रियल लाइफ हीरो सोनू सूद ने भक्ति और पर्यावरण-अनुकूल परंपराओं के साथ मनाई गणेश चतुर्थी

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*रियल लाइफ हीरो सोनू सूद के घर पर गणेश चतुर्थी, परंपराओं और पर्यावरण-अनुकूल का संगम

*रियल लाइफ हीरो सोनू सूद ने घर पर 5 दिवसीय गणेश चतुर्थी के दौरान निभाई पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार परंपराएँ

*रियल लाइफ हीरो सोनू सूद के घर पर गणेश चतुर्थी, पर्यावरण-अनुकूल स्पर्श के साथ भक्ति का प्रदर्शन

सोनू सूद के लिए गणेश चतुर्थी हमेशा से ही भक्ति, एकजुटता और जागरूक उत्सव का समय रहा है। हर साल की तरह, इस बार भी अभिनेता-समाजसेवी सोनू सूद ने पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ अपने घर भगवान गणेश का स्वागत करते हैं और हर अनुष्ठान को व्यक्तिगत स्पर्श के साथ निभाते हैं। अपनी परंपरा के अनुसार, इस वर्ष भी उन्होंने गणेश जी की मूर्ति घर ले आएं हैं और अपने परिवार और करीबी दोस्तों के साथ पर्यावरण-अनुकूल तरीके से पाँच दिनों तक त्योहार मना रहे हैं।

मूर्ति के स्वागत के साथ ही, सूद के घर में आस्था और उत्सव का वातावरण बन गया। उनके निवास पर आरती, भोग और दैनिक पूजा की गूंज सुनाई दी, और उनकी संवेदनशील पहल ने इस उत्सव को और भी अर्थपूर्ण बना दिया। उत्सव की शुरुआत में ही उन्होंने मीडिया और पपराज़ी को भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए आमंत्रित किया और उनके साथ प्रसाद बाँटा, यह एक ऐसा भाव था जो उनकी समावेशी सोच को दर्शाता है।

जो बात सबसे खास रही, वह थी सोनू सूद की पर्यावरण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता। हर साल वे एक इको-फ्रेंडली गणेश मूर्ति का चयन करते हैं ताकि उनका उत्सव पर्यावरण के प्रति जागरूक बना रहे। इसके साथ ही वे हर साल घर पर ही एक विशेष रूप से बनाए गए तालाब में विसर्जन करते हैं। यह सतत प्रयास न केवल पूजा की पवित्रता को बनाए रखता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भक्ति और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी साथ-साथ निभाई जा सकती हैं। पांच दिनों तक सोनू सूद पूरी श्रद्धा के साथ अनुष्ठानों में लीन रहे और साथ ही परिवार के साथ बिताए गए मधुर क्षणों, हर्षोल्लास और शांत प्रार्थना का भी आनंद लिया। उनका गणेशोत्सव केवल परंपराओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक आध्यात्मिक, व्यक्तिगत और सामाजिक रूप से जागरूक संबंध भी स्थापित किया।

भक्ति, पारिवारिक स्नेह और पर्यावरण-सचेत प्रथाओं के मिश्रण में, सोनू सूद की गणेश चतुर्थी प्रेरणा देती रहती है। बप्पा का सम्मान करने का उनका तरीका न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि हमारे आस-पास की दुनिया के प्रति एक ज़िम्मेदारी को भी दर्शाता है।

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