डीएसजे द्वारा आयोजित किया गया स्वामी विवेकानंद स्मृति राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं विशेष व्याख्यान कार्यक्रम

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*देश की व्यवस्थाओं को समय अनुसार अनुकूलन के लिए निरंतर होती है सुधार की प्रक्रिया: सुनील बंसल

*2047 तक विकसित राष्ट्र के लिए जरूरी है चुनाव सुधार, समय और संसाधनों की होगी बचत: प्रो. योगेश सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म द्वारा स्वामी विवेकानंद स्मृति राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं “एक राष्ट्र, एक चुनाव” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन बुधवार, 02 अप्रैल को किया गया। डीयू के वाइस रीगल लॉज स्थित कन्वेंशन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की।

मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए सुनील बंसल ने कहा कि सुधार की प्रक्रिया निरंतर होती है और देश की व्यवस्थाओं को समय अनुसार अनुकूलन के लिए सुधार होते रहते हैं। उसी प्रकार “एक राष्ट्र, एक चुनाव” भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है और यह भारत के लोकतंत्र के लिए हितकारी साबित होगा। साथ ही इस चुनाव प्रक्रिया से देश को नेतृत्व हेतु नए चेहरे मिलेंगे। उन्होंने बार बार चुनाव कराने की प्रक्रिया को देश के विकास के लिए स्पीड ब्रेकर बताया। उन्होंने छात्रों को वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया और उनकी तार्किक एवं विश्लेषणात्मक सोच की प्रशंसा की।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव अगर एक साथ हों तो समय और संसाधन बचेंगे तथा ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में मददगार साबित होगा। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को लोकतंत्र की जड़ों को और अधिक मजबूत करने वाला बताया। कुलपति ने कहा कि 1947 में देश के स्वतंत्र होने से लेकर अब तक करीब 400 चुनाव हो चुके हैं। यानी प्रत्येक वर्ष 5 चुनाव भारत में होते हैं। क्या यह देश के लिए ठीक है? चुनाव के कारण विकास एवं शासन से ध्यान हटता है और ये प्रक्रिया प्रभावित होती हैं।

इस राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में देशभर से आए 70 से अधिक प्रतिभागियों में आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के आदित्य अग्रहरि और महक मौर्या ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया। प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹11,000 की राशि एवं चल वैजयंती प्रदान की गई। हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के वैभव मल्लावत को सर्वश्रेष्ठ वक्ता घोषित किया गया। कार्यक्रम की आयोजक प्रोफ़ेसर भारती गोरे थीं एवं संयोजक अंजुम शर्मा तथा छात्र संयोजक यशवर्धन सिंह थे।

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