मणिपुर में सत्ता बरकरार रखने की भाजपा की इच्छा लोगों पर भारी पड़ रही- राघव चड्ढा

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*केंद्र सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 355 और 356 को कायम रखने में विफल- राघव चड्ढा

*“आप” सांसद राघव चड्ढा ने मणिपुर में राज्य और केंद्र सरकार की विफलताओं पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत निलंबन नोटिस दिया

*राज्यों को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाना केंद्र सरकार का कर्तव्य- राघव चड्ढा

*अगर मणिपुर में गैर-भाजपा सरकार होती तो हफ्तों पहले ही राष्ट्रपति शासन लागू हो गया होता- राघव चड्ढा

*मणिपुर में लोग डबल इंजन सरकार से परेशान हैं- राघव चड्ढा

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 355 और 356 को बनाए रखने में विफलता के लिए भाजपा की केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मणिपुर में सत्ता बरकरार रखने की भाजपा की इच्छा लोगों पर भारी पड़ रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मणिपुर की स्थिति पर ध्यान देने और यह बताने की मांग कर रहा है कि राज्य को अशांति का सामना क्यों करना पड़ रहा है। सांसद ने मणिपुर में राज्य और केंद्र सरकार की विफलताओं पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत निलंबन नोटिस भी दिया है।

राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 355 के अनुसार राज्यों में शांति सुनिश्चित करना और उन्हें बाहरी आक्रमण व आंतरिक अशांति दोनों से बचाना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। आज मणिपुर स्पष्ट रूप से आंतरिक अशांति का अनुभव कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इस दायित्व को पूरा करने में पूरी तरह से विफल रही है।

राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने भाजपा सरकार को अनुच्छेद 356 की भी याद दिलाई, जिसमें कहा गया है कि यदि राज्यपाल किसी राज्य में कानून-व्यवस्था और संवैधानिक मशीनरी के खराब होने की रिपोर्ट करते हैं, तो केंद्र और राष्ट्रपति को कार्रवाई करनी चाहिए और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मणिपुर के राज्यपाल विभिन्न मीडिया के माध्यम से राज्य की गंभीर स्थिति के बारे में बार-बार चिंता जताते रहे हैं। मणिपुर में हजारों लोग बेघर हो गए हैं और सैकड़ों लोगों की जान चली गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं की है।

उन्होंने भाजपा पर लोगों और राज्य के कल्याण के बजाय अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया और सवाल किया कि अगर मणिपुर में गैर-भाजपा सरकार होती तो क्या केंद्र इस तरह से कार्य करती? उन्होंने इस बात पर आश्चर्य और चिंता व्यक्त की कि मणिपुर में जारी तबाही के बावजूद राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया गया है। इससे पता चलता है कि राज्य में सत्ता बरकरार रखने की भाजपा की इच्छा लोगों की पीड़ा पर भारी पड़ रही है।

“आप” सांसद राघव चड्ढा ने आगे कहा कि विभिन्न विपक्षी नेताओं ने मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के लिए सदन में कामकाज के निलंबन के लिए नियम 267 के तहत एक नोटिस प्रस्तुत किया है। वे मणिपुर के लोगों की दुर्दशा पर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का ध्यान आकर्षित करने और उचित कार्रवाई करने करने के लिए विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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