम रहा है, तो इसका मतलब ये बहुत बड़ी एक साजिश थी और एक बहुत बड़ी इंटेलिजेंस और सिक्‍योरिटी फेल्‍योर था। हम लोगों ने उस इलाके में काम किया है अगर 10-15 किलो आरडीएक्‍स भी आसपास कहीं पता चलता है किसी इलाके के अंदर है, तो पूरी की पूरी सिक्‍योरिटी फोर्सेस अलर्ट हो जाती है और उस एक्‍सप्‍लोसिव को और उसके सोर्स को ढूंढने की कोशिश करती हैं और निष्‍क्रिय करने की कोशिश करती हैं, लेकिन मुझे अचरज है इस बात का कि 300 किलो आरडीएक्‍स 10 से 12 दिन तक एक गाड़ी के अंदर घूम रहा है और सिक्‍योरिटी फोर्सेस को या इंटेलिजेंस नेटवर्क को ये जानकारी नहीं हुई और, अगर ये पुख्‍ता जानकारी आगे पास की जाती और इनको, मिलिटेंट्स को अगर पकड़ा जाता तो आज ये सभी शहीद जवान हमारे बीच होते।
इसके अलावा जनरल शंकर रॉयचौधरी ने बड़े ही वैलिड सवाल पूछे हैं, उन्‍होंने कहा है कोट ये अंग्रेजी में है- “The primary responsibility behind the loss of lives in Pulwama rests onthe government headed by Prime Minister”, and says the NSA who advised him “should also get his share of blame for the intelligence failure”.
क्‍या कोई रेस्‍पॉन्सबिलिटी या अकाउंटेबिलिटी इस फेल्‍योर की किसी के ऊपर फिक्‍स की गई? मिनिस्‍ट्री ऑफ होम के ऊपर फिक्‍स की गई? सीआरपीएफ के कमान्‍डर्स के ऊपर फिक्‍स की गई? या नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर के ऊपर फिक्‍स की गई? जो बेसिक, जो मूलभूत ढांचा है उसके हिसाब से जो इंटेलिजेंस इनपुट्स देने की जो जिम्‍मेदारी है आईबी की, रॉ की और इंटेलिजेंस एजेंसीज़ की, वो नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर के ज्‍यूरिस्डिक्‍शन के अंदर आता है और ये पुख्‍ता सबूत, जो पुख्‍ता इंफॉर्मेशन है ये सिक्‍योरिटी फोर्सेस को क्‍यों नहीं दी गई? और अगर ये दी जाती तो शायद ये इंसिडेंट नहीं होता।
मोटे तौर पर जनरल रॉयचौधरी ने कहा है, फिर दोबारा से मैं उनकी कोट करता है “It’s a slip up that the government is trying to wash its hands of.” कि सरकार अपनी गलतियों को छुपाना चाहती है और लोगों को इसके बारे में नहीं बताना चाहती। ये बहुत ही सीरियस सवाल है जो कि सिक्‍योरिटी एजेंसीज़, जो वहां पर अपनी जान को जोखिम में डालकर देश की एकता और अखंडता को बचाने के लिए और बॉडर्स के ऊपर और नॉर्थ ईस्‍ट के अंदर जो अपनी अन्फ्लिन्चिंग लॉयलटीज के साथ वहां पर काम कर रहे हैं और अगर उनको जो बैक बोन सपोर्ट इंटेलीजेंस नेटवर्क की मिलनी चाहिए, अगर वो न मिले, तो उनके लिए ऑपरेट करना बड़ा मुश्किल हो जाएगा।
तो इन सब चीजों का संज्ञान और आप लोगों को बताते हुए मैं डिफेंस फ्रेटरनिटी की तरफ से और देश के सैनिकों की तरफ से और देश की तरफ से ये सवाल उठाना चाहता हूं।
Therefore, we demand that the Govt of India publish a White Paper on the Pulwama attacks, describing(i) how the attacks took place, (ii) what were the intelligence failures, (iii) why troops were denied aircraft, (iv) what security lapses occurred, (v) the role of CRPF, MHA, NSA and PMO, especially failures of responsibility and efforts to cover them up. और चार साल बीत चुके हैं और सरकार ने अभी तक इसके बारे में कोई जिक्र नहीं लिया, 17 लोग इसके अंदर उन्‍होंने नामित किए, जिनमें से 7 लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है, कुछ लोग आज भी बाहर घूम रहे हैं।
तो हम सरकार से जानना चाहते हैं, हम डिमान्‍ड करते हैं कि वो एक व्‍हाईट पेपर इस पूरे इंसिडेंट के ऊपर लेकर आएं ताकि देश को मालूम चले कि असलियत क्‍या थी? क्‍या हुआ? किसकी ग‍लतियां थी? किनकी वजह से हमारे सैनिकों ने शहादत दी? और किनको सरकार बचाना चाहती है? ऐसा एक श्‍वेत पत्र उनको लाना चाहिए।
धन्‍यवाद!
विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने कहा कि हमने देखा कि कोई कहता है कई सारे ग्राफिकल प्रिजेंटेशन हुए, कुछ ड्रैमेटिक प्रिजेंटेशन हुए, जो आप लोगों की तरफ से अलग-अलग मीडिया संस्थान ने किए। लेकिन कोई नहीं जानता कि एक्चुअली क्या हुआ। कोई कहता है कि 200 किलो आरडीएक्स, कोई कहता है 300 किलो आरडीएक्स, कोई कहता है कि इस मूवमेंट के बारे में किसको मालूम था। तो हमने देखा कि हैडलाइन बहुत बदली। हम साल में एक बात जयंती के दिन याद कर रहे हैं, लेकिन क्या इसकी रिपोर्ट आई, क्या ये सवाल कि क्या सरकार ने इस रिपोर्ट की प्राथमिकता को सबसे पीछे कर दिया है? ये एक सवाल बनता है और कल जब हाल ही में जो सत्यपाल मलिक जी ने बातें कही थी, उनकी रोशनी में ये बातें बहुत ज़रूरी हैं, जिसमें ये सवाल एक और मन में आता है, ये सारे सवाल हम लोगों के अंदर दिलों में थे, लेकिन सामने नहीं आते थे, क्योंकि हम देखते थे कि हैडलाइन बदल रही थी जबकि एयरफोर्स का ट्राई सर्विस कोरियर हमेशा मौजूद होता है, उसके बाद डिनाय क्यों किया गया?
तो वो सारे सवाल उठते हैं और इन सब सवालों का जवाब एक पूरी अमूल चूल एक अच्छी रिपोर्ट होगी, उसमें मिलेगा। जिससे अटकलें बंद हो जाएंगी और हम ये जान पाएंगे कि कहाँ कोताही हुई थी, कहाँ लापरवाही हुई थी, किस जगह हमें ज्यादा सुधार की ज़रूरत है, कहाँ हमारी इंटेलीजेंस फेल्योर में कौन से ऐसे छेद हैं, जिन्हें हमें भरना ज़रूरी है। तो ये सारे सवाल हैं हमारे, हम चाहते हैं कि सरकार इसकी रिपोर्ट को सबसे प्राथमिकता में, राष्ट्रहित में, राष्ट्र की सुरक्षा के लिए राष्ट्र के सामने लेकर आए और लंबा समय ऑलरेडी निकल चुका है, ये 4 साल निकल चुके हैं। साथ-साथ सरकार एक श्वेत पत्र भी जारी करे, जिससे इस तरह के दोहराव हम, हमार देश कभी ना देखे। ऐसा लोमहर्षक हादसा हमारे सामने कभी ना आए।
धन्यवाद।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुजरात सरकार को फटकार लगाए जाने के संदर्भ में पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्री शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि देखिए, सुप्रीम कोर्ट के किसी भी ऑर्डर जजमेंट को जब तक ध्यान से पढ़ते नहीं हैं, हम उसकी टिप्पणी से बचते हैं। पर जैसा आप कह रही हैं, अगर ऐसा है तो इस सरकार के लिए शर्मनाक बात है कि ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट को फटकार लगानी पड़ती है। हमारे वहाँ कानून है, संविधान है और जो भी मंत्री बनता है, मुख्यमंत्री बनता है या प्रधानमंत्री बनता है, वो शपथ लेता है कि मैं संविधान को वफादार रहूंगा, कानून को वफादार रहूंगा, भय या पक्षपात के बिना एडमिनिस्ट्रेशन चलाऊंगा।
