आयुर्वेद हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ा वरदान है। परंतु एलोपैथी के इस योग में आयुर्वेद कहीं न कहीं पीछे छूटने से समाजसेवी संस्थाएं पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जागरूक अभियान चलाकर लोगों को जड़ी बूटियों और पौधों के अहमियत को बताया जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली के द्वारका में स्थित दीनदयाल उपाध्याय कॉलिज में इंडिया ए आई डी एस एन जी ओ द्वारा अश्वगंधा स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए अश्वगंधा के औषधीय लाभों पर एक ज्ञानवर्धक सैमीनार का आयोजन किया गया। सेमिनार भारतीय पत्रकार संघ के सहयोग से किया गया। समारोह की अध्यक्षता संस्था की महासचिव डॉक्टर अर्चना द्वारा किया गया। समारोह का उद्देश्य अश्वगंधा के स्वास्थ्य-प्रचार गुणों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को इस औषधीय पौधों की खेती में शामिल करना था। समारोह के मुख्य अतिथि आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ प्रोफेसर डॉक्टर एम.के. दाधीच थे। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा विभाग के पूर्व निदेशक डॉक्टर एन.वी. कामत , ब्रह्म प्रकाश चरक आयुर्वेद के एडिशनल डायरेक्टर डॉक्टर भरत Bhayol , दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉक्टर सच्चिदानंद त्रिपाठी , आयुष मंत्रालय से डॉक्टर जितेंद्र कुमार के इलावा कई अतिथियों ने यहाँ आये लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए औषधीय पौधों को दैनिक जीवन में शामिल करने का सुझाव दिया। समारोह में पश्चिमी दिल्ली के विभिन्न निजी और सरकारी स्कूलों के 25 प्रधानाचार्यों को संस्था की तरफ़ से एक पेड़ , प्रमाण पत्र और शील्ड के साथ सम्मानित भी किया गया। जिन्हें अपने स्कूलों में हर्बल गार्डन स्थापित करने में उनके उल्लेखनीय सहयोग के लिए सम्मानित किया गया। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से प्रेरित इस पहल ने छात्रों को हरित वातावरण बनाने में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। प्रत्येक प्रधानाचार्य को पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने और छात्रों को औषधीय पौधे उगाने के लिए प्रोत्साहित करने की उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया। टोटल ख़बरें के वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना को भी उनकी उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए संस्था द्वारा सम्मानित किया गया।
समारोह में ऑफ़लाइन और ऑनलाइन पेंटिंग, कला और जिंगल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अश्वगंधा पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई, जिसमें 300 से अधिक छात्रों ने स्वास्थ्य और प्रकृति पर अपने रचनात्मक दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में भाग लिया उनकी प्रतिभा और पर्यावरण चेतना का जश्न भी मनाया गया। इसके अतिरिक्त, इंडिया-एड्स ने अश्वगंधा सहित 500 से अधिक पौधे वितरित किए और हर्बल प्रजातियों का एक राशि उद्यान स्थापित किया, जिससे दिल्ली के शहरी क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने में व्यावहारिक भागीदारी को बढ़ावा मिला। एनजीओ द्वारा एम्बुलेंस सेवाओं के साथ-साथ निःशुल्क स्वास्थ्य और नेत्र जांच के लिए एक स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया। इन सुविधाओं से डीडीयू कॉलेज के 1,000 से अधिक छात्रों और कर्मचारियों ने लाभ उठाया।
आपको बता दें कि डॉक्टरों, प्रोफेसरों और विशेषज्ञों के एक प्रतिष्ठित पैनल ने भी भाग लिया, जिन्होंने समग्र स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा निर्माण और तनाव से राहत में अश्वगंधा की भूमिका पर अपने ज्ञान को साझा किया। उनकी अंतर्दृष्टि ने सेमिनार को समृद्ध किया, जिससे छात्रों और उपस्थित लोगों दोनों को अपने जीवन में अश्वगंधा और अन्य हर्बल उपचारों को अपनाने के लिए आग्रह किया गया। टोटल ख़बरें दिल्ली से राजेश खन्ना की विशेष रिपोर्ट।


