*मोदी सरकार अपनी हार को पचा नहीं पा रही, इसलिए लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के महान प्रतीकों को हटा रही
कांग्रेस ने संसद परिसर में महात्मा गांधी जी, छत्रपति शिवाजी महाराज जी और बाबा साहेब अंबेडकर जी की मूर्तियों को मौजूदा स्थानों से हटाए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, मोदी सरकार लोकसभा चुनाव में मिली अपनी हार को पचा नहीं पा रही, इसलिए नित नए शगूफ़े ढूंढकर किसी तरीक़े से संविधान और लोकतंत्र के स्तंभों को तोड़ने में लगी है।
यह बातें मीडिया एवं प्रचार विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहीं।
पवन खेड़ा ने कहा, चुनाव के बीच नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘गांधी’ फ़िल्म आने से पहले महात्मा गांधी को कोई नहीं जानता था। जब जनता ने चुनाव नतीजों के ज़रिए इसका जवाब दिया तो खीज निकालने के लिए उन्होंने गांधी जी की प्रतिमा हटा दी।
उन्होंने कहा, कांग्रेस ने चुनावों में संविधान को बचाने की मुहिम छेड़ी तो खीज निकलने के लिए अंबेडकर जी की मूर्ति कहीं पीछे धकेल दी। फिर जब महाराष्ट्र की जनता ने चुनावों में करारा जवाब दिया तो बदला लेने के लिए शिवाजी महाराज जी की मूर्ति भी हटा दी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चूंकि विपक्षी सांसद इन प्रतिमाओं के सामने सरकार की गलत नीतियों के प्रति विरोध प्रदर्शन करते थे, इसलिए सरकार ने इन्हें ही हटाने का फैसला कर दिया।
खेड़ा ने कहा कि संसद के प्रांगण में उसके गौरवशाली इतिहास को संजोने के लिए दो समितियां हैं। क्या इन दोनों समितियों से मूर्तियों को हटाने के बारे में कोई राय ली गई थी। हैरानी की बात है कि इनमें से एक समिति की आखिरी बैठक 18 दिसंबर 2018 को हुई थी। जब कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ये मुद्दा उठाया तो लोकसभा सचिवालय की तरफ से मनगढ़ंत बयान जारी किया गया कि राजनीतिक दलों से बात हुई थी, जबकि किसी राजनीतिक दल से कोई बात नहीं हुई। ऐसे में मोदी सरकार देश की जनता को स्पष्टीकरण दे कि महान विभूतियों की मूर्तियों को हटाने के पीछे मंशा क्या है।
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एनडीए शब्द याद करने के लिए भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, मोदी ने पिछले दस सालों में एनडीए शब्द का इतनी बार जिक्र नहीं किया, जितना उन्होंने आज अपने एक घंटे के भाषण में किया। नरेंद्र मोदी पिछले दस साल में सिर्फ ‘मोदी की गारंटी’ कहते थे। अब वे एनडीए की गारंटी कह रहे हैं। एनडीए का फुलफॉर्म अब नायडू/नीतीश डिपेंडेंट अलायंस हो गया है।



