खरगे बोले- नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई    

Listen to this article

*चुनावी नतीजों ने दिखाया कि देश का संविधान और जनता सब पर भारी, लोकतंत्र में अहंकार की कोई जगह नहीं  

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सोमवार को बेहद ही आक्रामक अंदाज में नजर आए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने संबोधन में उन्होंने एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर हमला बोला। 

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस साल राष्ट्रपति जी का पहला अभिभाषण 31 जनवरी को हुआ था और दूसरा अभिभाषण 27 जून को हुआ। पहला अभिभाषण चुनावी था और दूसरा भी वैसा ही है। इसमें न दिशा है, न कोई विजन है। हमें भरोसा था कि राष्ट्रपति संविधान और लोकतंत्र की चुनौतियों पर कुछ बातें जरूर रखेंगी। सबसे कमजोर तबकों को ठोस संदेश देंगी। लेकिन हमें घोर निराशा हुई कि इसमें गरीबों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए कुछ भी नहीं है। पिछली बार की तरह ये सिर्फ तारीफ का पुल बांधने वाला अभिभाषण है।

खरगे ने कहा, देश के इतिहास में यह पहला चुनाव था, जिसका मुद्दा संविधान की रक्षा करना था। भाजपा ने 400 पार का नारा दिया था। उनके नेताओं ने तो 400 पार होने पर संविधान बदलने की बात भी कही। इसलिए इंडिया गठबंधन को संविधान बचाने की मुहिम चलानी पड़ी। जनता ने यह महसूस किया कि बाकी मु्द्दे आते-जाते रहेंगे, लेकिन जब संविधान बचेगा तभी लोकतंत्र रहेगा। इसलिए इस लड़ाई में आम नागरिकों ने विपक्ष का साथ दिया और संविधान को बचाने का काम किया। अभी भी देश में सामाजिक न्याय के विपरीत मानसिकता वाले लोग मौजूद हैं। यह लड़ाई तभी पूरी होगी जब ऐसी विचारधारा को उखाड़ कर फेंक दिया जाएगा।
 

उन्होंने कहा, इस सत्र की खूबी यह है कि जनादेश के डर से सत्ता पक्ष भी संविधान की चर्चा कर रहा है, पर ऐसे लोग भी हैं जिन्हें संसद में जय संविधान के नारे से आपत्ति है। इसलिए सिर्फ संविधान को माथे पर लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके रास्ते पर चलकर दिखाना भी होगा।

खरगे ने कहा, विपक्ष को सदन में अपनी बातें रखने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि भाजपा की सोच थी कि संसद में कोई विपक्ष न हो। अगर इनकी सोच ऐसी न होती तो 17वीं लोकसभा में पहली बार डिप्टी स्पीकर का पद खाली न रहता।

खरगे ने कहा, चुनावी नतीजों ने दिखा दिया है कि देश का संविधान और जनता सब पर भारी है। लोकतंत्र में अहंकारी नारों की कोई जगह नहीं है। प्रधानमंत्री नारे देने में माहिर हैं। नरेंद्र मोदी सिर्फ नारे देकर और मीठी-मीठी बातें बोलकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। मणिपुर एक साल से जल रहा है, मगर प्रधानमंत्री आज तक वहां नहीं गए। मोदी सबका साथ, सबका विकास कहते हैं। लेकिन उन्होंने सिर्फ कुछ लोगों का साथ दिया और गरीबों का सत्यानाश कर दिया।

पिछले एक महीने की घटनाओं पर मोदी सरकार को घेरते हुए खरगे ने कहा कि नीट, यूजीसी नेट समेत अन्य पेपर लीक हुए। भीषण ट्रेन दुर्घटना हुई। जम्मू-कश्मीर में तीन बड़े आतंकी हमले हुए। राम मंदिर की छत लीक हुई। तीन दिन में तीन हवाई अड्डों की छत टूटी। बिहार में 15 दिन में पांच पुल टूटे। टोल टैक्स बढ़ा। रुपये में ऐतिहासिक गिरावट हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि मोदी सरकार जरूरी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की राजनीति करती है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा को इतनी ठेस पहुंचाई , जितनी किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं पहुंचाई।विपक्ष किसानों की बात करता है तो नरेंद्र मोदी भैंस खोलने की बात करते हैं। विपक्ष भाजपा की देश बांटने वाली सोच पर बात करता है तो नरेंद्र मोदी औरंगजेब और मुगल की बात करते हैं। विपक्ष बेरोजगारी और पेपर लीक की बात करता है तो नरेंद्र मोदी मंगलसूत्र और मुजरे की बात करते हैं। विपक्ष महंगाई पर बात करता है तो नरेंद्र मोदी विदेश में महंगाई की बात करते हैं। विपक्ष जनता की बात करता है तो नरेंद्र मोदी अपने मन की बात सुनाने लगते हैं। प्रधानमंत्री को जनता के मुद्दों पर बात करनी चाहिए।

शेयर बाजार घोटाले का मुद्दा उठाते हुए खरगे ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 19 मई को कहा कि शेयर बाजार तेजी से आगे बढ़ने वाला है, इसलिए निवेश कीजिए। फिर गृह मंत्री ने भी लोगों से बाजार में निवेश करने की बात कही। एग्जिट पोल आने के बाद तीन जून को शेयर बाजार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन चार जून को चुनाव परिणाम आने के बाद शेयर बाजार गिर गया। इससे निवेशकों को 30 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ये एक बड़ा घोटाला है, जिसे सरकार ने छिपाने की कोशिश की। 
अपने संबोधन ने खरगे ने आरएसएस पर देश की शिक्षा प्रणाली पर कब्जा करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने आगे कहा, अगर देश में सब कुछ निजी क्षेत्रों को सौंप दिया गया तो दलित, आदिवासी, पिछड़े और वंचित वर्गों के बच्चे कहां पढ़ेंगे। देश में हर 15 मिनट में दलितों के खिलाफ एक अपराध होता है और हर दिन छह दलित महिलाओं का बलात्कार होता है। देश में 21वीं सदी के भारत की एक सच्चाई ये भी है। ये सामाजिक न्याय का मुद्दा है, इस तरफ ध्यान देना जरूरी है।

Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *