*मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बजट को बाबा साहेब के समता, महात्मा गांधी के सर्वोदय और नरेंद्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास के सिद्धांतों पर आधारित बताया है, जबकि सच्चाई यह है कि यह बजट मोदी जी के झूठ और जुमलों के आदर्शों का बजट है – देवेन्द्र यादव
*मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला होते हुए भी महिलाओं के हिस्से की खीर खुद खाकर उनको वंचित कर दिया है। इस बजट में लाडली योजना, आंगनबाडी, हैल्पर योजना, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ योजना, सहेली समन्वय योजना, केन्द्र सरकार की महिला सशक्तिकरण योजना, मिशन योजना, किशोरी योजना, ग्रामीण विद्यार्थियों के मुफ्त आने जाने की सुविधा योजना आदि के बजट में कमी करके उन्होंने महिलाओं के प्रति अपनी मंशा को जाहिर कर दिया है- देवेन्द्र यादव
*महिला समृद्धि योजना के तहत 2500 रुपये प्रति महिला को देने के वादे को निभाने के लिए बजट में केवल 5100 करोड़ का प्रावधान उॅट के मुह में जीरे के समान है। भाजपा की दिल्ली सरकार अपने वादे से भागती नजर आ रही है क्योंकि गिनी चुनी महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल पाएगा जबकि 44 लाख महिलाओं ने उम्मीद के साथ चुनाव मतदान किया था- देवेन्द्र यादव
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली सरकार के बजट को भाजपा के झूठ और जुमलों का बजट करार देते हुए कहा कि जिस उम्मीद के साथ दिल्ली ने भाजपा को विजय दिलाई थी उनकी वे उम्मीदें आने वाले 5 साल में पूरी होती नजर नही आती। यादव ने कहा कि विधानसभा में भाजपा की दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्रीरेखा गुप्ता ने 1 लाख करोड़ का बजट पेश कर अपनी पीठ थपथपाई है। जबकि हकीकत कुछ और है। हकीकत यह है 1 लाख करोड़ की राशि में से 9950 करोड़ की राशि दिल्ली के करदाताओं की जेब खाली करके टैक्स के रुप में वसूला जाएगा।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बजट को बाबा साहेब के समता, महात्मा गांधी के सर्वोदय और नरेन्द्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास के सिद्धांतों पर आधारित बताया है, जबकि सच्चाई यह है कि यह बजट मोदी जी के झूठ और जुमलों के आदर्शों का बजट है। उन्होंने कहा कि जिन विधायकों के द्वारा दिल्ली की कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया जाएगा। उन विधायकों से इस बजट के लिए भाजपा सरकार ने कोई राय नही ली है, जो कि अपने जुमला नजर आता है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार के समय 2013-14 में कुल बजट का कैपिटल एक्सपेंडिचर 34.3 प्रतिशत था। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी सरकार में यह कुल बजट का 19.85 प्रतिशत था और भाजपा सरकार इसे 28 प्रतिशत करके अपनी पीठ थपथपा रही है। साफ तौर पर चलता है कि जब कांग्रेस की दिल्ली सरकार ने 12 वर्ष पहले दिल्ली का चहुंमुखी विकास किया था उस समय कुल बजट का कैपिटल एक्सपेंडिचर 34.3 प्रतिशत था और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दूरदर्शी सोच के साथ काम किया जिनका इरादा विकास था। आज 12 साल बाद महंगाई बढ़ी है और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाने की लागत बढ़ी है। तब भाजपा सरकार 28 प्रतिशत केपिटल एक्पेंडिचर में दिल्ली विकास कैसे कर पाएगी? यह महत्वपूर्ण प्रश्न है। जो मुख्यमंत्री दिल्ली में विकास की नींव डालने की बात कह रही हैं वह 28 प्रतिशत कैपिटल एक्सपेंडिचर में केवल लीपापोती ही कर पाएंगी।