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अगर आप स्वास्थ्य रहना चाहते हैं, डायबिटीज़ या शुगर से बचना चाहते हैं तो बस आपको दर्ज़ी वालीं सिलाई मशीन जो कि पैरों से चलती है, आपको ये मशीन चलानी है। फिर भले ही आप सुबह शाम पैदल चलें या ना चले इसकी कोई ज़रूरत नहीं होगी। आप सोच रहे होंगे मैं आपको दर्ज़ी वाली मशीन चलाने की सलाह क्यों दे रहा हूँ? दर्ज़ी की मशीन का शुगर या डायबिटीज़ से क्या लेना देना? ये बात हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि हिमस अस्पताल के को-फ़ाउंडर एवं डॉक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी जो कि डॉक्टर बीआरसी के नाम से भी प्रसिद्ध है। डॉक्टर बीआरसी ने गत दिनों अपनी एक किताब जिसका नाम लैट यौर सैकेंड हार्ट का विमोचन करते हुए दावा किया । जिनका दर्जी का पेशा सेहत के लिहाज से सबसे अच्छा है । इस पर उन्होने अध्ययन किया और किताब लिखी
डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी के एक अनूठे नए अध्ययन से एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि दिन भर बैठे रहने वाला काम करने के बावजूद दर्जी लोग हमारे बीच सबसे स्वस्थ समूह के रूप में सामने आए हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर, डॉ. बिस्वरूप ने अपनी नई किताब, लैट यौर सेकेंड हार्ट हैल्प के माध्यम से एक चौंकाने वाले अध्ययन का अनावरण किया। यह स्टडी एक किताब के रूप में सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान जारी की गई । डॉ. बिस्वरूप ने अपनी इस खोज को लेकर इतने आश्वस्त हैं । उन्होंने एक चेलेंज की घोषणा कर दी । यदि कोई ऐसे दर्जी को ढूंढ लाता है । जिसे डायबिटीज हो, वे 1 लाख रुपए का इनाम जीत सकता है। यह अभूतपूर्व रहस्योद्घाटन सिलाई मशीन चलाते समय पैरों की गति के बारे में उनकी गहरी समझ से उपजा है। पिंडली की मांसपेशियों को अक्सर ‘दूसरा हृदय’ भी कहा जाता है और सिलाई मशीन का लैग पैडल चलाने से इनका पम्प सक्रिय हो जाता है। उन्होंने अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण और आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित एक वासो-स्टिम्यूलेशन थेरेपी (वीएसटी) विकसित की है। टोटल ख़बरें के वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना ने डॉ. बिस्वरूप बात की सुनिए उन्होंने क्या कहा ।

डॉ. बीआरसी ने कहा कि लैट द सेकेंड हार्ट एच.ई.एल.पी. (हैल्प) किताब पढ़कर कोई व्यक्ति दूसरों की मदद कर सकता है अथवा एच.ई.एल.पी. प्रेक्टिसनर बन सकता है। इसके लिए दो माह के ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेना होता है, जिसमें दयानंद आयुर्वेदिक कॉलेज, जालंधर में सात दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। वीएसटी पहले से ही हिम्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का एक हिस्सा है।

आपको बता दें कि डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी, इंजीनियरिंग में स्नातक और मधुमेह में स्नातकोत्तर और मधुमेह व क्रोनिक किडनी रोग में मानद पीएचडी की योग्यता प्राप्त कर चुके हैं। 30 किताबों के लेखक होने के अलावा, वह हिम्स अस्पताल समूह की देखरेख भी करते हैं । टोटल ख़बरें दिल्ली से राजेश खन्ना की विशेष रिपोर्ट ।

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