उन्नत भारत अभियान के तहत डीयू के हंसराज कॉलेज में कार्यशाला आयोजित

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दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा उन्नत भारत अभियान (यूबीए) के तहत हंसराज कॉलेज के महात्मा हंसराज मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएचएमटीटीसी) के सहयोग से टिकाऊ भविष्य को प्राप्त करने के लिए स्वयंसेवकों के योगदान और प्रयास पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपने क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित सामाजिक नेताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रमा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में यूबीए के राष्ट्रीय समन्वयक, आईआईटी दिल्ली से प्रो. वी. के. विजय उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में डीयू के सामाजिक कार्य विभाग प्रमुख, प्रो. संजय रॉय उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक के रूप में यूबीए, दिल्ली विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी प्रो. राजेश ने प्रोग्राम के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. रमा ने अपने संबोधन की शुरुआत “नमस्ते” के महत्व को बताते हुए की। उन्होंने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए हंसराज कॉलेज को चुनने के लिए प्रो. राजेश को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये युवा दिमाग किसी भी पहल का मूल है और उन्हें हमेशा अपने दिल और दिमाग में उल्लास रखना चाहिए। प्रो. रमा ने शैक्षणिक संस्थान में स्वयंसेवी इकाई की जरूरत पर भी जोर दिया।

यूबीए के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. वी. के. विजय ने अपने संबोधन की शुरुआत उन्नत भारत अभियान की पृष्ठभूमि (आवश्यकता और महत्व) को बताते हुए की। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सरकार के ग्रामीण समर्थक दृष्टिकोण और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत के कारण, यह ग्रामीण परिवर्तन योजना शुरू की गई है। उन्होंने पीपीटी के माध्यम से उन्नत भारत अभियान के तहत समाज के तकनीकी, सामाजिक और प्रबंधन हस्तक्षेपों को समझाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर हमें 2047 में विकसित भारत की कल्पना करनी है, तो भारतीय गांवों को सशक्त बनाने की सख्त जरूरत है। दिल्ली विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय संबंध की अध्यक्ष प्रोफेसर नीरा अग्निमित्रा ने बताया कि यूबीए ने दिल्ली विश्वविद्यालय में कैसे काम किया है। उन्होंने यूबीए, डीयू के तहत गांवों को चुनने के लिए आवश्यकता आकलन प्रक्रिया के बारे में बात की। उन्होंने इस क्षेत्र में काम करने, कार्य अभिविन्यास नहीं बल्कि प्रक्रिया अभिविन्यास पर जोर दिया। डीसीईई से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गीता मिश्रा ने अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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