दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर 15वीं सदी के ए.एस.आई. संरक्षित महल को गिराने और वहां दिल्ली सीईओ के बंगले के अवैध निर्माण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देने का अनुरोध किया

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*कोविड चरण के दौरान नियमों का उल्लंघन कर डी.जे.बी. प्रमुख के बंगले के निर्माण का खुलासा इसी तरह के सी.एम. बंगले के 45 करोड़ के सौंदर्यीकरण घोटाले के खुलासे के एक दिन बाद हुआ है और केजरीवाल सरकार की संवेदनहीनता का परिचायक है – वीरेंद्र सचदेवा

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आज दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लिखे पत्र में दिल्ली के जल विहार में ए.एस.आई. संरक्षित स्मारक महल के विध्वंस और 600 मीटर के बंगले के र्निर्माण की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया है। बंगला दिल्ली जल बोर्ड द्वारा तत्कालीन सी.ई.ओ. श्री उदित प्रकाश आईएएस के कहने पर बनवाया गया था।

उपराज्यपाल का ध्यान आकर्षित करने वाले पत्र में कहा गया है कि यह चौंकाने वाला है कि दिल्ली जल बोर्ड ने 2021 के गम्भीर कोविड चरण के दौरान एक संरक्षित स्मारक को ध्वस्त करने का यह घिनौना कृत्य किया और उसके बाद तेजी से उस पर 600 मीटर का बंगला बनाया।

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने कहा है कि 600 मीटर के बंगले को बनाने में सामान्य तौर पर करीब रूपए 15 करोड़ का खर्च आता है और यह आश्चर्य की बात है कि यह बजट कैसे स्वीकृत हुआ और तत्कालीन सी.ई.ओ. उदित प्रकाश और उनके तत्कालीन प्रभारी मंत्री सत्येंद्र जैन की निर्माण राशि स्वीकृत करने में भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

सचदेवा ने कहा है कि यह आश्चर्य की बात है कि दिल्ली जल बोर्ड ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की मंजूरी के बिना निडरता से संरक्षित स्मारक को ध्वस्त कर दिया और फिर बंगले के निर्माण के लिए दिल्ली शहरी कला आयोग या तत्कालीन प्रासंगिक दक्षिण दिल्ली नगर निगम की मंजूरी नहीं ली।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने उपराज्यपाल से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देने का अनुरोध किया है।

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि कोविड के दौर में नियमों का उल्लंघन कर दिल्ली जल बोर्ड प्रमुख के बंगले के निर्माण का खुलासा इसी तरह के मुख्यमंत्री के बंगले के सौंदर्यीकरण में 45 करोड़ का घोटाले के एक दिन बाद आया है और केजरीवाल सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

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