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 15000 करोड़ लद्यु ऋण के रुप में लेने की बात की है। जबकि पिछली सरकार ने जब 10000 करोड़ की यह राशि लेने की बात की थी तो केन्द्र सरकार के प्रींसिपल वित्त सचिव ने ऑबजेक्शन लगाते हुए कहा था कि दिल्ली का कर्जा 20238-39 तक 172677.47 करोड़ हो जाएगा, उसको दिल्ली सरकार तक वापस कर पाऐगी। जबकि वर्तमान भाजपा की दिल्ली सरकार यह लघु ऋण 10 हजार करोड़ की जगह 15 हजार करोड़ लेने की बात कर रही है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि आज के बजट से साफ होता है कि केन्द्र सरकार ने दिल्ली के साथ सौतेला व्यवहार करके दिल्ली की जनता के हितों की अनदेखी की है क्योंकि दिल्ली के पिछले बजट में केन्द्र सरकार की ग्रांट 4391.94 करोड़ थी जबकि वर्तमान भाजपा सरकार ने यह कहा है कि वे 7348 करोड़ केन्द्र सरकार ग्रांट के रुप में लेंगे। यह 7348 करोड़ की राशि केन्द्र सरकार कैसे देगी। प्रश्न यह उठता है कि केन्द्र सरकार का बजट पहले ही घोषित हो चुका है और उसमें इस ग्रांट का कोई प्रावधान नही था, तो यह पैसा कैसे आएगा।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि महिला समृद्धि योजना के नाम पर 2500 रुपये प्रति महिला को देने के वादे को निभाने के लिए केवल 5100 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो उॅट के मुॅह में जीरे के समान है। भाजपा की दिल्ली सरकार अपने वादे से भागती नजर आ रही है क्योंकि उक्त बजट में गिनी चुनी महिलाओं को ही यह फायदा मिल पाएगा। आंकड़ो की बात करे तो 44 लाख महिलाओं ने कुछ मिलने की उम्मीद के लिए चुनाव मतदान किया था परंतु सरकार उलटा जनता से पैसे वसूलने की तैयारी कर रही है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि आज के बजट में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला होते हुए भी महिलाओं के हिस्से की खीर खुद खाकर उनको वंचित कर दिया है। जैसे लाडली योजना, आंगनबाडी, हैल्पर योजना, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ योजना, सहेली समन्वय योजना, केन्द्र सरकार की महिला सशक्तिकरण योजना, मिशन योजना, किशोरी योजना, ग्रामीण विद्यार्थियों के मुफ्त आने जाने की सुविधा योजना आदि के बजट में कमी की गई है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि बड़ी हैरानी की बात है भाजपा के संकल्प पत्र में यह कहा गया था कि होली दीवाली पर दिल्ली की गृहणी को एक-एक सिलेंडर मुफ्त देंगे। होली बीत गई, सिलेंडर नही दिया और पेस बजट से साफ जाहिर होता है कि दीवाली पर मुफ्त सिलेंडर देने की योजना नही है। इसके साथ-साथ सब्सिडी वाले सिलेंडर का भी बजट में कोई प्रावधान नही है। श्री यादव ने कहा कि दिल्ली में भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में घोषणा की थी कि प्रत्येक गर्भवती महिला को 21000 रुपये आर्थिक मदद और 6 पोषण किट दी जाएगी। जबकि वर्तमान बजट में 210 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की है। इस राशि को यदि हम 21000 रुपये प्रति गर्भवती महिला को देने की बात करें तो 1 लाख गर्भवती महिलाओं को मिल पाएगा। जबकि 2023-24 में दिल्ली में 3,15,087 बच्चों ने जन्म लिया। अर्थात बजट पास होते ही भाजपा सरकार ने दो तिहाई महिलाओं के साथ धोखा किया है जबकि इसमें 6 पोषित किट की राशि को शामिल नही किया गया है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि आज के बजट में यमुना की सफाई के लिए 2000 करोड़ की भारत सरकार से मांग करने की बात हुई है जबकि बजट पेश करने से पहले इसको लेकर बात होनी चाहिए थी, ऐसा लग रहा है कि भाजपा भी केजरीवाल की तरह यमुना की सफाई को लेकर गंभीर नहीं है। केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना का क्या हुआ इसको लेकर भाजपा को जवाब देने चाहिए। तथा यमुना सफाई के नाम पर जो पैसे मिले इसको लेकर श्वेत पत्र भी जारी करना चाहिए। यमुना रिवर फ्रंट को लेकर मंत्री आशीष सूद ने असली कहानी बताई, आज यमुना में पूर्वांचली छठ पर्व कैसे करेंगे इसको लेकर भी कोई रूपरेखा नहीं।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में गर्मी शुरु हो गई है और बहुत जल्द पीने के पानी का संकट होने वाला है परंतु रेखा सरकार वर्तमान बजट में जल संकट को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दी। उन्होंने दिल्ली को अतिरिक्त जल आपूर्ति को लेकर कुछ भी व्यवस्था नहीं। दिल्ली को 740 एमजीडी अतिरिक्त पानी की जरूरत है लेकिन बजट में वर्ष 2021 के लक्ष्य को लेकर तो चर्चा हुई लेकिन अतिरिक्त जलापूर्ति को लेकर ठोस कार्य योजना नही बनाई गई।


