दिल्ली विश्वविद्यायल में स्कूलों के प्रिंसिपलों का  एक्सपोजर विजिट प्रोग्राम आयोजित

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*विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा से उच्चतर शिक्षा में पदार्पण हेतु उचित मार्गदर्शन करना है जरूरी: डीयू कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता

एनईपी 2020 के अंतर्गत सीबीएसई की पहल के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के प्रिंसिपलों के लिए एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के 96 प्रिंसिपलों ने भाग लिया। दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस रीगल लॉज स्थित काउंसिल हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम के परिचयात्मक सत्र का शुभारंभ करते हुए डीयू कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता ने सभी प्रिंसिपलों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह है कि हम कैसे मिलकर विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा से उच्चतर शिक्षा, विशेषत: व्यावसायिक शिक्षा, में पदार्पण हेतु उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही जरूरी काम है।

डॉ विकास गुप्ता ने कहा कि स्कूली विद्यार्थियों को अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उच्चतर शिक्षा के लिए कॉलेज जाना होता है। ऐसे में उनके शिक्षक ही उनका सही मार्गदर्शन कर सकते हैं। एनईपी 2020 के तहत सीयूईटी के माध्यम से ही डीयू में दाखिले होते हैं; इसलिए यह कार्यक्रम बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने डीयू के 102 वर्षों के गौरवपूर्ण इतिहास पर भी प्रकाश डाला और बताया कि डीयू ने पिछले दिनों कुलपति प्रो. योगेश सिंह के गतिशील मार्गदर्शन में वाइस चांसलर इंटर्नशिप स्कीम शुरू की है। इसके अलावा अनाथ बच्चों और एकल बालिका के लिए भी विश्वविद्यालय के दाखिलों में विशेष प्रावधान किया गया है।  

डॉ. बिश्वजीत साहा, निदेशक (सीबीएसई) ने इस सहयोग के लिए डीयू का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से हमारे प्रिंसिपल विश्वविद्यालय की व्यवस्था का सीधे अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि उच्चतर शिक्षण संस्थानों में दाखिला प्रक्रिया बहुत ही महत्वपूर्ण है। उसके लिए स्कूली बच्चों को कैसे तैयार करें, यह जानकारी इस कार्यक्रम से हमारे प्रिंसिपलों को मिलेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत एक सपना है और इसे साकार करने के लिए हम सबका सहयोग बहुत जरूरी है। इस अवसर पर कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मागो, डीन (शैक्षणिक मामले) प्रो. के. रत्नाबली, डीन एडमिशन प्रो. हनीत गांधी और संयुक्त रजिस्ट्रार (शैक्षणिक) जय चंदा आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के परिचय सत्र के बाद ओरिएंटेशन सत्र  का आयोजन किया गया जिसमें कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक और डीयू की एसईसी समिति की अध्यक्ष प्रो. पायल मागो ने एनईपी 2020 और यूजीसीएफ 2022 के अनुसार कौशल शिक्षा पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। प्रो. पायल मागो ने पीपीटी के माध्यम से स्किल एजुकेशन समझते हुए कहा कि स्किल एजुकेशन बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर विद्यार्थियों को ‘रेडी टू जॉब’ करना है तो स्किल इनहांसमेंट कोर्सों पर ध्यान देना होगा। प्रो. पायल मागो ने बताया कि डीयू में 140 स्किल कोर्स चल रहे हैं। डीन एडमिशन प्रो. हनीत गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि डीयू की एडमिशन वेबसाइट पर वीडियो और ब्रोशर के रूप में सभी तरह की जानकारी उपलब्ध है। उन्होंने प्रिंसिपलों से आह्वान किया कि विद्यार्थियों को बताया जाए कि विश्वसनीय स्रोत से ही जानकारी प्राप्त करें।

डीन (शैक्षणिक मामले) प्रो. के. रत्नाबली ने स्कूल से उच्चतर शिक्षा में निर्बाध परिवर्तन के लिए पाठ्यचर्या और क्रेडिट संरचना पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने एनईपी 2020 के तहत डीयू में जारी विभिन्न प्रोग्रामों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस सत्र से यूजी का चौथा वर्ष शुरू हो रहा है। प्रो. रत्नाबली ने बताया कि एनईपी 2020 के तहत विद्यार्थियों को मल्टीपल एग्जिट और एंट्री का प्रावधान है। इसके पश्चात इंटरएक्टिव सत्र का आयोजन किया गया जिसमें प्रिंसिपलों ने अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। डोफार के पश्चात सभी प्रिंसिपलों को डीयू की कौशल प्रयोगशाला/कौशल विकास केंद्रों का दौरा करवाया गया। 

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