- अरविंद केजरीवाल देश में इमानदारी का दूसरा नाम हैं, इमानदारी के बल पर वो दिल्ली के सीएम बने और आज दो राज्यों मे सरकार है, यही भाजपा को दर्द है- सौरभ भारद्वाज
- भाजपा हर हथकंडे अपनाकर अरविंद केजरीवाल से उनकी इमानदारी को छिनना चाहती है, इसीलिए बार-बार ये समन भेजे जा रहे हैं- सौरभ भारद्वाज
- भाजपा यह साबित करना चाहती है कि अरविंद केजरीवाल इमानदार नहीं हैं या फिर वो झुक जाएं और भाजपा के साथ आ जाएं- सौरभ भारद्वाज
- केंद्र की एजेंसियां सैकड़ों जगहों पर छापे मार चुकी हैं, दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं, लेकिन आजतक एक भी सबूत सामने नहीं रख पाई हैं- सौरभ भारद्वाज
- ये एजेंसियां किस कानून के अंदर काम कर रही हैं कि जो भाजपा में शामिल हो जाता है, उस पर चल रही जांच ठंडे बस्ते में डाल देती हैं- सौरभ भारद्वाज
- अब यह मामला सिर्फ अरविंद केजरीवाल का नहीं है, बल्कि अब यह देश के प्रजातंत्र को बचाने का है- सौरभ भारद्वाज
आम आदमी पार्टी ने सीएम अरविंद केजरीवाल को ईडी द्वारा बार-बार भेजे जा रहे समन को लेकर भाजपा पर हमला बोला। ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने साफ किया कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की गैर हाजिरी का फायदा उठाने के लिए उनको गिरफ्तार करने की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि आज अरविंद केजरीवाल देश में इमानदारी का दूसरा नाम हैं। अरविंद केजरीवाल अपनी इमानदारी के बल पर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और आज दो राज्यों में उनकी सरकार है। भाजपा के पेट में यही दर्द है कि अरविंद केजरीवाल को ईमानदार क्यों माना जाता है? भाजपा किसी भी तरह यह साबित करना चाहती है कि अरविंद केजरीवाल इमानदार नहीं हैं या फिर वो झुक जाएं और भाजपा के साथ आ जाएं। चूंकि केंद्र सरकार की एजेंसियां इस मामले में सैकड़ों जगह छापे मार चुकी हैं और दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं, लेकिन आजतक एक भी सबूत सामने नहीं रख पाई हैं। इसलिए अब यह मामला सिर्फ अरविंद केजरीवाल का नहीं है, बल्कि यह मामला देश के प्रजातंत्र को बचाने का है।
गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस को संबोधित करते हुए ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज पूरे देश में चर्चा है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को केंद्र सरकार गिरफ्तार करना चाहती है। पिछले दो सालों से हम लोग सुन रहे हैं कि दिल्ली में शारब घोटाला हो गया। बीजेपी रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहती है कि करोड़ों रुपए का घोटाला हो गया। लेकिन आजतक एक भी रुपए की बरामदगी नहीं हुई। 500 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे जा चुके हैं, दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किए हुए सालभर से ज्यादा हो गए। हजारों लोगों की पूछताछ हो गई। लीकर डिस्ट्रीब्यूटर से लेकर आदमी पार्टी के पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगाने वालों तक को बुलाकर सीबीआई और ईडी ने गिरफ्तार किया, टॉर्चर किया और पूछताछ की। दबाव देकर उनकी गवाही ली, लेकिन आजतक कोई भी सबूत केंद्र सरकार की एजेंसियां सामने नहीं रख पाईं हैं।
उन्हांेने कहा कि अब यह बात सामने है कि अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करने की साजिश केंद्र ने बनाई है, क्योंकि लोकसभा का चुनाव नजदीक आ रहा है। भाजपा की मंसा है कि अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लो, ताकि लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की गैर हाजिरी का भाजपा को उसका फायदा मिल जाए। केंद्र की बीजेपी सरकार की सिर्फ इतनी ही रणनीति है। उन्होंने कहा कि जब सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को समन भेजा था तो वो उसके सामने गए और जो सवाल उन्होंने पूछे, उसके जवाब भी दिए। लेकिन अब ईडी का समन बार-बार आ रहा है। हमारे वकील हमें बता रहे हैं कि ईडी का यह समन गैर कानूनी है। ईडी को जो जानकारी चाहिए, वो लें। लेकिन ईडी को जानकारियां जुटाते हुए डेढ़ से दो साल हो गए, सारे सबूत और दस्तावेज भी उसके पास है। इसके बाद भी कोर्ट में ईडी का केस चल नहीं पा रहा है और अभी तक ट्रायल भी शुरू नहीं कर पा रहे हैं। बस चार्जशीट पर चार्जशीट दायर कर रहे हैं।
