“आप” सांसद राघव चड्ढा ने संसद में एआई पर कहा, “चीन के पास डीपसीक और अमेरिका के पास चैटजीपीटी है, भारत कहां खड़ा है?”

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  • ‘मेक इन इंडिया’ को अब ‘मेक एआई इन इंडिया’ तक विस्तार किया जाना चाहिए – राघव चड्ढा
  • भारत को केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनना चाहिए- राघव चड्ढा
  • सरकार को एआई में निवेश बढ़ाना चाहिए, भारतीय प्रतिभा को रोकना चाहिए और भारतीय एआई स्टार्टअप्स को मदद देनी चाहिए- राघव चड्ढा

राज्यसभा में जीरो आवर के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने वैश्विक एआई दौड़ में भारत की स्थिति पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि जहां अमेरिका और चीन तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं भारत पिछड़ सकता है। उन्होंने एआई निवेश और पेटेंट में भारी अंतर को उजागर किया, जबकि भारत वैश्विक एआई कार्यबल का 15 फीसद योगदान देता है। सांसद ने जोर देकर कहा कि भविष्य में ‘विश्वगुरु’ वही देश होगा जो स्वदेशी एआई में मजबूत होगा और ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ हमें ‘मेक एआई इन इंडिया’ की ओर बढ़ना चाहिए।

राघव चड्ढा ने कहा कि एआई भारत के उभरते हुए भविष्य के लिए जरूरी है। अमेरिका के पास चैटजीपीटी, जेमिनी, एन्थ्रोपिक, ग्रोक हैं। चीन के पास डीपसीक है, जो सबसे शक्तिशाली और किफायती है। लेकिन सवाल यह है कि एआई की इस दुनिया में भारत कहां है? क्या भारत इसमें पिछड़ता रहेगा और अपना एआई मॉडल नहीं बना पाएगा?

राघव चड्ढा ने पेटेंट में अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि 2010 से 2022 तक अमेरिका ने दुनिया के 60 फीसद और चीन ने 20 फीसद एआई पेटेंट दाखिल किए,, जबकि भारत ने सिर्फ 0.5 फीसद पेटेंट दाखिल किए। उन्होंने भारत की क्षमता पर जोर देते हुए कहा कि भारत में सबसे अधिक योग्यता और मेहनती प्रतिभा है। हम वैश्विक एआई कार्यबल का 15 फीसद योगदान देते हैं, जिसमें 4.5 लाख पेशेवर विदेश में काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में दुनिया में तीसरा सबसे अधिक एआई कौशल प्रवेश (स्किल पेनिट्रेशन) है। हमारे पास कौशल, प्रतिभा, मेहनती लोग, विशाल डिजिटल अर्थव्यवस्था और 90 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। फिर भी हम एआई के केवल उपभोक्ता बन गए हैं, निर्माता नहीं।

उन्होंने ओपनएआई के संस्थापक के हालिया बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे भारत के एआई भविष्य को लेकर पूरी तरह निराश हैं। राघव चड्ढा ने जोर दिया कि हमें इसका जवाब देना होगा और एआई का निर्माता बनना होगा, जिसके लिए कुछ कदम उठाने जरूरी हैं।

सांसद ने भारत को एआई महाशक्ति बनाने का रोडमैप पेश करते हुए कहा कि भारत को स्वदेशी एआई चिप्स और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहिए ताकि घरेलू नवाचार को बढ़ावा मिले। इसके लिए एक समर्पित एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड की जरूरत होगी। भारतीय संस्थानों और एआई स्टार्टअप्स को उदार अनुसंधान अनुदान दिए जाएं और शीर्ष एआई प्रतिभा को भारत में रोकने के लिए प्रतिस्पर्धी अवसर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहन दिए जाएं।

उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय एआई स्टार्टअप्स को बड़े पैमाने पर मौजूदा डेटा तक पहुंच दी जानी चाहिए, जो मेटा और गूगल के पास है लेकिन भारतीय कंपनियों के पास नहीं। उन्होंने निवेश बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका ने एआई के लिए 500 बिलियन डॉलर से अधिक, चीन ने 137 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए हैं, जबकि भारत का मिशन केवल एक बिलियन डॉलर का है। अमेरिका अपनी जीडीपी का 3.5 फीसद और चीन 2.5 फीसद अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर खर्च करता है, जबकि भारत केवल 0.7 फीसद खर्च करता है।

राघव चड्ढा ने निष्कर्ष में कहा कि भविष्य में ‘विश्वगुरु’ वही देश होगा जो स्वदेशी एआई में मजबूत होगा। मेक इन इंडिया के साथ-साथ हमें ‘मेक एआई इन इंडिया’ की ओर बढ़ना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि एआई केवल तकनीक नहीं है, यह आर्थिक शक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का मामला है। हम विदेशी एआई मॉडल्स पर निर्भर नहीं रह सकते। भारत को अपना खुद का निर्माण करना होगा।

भारत को एआई महाशक्ति बनाने के लिए राघव चड्ढा के सुझाव

  • स्वदेशी एआई चिप्स और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करें ताकि घरेलू नवाचार को बढ़ावा मिले।
  • चिप निर्माण को प्रोत्साहन दें और देशभर में समर्पित एआई कंप्यूटिंग सिस्टम स्थापित करें।
  • डेटा संरक्षण, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए संप्रभु एआई मॉडल बनाएं।
  • भारतीय संस्थानों और एआई स्टार्टअप्स को उदार अनुसंधान अनुदान प्रदान करें।
  • शीर्ष एआई प्रतिभा को भारत में रोकने के लिए प्रतिस्पर्धी अवसर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहन दें।

“आप” सांसद ने कहा कि 140 करोड़ भारतीय पूछ रहे हैं, क्या हम एआई के केवल उपभोक्ता रहेंगे या निर्माता बनेंगे? नीतिगत कागजों का समय खत्म हो चुका है। अब कार्रवाई का समय है।

उन्होंने सरकार से स्पष्ट, समयबद्ध राष्ट्रीय एआई रणनीति की घोषणा करने का आग्रह किया, जिसमें मजबूत फंडिंग, संस्थागत सहयोग और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास शामिल हो। कहा कि भारत के पास प्रतिभा, उत्साह और क्षमता है। अब हमें दूरदृष्टि और निवेश की जरूरत है। दुनिया इंतजार नहीं कर रही, हमें भी नहीं करना चाहिए।

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