दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में भूमिगत जल का स्तर नीचे पहुॅचने पर भाजपा सरकार को राजधानी में जलाश्यों को बढ़ाने और भूमिगत जल संग्रहण पर योजनबद्ध तरीके से काम करना होगा। दिल्ली में दस्तावेजों में 1367 जल निकाय है जबकि वर्ष 2021 के राजस्व रिकार्ड अनुसार 1045 जल निकायों की पहचान की गई थी और जीएडीएल द्वारा अन्य 322 जल निकायों की पहचान हुई। जबकि जमीनी हकीकत में देखा जाए तो 1045 में 631 ही अस्तित्व में है और 43 जल निकाय ही पानी का मुख्य श्रोत बने हुए हैं और 237 जल निकाय ही उपयोग करने योग्य बचे हैं।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि सरकार जल निकायों को संरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए क्योंकि लोगों ने जल निकायों पर अतिक्रमण कर लिया है और कहीं सरकारी एजेंसियों ने निर्माण कर लिए हैं व कई जगहों पर कचरा डालकर जल निकायों को नष्ट कर दिया है। इनके सरंक्षण का काम सिर्फ कागजों में है। आम लोग, औद्योगिक इंकाईयां और सरकारी एजेंसियां कई जल निकायों में कचरा डालकर उनके पानी को प्रदूषित कर रहे है जिसे रोकने के लिए वेटलैंड नियम 2017 के तहत अधिसूचित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को भूमिगत जल संग्रहण और जल निकायों को पुनः जीवित करने और जल निकायों में बढ़ोत्तरी करके दिल्ली की जनता के लिए जलापूर्ति का काम करें।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली कांग्रेस पहले से ही मांग कर रही जल रिसाव और चोरी से पानी की 58.28 प्रतिशत की बर्बादी के कारण दिल्ली वालों को जल संकट का सामना करना पड़ता है। जल रिसाव से दिल्ली जल बोर्ड को 17575 करोड़ राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि जल मंत्री प्रवेश वर्मा का फैंसला कि जल वितरण स्थलों की सूची बनाकर उचित दस्तावेजीकरण किया जाए और जलापूर्ति को मजबूत बनाने के लिए टैंकरों की ट्रिप संख्या बढ़ाकर 16 प्रतिदिन किया जाए। आम आदमी पार्टी की तरह टैंकर माफिया को बढ़ावा देने वाला कदम है। राजधानी में 1290 एमजीडी पानी की मांग है लेकिन 995 एमजीडी पानी का उत्पादन होता है। भाजपा सरकार जमीनी स्तर पर सोचे और 58 प्रतिशत जल रिसाव और चोरी में बर्बादी को रोकने पर काम करे क्योंकि इससे दिल्ली में अत्यधिक जलापूर्ति हो सकेगी।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि डबल इंजन की दिल्ली सरकार के जल मंत्री अंडरग्राउंड जलाशयों यूजीआर से जल प्रवाह की निगरानी पर जोर दे रहे है और पानी की बर्बादी और राजस्व के नुकसान के आंकलन करने की बात कह रहे है। मैं पूछना चाहता हूॅ जब दिल्ली में भाजपा की सरकार है और हरियाणा में भी। दिल्ली सरकार राजधानी में पर्याप्त जलापूर्ति के लिए हरियाणा सरकार से पानी छोड़ने पर सहममि क्यों नही बना रही। दोनो राज्यों में मतभेद पहले तो सही दिखाई देता था परंतु आज के समय में दिल्ली हरियाणा दोनों में भाजपा की सरकारें है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार को पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार की कार्यशैली से अलग हटकर काम करने की जरुरत है। दिल्ली अपनी कच्ची जल आपूर्ति के लिए हरियाणा सहित अपने पड़ौसी राज्यों पर अधिक निर्भर है, लगभग 40 प्रतिशत जल हरियाणा से यमुना के माध्यम से आता है। सरकार को दिल्ली वालों को आगामी गर्मियों में जल संकट से बचाने के लिए पूर्वी, उत्तर पूर्वी और दक्षिण दिल्ली में पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में भूमिगत जलाशयों में आपूर्ति कम होने के कारण यहां 40 प्रतिशत जल की कमी का सामना करना पड़ रहा है।