तो ये जिस तरह से चल रहा है, वो दिखाता है कि वो शपथ भी गलत है, काम भी गलत हैं, चाल-चलन और चरित्र भी ठीक नहीं है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि देखिए, कोई भी सरकार होती है, उसका काम सरकार को सरकार की तरह करना चाहिए। हमारे वहाँ हमारे संविधान ने सभी के कार्यक्षेत्र को ठीक तरह से रखा है और संविधान में जो जिम्मेदारी दी है, उससे आगे कहीं पर भी चलना किसी के लिए भी ठीक नहीं है। इतना मैं ज़रूर कहूंगा उनको।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि हमारा लोकल कहीं पर चलता है, पर हमारे नेशनल लेवल पर और मैंने भी, मैं दिल्ली का भी प्रभारी हूं, मैंने कहा है। क्योंकि हम हर वक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी काम हो, उसमें हम खुद शासन में थे, हम रोड़े नहीं डालते हैं, काम हो। आपको याद होगा 2जी का मसला निकला, सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बना दी थी जांच करने की, सुप्रीम कोर्ट में मैटर पेंडिंग था, पर बीजेपी ने डिमांड की कि जेपीसी दो, हमारी सरकार थी। हम भ्रष्टाचार में कहीं पर भी लीपापोती नहीं करना चाहते थे। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी होने के बावजूद भी 2जी मसले पर कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी दे दी थी। मोदी जी ने दी क्या? क्योंकि वो खुद उसमें शामिल नहीं होते, अगर 20 हजार करोड़ मोदी जी के नहीं हैं, तो ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी अडानी पर हो, उसमें क्य़ा दिक्कत हो सकती है? यहाँ पर सेंट्रल एजेंसी का दुरुपयोग हो रहा है।
सेंट्रल एजेंसियों का दुरुपयोग सिर्फ विरोधी दलों के खिलाफ हो रहा है और जितने भी भ्रष्टाचारी हैं, चुनाव से पहले का आता है कि कोई भी भ्रष्टाचारी बाहर नहीं रहेगा, वो कर दिया मोदी जी ने। कोई भी भ्रष्टाचारी बाहर नहीं है, सब भाजपा में हैं, सब बीजेपी में आ गए हैं, कोई बाहर नहीं है।
कहा था चुनावी जनसभा में कि एक भी भ्रष्टाचारी बाहर नहीं रहेगा, सारे भाजपा में आ गए और सेंट्रल एजेंसी का दुरुपयोग जहाँ भी हो रहा है, हम इसका विरोध करते हैं। मैंने दिल्ली के प्रभारी होने के नाते भी दिल्ली के हमारे नेताओं को भी कहा है कि सेंट्रल एजेंसियों के दुरुपयोग के खिलाफ हम लड़ रहे हैं, लडे़ंगे। जहाँ पर भी सेंट्रल एजेंसी का दुरुपयोग करके अपोजिशन पार्टी के नेताओं को परेशान किया जा रहा है, तो उस अपोजिशन पार्टी के नेता के साथ हम खड़े रहेंगे।
