दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू अध्ययन केंद्र और राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के संयुक्त प्रयासो से 22 फरवरी को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में एक शैक्षिक दौरा और कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के संयोजक एवं निदेशक डॉ. अनिर्बान दास और हिंदू अध्ययन केन्द्र की सह निदेशिका डॉ. प्रेरणा मल्होत्रा की उपस्थिति रही ।
अनिर्बान दास द्वारा अपने वक्तव्य में कहा गया कि पांडुलिपि न केवल शिक्षा का साधन है, बल्कि यह छात्रों के लिए विचारशीलता, शोध और सार्थक संचार का माध्यम भी है। इसके माध्यम से छात्र अपने विचारों को सुसंगत रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं तथा भावी पीढ़ी को पांडुलिपियों के बारे में भी अवगत करा सकते है तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से ‘ एक भारत श्रेष्ठ भारत ‘ बनाने में सहायक हो सकते है ।
फिर हिंदू अध्ययन केंद्र की संयुक्त निदेशक डॉ. प्रेरणा मल्होत्रा ने भारतीय लोगों के पास मौजूद अपार ज्ञान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारत हमेशा से ज्ञान का भंडार रहा है। उन्होंने हिंदू धर्म और भारत को संपूर्णता में समझने के लिए पांडुलिपियों के संरक्षण और समझ के लिए काम करने की समय की आवश्यकता के बारे में भी बात की।
गौरतलब है कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान का केंद्र रहा है तथा अपने ज्ञान के माध्यम से पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है इसी कड़ी में हिंदू अध्ययन केंद्र का प्रयास भी सराहनीय है। हिंदू अध्ययन केंद्र ऐसे सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपना नेतृत्व करता है जो विद्यार्थियों को न केवल शिक्षित बनाता हैं, बल्कि उन्हें जीवन में सकारात्मक की ओर अग्रसर करता है। बता दे कि पिछले ही वर्ष (2023) में प्रारम्भ हुआ दिल्ली विश्वविद्यालय का यह हिन्दू अध्ययन केन्द्र आए दिन चर्चा का विषय बना रहता है और अपने अथक प्रयासो से सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता रहता है ।