‘‘आप’’ नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी के लोग कहते हैं कि कानून अपना काम कर रहा है, एजेंसियां आपना काम कर रही हैं। मैं भाजपा से जानना चाहता हूं कि ये एजेंसियां किस कानून के अंदर काम करती हैं कि बीजेपी में शामिल होने वाले तमाम नेताओं के ऊपर ये एंजेसियां अपनी जांच या तो बंद कर देती हैं या ठंडे बस्ते में डाल देती हैं। इसके एक नहीं, दर्जनों उदाहरण हैं। हिमंता बिस्वा सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद आज मुख्यमंत्री हैं। जबकि इनके खिलाफ भी बीजेपी ने भ्रष्टाचार का अभियान चलाया था। इनके साथ भी पूछताछ हुई और एजंसियों की तरफ से दबाव डाला गया। इनके अलावा मुकुल रॉय, शुभेंदु अधिकारी, नारायण राणे, अजित पवार, छगन भुजबल, प्रफुल पटेल और प्रेमा खांडू समेत दर्जनों नेता और भी हैं, जिनके ऊपर एजेंसियों की तलवार लटकी हुई थी। ईडी-सीबीआई इन्हें बुला रही थीं, चार्जशीट दाखिल होने वाली थी और बीजेपी भी इन्हें भ्रष्टाचारी कह रही थी, लेकिन अचानक एक दिन ये लोग बीजेपी में आ जाते हैं और सारा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अगर एजेंसियां अपना काम कर रही थीं तो इनके बीजेपी में आने के बाद ये अपना काम कैसे भूल गईं। यह तो पूरे देश को साफ-साफ दिखाई दे रहा है।
‘‘आप’’ नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज अगर मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, संजय सिंह और विजय नायर बीजेपी में चले जाएं तो तुरंत यह एजेंसियां ठंडी हो जाएंगी, इन्हें बुलाना बंद कर देंगी और इन्हें भूल जाएंगी। मैं तो हैरान हूं कि बीजेपी के नेता प्रेस के सामने यह कैसे कह पाते हैं कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। ये एजेंसियां ऐसे कैसे काम कर सकती हैं कि बीजेपी में जाते ही नेताओं के ऊपर लगे केस बंद हो जाते हैं। भाजपा जरा यह बात हमें भी समझाए।
उन्होंने कहा कि ये लोग आज इसलिए अरविंद केजरीवाल के पीछे पड़े हुए हैं, क्योंकि अरविंद केजरीवाल देश के अंदर ईमानदारी का दूसरा नाम हैं। अरविंद केजरीवाल वो सख्स हैं, जिन्होंने इनकम टैक्स कमिश्नर की नौकरी और आराम की जिंदगी ठुकराई। वो आईआईटी से पढ़े थे, अच्छी खासी प्राइवेट नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने वो नौकरी ठुकरा दी। अरविंद केजरीवाल ने अपनी ईमानदारी के बल पर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और आज दो राज्यों में उनकी सरकार है। बीजेपी के पेट में यह दर्द है कि अरविंद केजरीवाल को ईमानदार क्यों माना जाता है? उनसे उनकी ईमानदारी को कैसे छीन लिया जाए। इसलिए पूरे दिन टीवी चैनलों में सिर्फ समन और नोटिस चलवाया जाता है, ताकि किसी तरह यह साबित किया जाए कि अरविंद केजरीवाल ईमानदार नहीं हैं या फिर अरविंद केजरीवाल झुक जाएं और बीजेपी के साथ आ जाएं।
‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज सारी एजेंसियां अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ी हुई हैं, यह देश के लिए और प्रजातंत्र के लिए बुरी खबर है, क्योंकि अगर विपक्ष के जो नेता जनता के मुद्दों को उठाते हैं और सरकार से सवाल पूछते हैं, उनको इसी तरह साल-साल भर जेल में सड़ाया जाएगा तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। फिर चुनाव कराने का क्या फायदा है? फिर तो बीजेपी अकेले चुनाव लड़ा करेगी और भाजपा वाले ही केवल अपना भाषण़ दिया करेंगे। भाजपा से कोई सवाल नहीं पूछेगा और बिना विपक्ष के भाजपा अकेले ही जीतती जाएगी। इसलिए अब यह मामला सिर्फ अरविंद केजरीवाल का नहीं है, बल्कि देश में लोकतंत्र को बचाने का है।