एक अन्य प्रश्न पर कि आम आदमी पार्टी के खिलाफ आप एजेंसी का दुरुपयोग मान रहे हैं या जांच का एक हिस्सा मान रहे हैं? श्री शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि वो तो इतिहास ही बताएगा, पर जिस तरह से ऐसा है कि आपने अपना सम्मान गंवा दिया। पहले क्या होता था कि सेंट्रल एजेंसी की अपना एक रुतवा होता था और सरकार सेंट्रल एजेंसी का दुरुपयोग नहीं करती है। मैं कुछ मीडिया के साथियों के लिए भी, गौर से सुनना आप, कुछ एंकर या तो अनजाने में या जानकर चिल्लाते हैं कि मोदी जी को भी कांग्रेस सरकार थी, तो समन कर दिया था। तो सीएम होने के नाते वो गए थे। मैं आपको कहना चाहता हूं कि अपना रिकॉर्ड ठीक कीजिए। कांग्रेस पार्टी की यूपीए सरकार ने ना तो अमित शाह को जेल में डाला था, ना मोदी को सेंट्रल एजेंसी के जरिए समन किया था। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट थी। हाईकोर्ट ने एसआईटी बनाई। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाई। फेक एनकाउंटर में तथ्य सब मिले। तुलसी और राम, दोनों जिसमें थे, ऐसे तुलसीराम प्रजापति को भी मारा गया था। उसमें अमित शाह को तड़ीपार या जेल हुई थी। मोदी जी को कांग्रेस पार्टी की किसी सरकार के दौरान एजेंसी ने नहीं बुलाया था। सुप्रीम कोर्ट की गठन की हुई कमेटी ने एसआईटी ने मोदी जी को समन किया था। हमने उस वक्त पर आज जो ये करते हैं ऐसा किया होता, तो दोनों में से ना कोई गृहमंत्री होते, ना प्रधानमंत्री होते, पर हमने कभी भी सेंट्रल एजेंसी का दुरुपयोग उस वक्त नहीं किया था। ये आपका रिकॉर्ड ठीक करने के लिए भी मैं कह रहा हूं, कुछ लोग मानते हैं कि क्या हो गया। ये सच्चाई है कि बीजेपी के किसी भी नेता को कांग्रेस ने सेंट्रल एजेंसी के जरिए समन नहीं किया था।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि देखिए कांग्रेस पार्टी में अंदरुनी लोकतंत्र है, इंटरनल डेमोक्रेसी है। तो निजी राय किसी ने कोई रख दी, रख दी। हमारे वहाँ वो थोपा हुआ आका कहे वो ही सही और आका के लाइन में नहीं रहे तो पॉलिटिकल ही नहीं। हरेन पंड्या जी के पिता जी कहते थे कि फिजिकल मर्डर भी आका ने करवाया। वो वहाँ हैं, हमारा किसी ने व्यक्तिगत पर मैंने आपको हमारी पार्टी की नेशनल लाइन आपको बताई है और आगे आपका जो सवाल था कि आपका क्या कहना है- अब इतिहास जो है, वही अगर कल एजेंसी ने अपनी बिल्कुल आबरु गंवा दी है, तो अभी तो यही लगता है पास्ट और अभी तक का आप कनविक्शन रेट भी देख लो कि बीजेपी आने के बाद ईडी ने जो भी काम किया है, उसमें कितने लोग कनविक्ट हुए, कितना प्रतिशत हुए। तो इसके ऊपर हाँ, अगर कोर्ट मान लेती है, कोर्ट में किसी के खिलाफ आता है, अगर साबित होता है कहीं, तो हम कहीं खड़े नहीं रहेंगे। आज के दिन में स्पष्ट है कि सेंट्रल एजेंसी का दुरुपयोग विरोधी दल को तोड़ने के लिए और किसी ने भी मिल जाए, तो आ जाओ तुम मेरे पास, दाग गायब वाला जादू है, मैं छड़ी कर दूंगा, तुम्हारे सारे केस खत्म, फिर वो कहीं आपको ईस्ट से लेकर वेस्ट तक नजर दौड़ाना हो तो दौडा लेना, जितने भी मैंने कहा ना कि कोई भी भ्रष्टाचारी बाहर नहीं हैं, सब भाजपा में हैं।

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