उत्तराखंड के सिल्क्यारा में पिछले साल हुई सुरंग दुर्घटना पर लिखी किताब ‘वो 17 दिन’ पर शुक्रवार को दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में परिचर्चा का आयोजन किया गया। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आईसीपीआरडी) के प्रमुख कुमार राजीव रंजन सिंह की पुस्तक ‘वो 17 दिन’, जो सिल्कयारा सुरंग दुर्घटना में फंसे 41 श्रमिकों की दुर्दशा पर प्रकाश डालती है, कई मायनों में असाधारण है। ऐसी घटनाओं का दस्तावेजीकरण करने का मतलब निराशा के बीच आशा का बीज बोना है। किताबों की दुनिया में, आम तौर पर औसत पाठक के लिए तकनीकी सीखने वाली बहुत कम किताबें उपलब्ध हैं। कुमार राजीव रंजन सिंह ने इस कमी को दूर किया है और सराहनीय कार्य किया है। यह पुस्तक व्यापक शोध के बाद तैयार की गई है। इसमें सिल्कयारा सुरंग दुर्घटना के सभी पहलुओं के साथ पूरा न्याय का दावा किया गया है। तथ्यों की प्रामाणिकता को बनाए रखते हुए किसी ऐतिहासिक त्रासदी के बारे में रोचक तरीके से लिखना किसी भी लेखक के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को कुमार राजीव रंजन सिंह ने अपनी पुस्तक “वो 17 दिन” में पूरा किया है। चर्चा में पुस्तक के लेखक कुमार राजीव रंजन ने भाग लिया, जो इंडिया सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आईसीपीआरडी) के प्रमुख भी हैं; ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ. शिवशंकर अवस्थी; डॉ. संदीप कुमार शर्मा, वरिष्ठ लेखक, आलोचक और ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य; संजय सिंह, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और रक्षा विशेषज्ञ; अजय सेतिया, वरिष्ठ पत्रकार और उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष; डायमंड बुक्स के अध्यक्ष डॉ. एनके वर्मा और पुस्तक के संपादक अमित कुमार सहित साहित्य जगत से जुड़े अन्य लोग शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन नेवा सिंह द्वारा किया गया। इस मौके पर आईसीपीआरडी की राष्ट्रीय सलाहकार बरखा सिंह, बीबीए से राकेश सेंगर और आईसीपीआरएफ से सलाहकार ग्रुप कैप्टन विश्वजीत कुमार (सेवानिवृत्त) समेत अन्य कई गण्यमान्य लोग मौजूद रहे। कुमार राजीव रंजन सिंह ने कहा, “इस किताब को लिखना मेरे लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती थी, मैं इसे समाज के अंतिम छोर के पाठको तक ले जाना मुख्य उद्देश्य हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि जिन्होंने इस घटना पर बारीकी से नजर रखते हुए इसे व्यक्तिगत तौर पर रूचि लेकर टनल में फंसे मजदूरों को सकुशल उन्हे अपनो तक पहुंचाया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यस्त होने के बावजूद उन्होंने उस समय पल पल की घटना पर नजर रखे हुए थे। इसी तरह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हादसे की जगह पर मौजूद रहे थे। मजदूरों की हौसला अफजाई के लिए उन्होंने उनसे बातचीत करी थी। श्री सिंह ने कहा कि पिछले दिनों धामी जी ने इस पुस्तक के रिलीज पर अपनी भावना को व्यक्त करते हुए कहा था कि इस विषय पर फिल्म बननी चाहिए जिससे कि दुनिया के लोगों को इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में विस्तार से पता चल सके।
बताया जाता है कि कुमार राजीव रंजन सिंह की पुस्तक ‘वो 17 डेज़’, जो सिल्कयार सुरंग दुर्घटना में फंसे 41 श्रमिकों की दुर्दशा पर प्रकाश डालती है, ऐसी घटनाओं का दस्तावेजीकरण करने का मतलब निराशा के बीच आशा। ब्यूरो रिपोर्ट टोटल ख़बरें दिल्ली

