दिल्ली में केजरीवाल की शिक्षा क्रांति जारी, झिलमिल कॉलोनी में विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस नए एकेडमिक ब्लॉक का सीएम आतिशी ने किया उद्घाटन

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  • दिल्ली में एक और सरकारी स्कूल की नई बिल्डिंग का आज उद्घाटन हुआ, यहां शानदार क्लासरूम, 6 हाई-टेक लैब्स, एमपी हॉल, लिफ्ट समेत कई आधुनिक सुविधाएं हैं- केजरीवाल
  • सरकारी स्कूलों का रिजल्ट शानदार आ रहा, बच्चे जेईई-नीट पास कर रहे, फ्रांस जाकर फ्रेंच सीख रहे हैं और प्राइवेट स्कूलों से 4 लाख बच्चे अब तक हमारे स्कूलों में आए हैं – सीएम आतिशी
  • स्कूलों के साथ यूनिवर्सिटीज में भी आई “आप” की शिक्षा क्रांति 2014 में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में केवल 83,600 सीटें होती थीं, अब 1,55,000 सीटें हैं- सीएम आतिशी
  • 10 साल पहले सरकारी स्कूल टीन टप्पर में चलते थे, टेबल कुर्सी, पीने का पानी, टॉयलेट तक नहीं थे, लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान तो बच्चों के लिए सपने जैसा था – सीएम आतिशी

-“आप” सरकार ने दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप समेत कई नई यूनिवर्सिटी शुरू की और सीटें बढ़ाकर छात्रों के लिए अच्छी पढ़ाई का प्रबंध किया- सीएम आतिशी

  • पहले इस स्कूल में पेरेंट्स अपने बच्चों को भेजना नहीं चाहते थे, लेकिन अब यहां बहुत सारे बच्चे एडमिशन लेने से वंचित रह जाते हैं – राम निवास गोयल

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की शिक्षा क्रांति जारी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को झिलमिल कॉलोनी के जीजीएसएसएस स्कूल में सीएम आतिशी ने विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस नवनिर्मित एकेडमिक ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसके उद्घाटन पर “आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर सभी बच्चों और उनके अभिभावकों को बधाई दी और कहा कि दिल्ली की शिक्षा क्रांति जारी है। दिल्ली में एक और सरकारी स्कूल की नई बिल्डिंग का आज उद्घाटन हुआ। इस नई बिल्डिंग में शानदार क्लासरूम, 6 हाई-टेक लैब्स, एमपी हॉल, लिफ्ट समेत कई आधुनिक सुविधाएं हैं। वहीं, सीएम आतिशी ने कहा कि यह अरविंद केजरीवाल की शिक्षा क्रांति का ही कमाल है कि 2014 में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में केवल 83,600 सीटें होती थीं, जो अब 1,55,000 सीटें है। “आप” सरकार ने दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप समेत कई नई यूनिवर्सिटी शुरू की और सीटें बढ़ाकर छात्रों के लिए अच्छी पढ़ाई का प्रबंध किया है।

दिल्ली के झिलमिल कॉलोनी में जीजीएसएसएस स्कूल में नवनिर्मित विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस एकेडमिक ब्लॉक का उद्घाटन करने पहुंची सीएम आतिशी का स्कूल में टीका चंदन लगाकर स्वागत किया गया और एनसीसी कैडेट्स ने गर्द ऑफ ऑनर दिया। इसके उपरांत सीएम ने बिजनेस ब्लास्टर्स के बच्चों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स को देखा। फिर सीएम ने नाम पट्टिका का अनावरण कर रिबन काटा और क्लासरूम लैब का निरीक्षण किया। इस दौरान दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल भी मौजूद रहे।

पहले बच्चों के मन में टीस होती थी कि काश मैं भी प्राइवेट स्कूल में जाता, लेकिन अब नहीं है – सीएम आतिशी

दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि एक नई बिल्डिंग का क्या मतलब है यह तब पता चलता है जब आप स्कूल के अंदर घुसते हैं और इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की मुस्कान देखते हैं, तब पता चलता है कि इस 46 कमरे के नए एकेडमिक ब्लॉक का कितना महत्व है। मैंने जब स्कूल में प्रवेश किया तो इन बच्चों के चेहरे पर जितनी खुशी और आत्मविश्वास था, उसने बयां कर दिया कि बच्चों के लिए झिलमिल के स्कूल में यह नई बिल्डिंग कितनी जरूरी थी। आज हमने 46 कमरों की इस नई बिल्डिंग का उद्धाटन किया है। इस बिल्डिंग में क्लासरूम के अलावा 6 शानदार लैब भी हैं। मैं खुद बायो और कैमिस्ट्री की दो लैबों में गईं। एक समय ऐसा था जब दिल्ली के सरकारी स्कूल टीन टप्पर में चलते थे। इन स्कूलों को टेंट वाला स्कूल कहा जाता था। उन स्कूलों में बारिश के दिनों में बच्चे पढ़ने नहीं जा सकते थे। क्योंकि बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था। स्कूल के ग्राउंड में पानी भर जाता था। दीवारों की सीलन से बिजली के स्विच करंट मारते थे। दिल्ली के सरकारी स्कूलों का ऐसा हाल था। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए बैठने के लिए ना टेबल-कुर्सी थी, ना पीने के लिए पानी होता था और ना ही साफ टॉयलेट होते थे। दस साल पहले सरकारी स्कूल ऐसे होते थे। लैब, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स ग्राउंड यह सब सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सपना हुआ करता था। वो प्राइवेट स्कूल में जाने वालों बच्चों को दर्द की निगाह से देखते थे। उनके मन में एक टीस होती थी कि काश मेरे माता-पिता के पास भी पैसे होतेे तो मैं भी एक शानदार अच्छी बिल्डिंग वाले प्राइवेट स्कूल में जाता, जहां बच्चों की अच्छी यूनिफॉर्म, लैब, लाइब्रेरी और खेलने के लिए ग्राउंड होगा, लेकिन अब यह टीस नहीं है।

अच्छे-अच्छे प्राइवेट स्कूलों में भी एक साइंस लैब होती है, लेकिन झिलमिल के स्कूल में कैमिस्ट्री, बायो, फिजिक्स की अलग लैब है – सीएम आतिशी

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि पिछले दस साल में दिल्ली सरकार ने अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शन में जो शिक्षा क्रांति दिल्ली के स्कूलों में लेकर आई है, आज सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के मन में टीस नहीं है। उनके चेहरे पर खुशी है। मैं खुद दिल्ली के एक नामी प्राइवेट स्कूल में पढ़ी थी। लेकिन इतनी सारी लैब इक्विपमेंट हमारे प्राइवेट स्कूलों में भी नहीं होती थी, जो आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मिल रही है। अच्छे-अच्छे प्राइवेट स्कूलों में भी एक साइंस लैब होती है। आज झिलमिल के स्कूल में कैमिस्ट्री, बायो, फिजिक्स लैब भी है। बच्चों के हर सब्जेक्ट के लिए एक अलग लैब है। मैं यह भी बता दूं कि सिर्फ बायो लैब में एक या दो तरह के नहीं बल्कि हमारे बच्चों के लिए तीन अलग-अलग तरह के माइक्रोस्कोप हैं ताकि वो बायोलॉजी की पढ़ाई शानदार तरीके से कर सकें और पढ़ाई करके आगे इंजीनियर और डॉक्टर बनने की अपनी तैयारी पूरी कर सकें।

सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को लगता है कि मैं प्राइवेट स्कूल के बच्चों को पीछे छोड़ सकता हूं- सीएम आतिशी

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि इस बिल्डिंग के बाहर एक शानदार हॉकी ग्राउंड है। जहां हम बैठे हुए हैं, एक फाइव स्टार मल्टीपरपज हॉल है। इतनी शानदार सुविधाएं दिल्ली के किसी प्राइवेट स्कूल में भी नहीं होंगी, जो झिलमिल के जीजीएसएसएस स्कूल में हमारे बच्चों को मिल रही हैं। इसका फायदा झिलमिल, ज्वालानगर, विश्वास नगर और आसपास के इलाके के बच्चों को तो होगा। लेकिन मुझे लगता है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा हमारे बच्चों के आत्मविश्वास में होगा। आज जो बच्चा झिलमिल के स्कूल में पढ़ने आ रहा है, सरकारी स्कूल में पढ़ने आ रहा है, उसे लगता है कि मैं प्राइवेट स्कूल के बच्चों को पीछे छोड़ सकता हूं और उनसे आगे जा सकता है। उनसे बेहतर रिजल्ट लेकर आ सकता हूं। उनसे अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले सकता हूं। यह दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आया है।

अरविंद केजरीवाल की शिक्षा क्रांति का नतीजा है कि पिछले 8 साल से लगातार सरकारी स्कूलों के नतीजे प्राइवेट स्कूलों से बेहतर आ रहे हैं – सीएम आतिशी

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि जो दस साल की शिक्षा क्रांति अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार लेकर आई, उसका नतीजा हम देख रहे हैं कि आज दिल्ली के सरकारी स्कूल के बारहवीं के नतीजे लगातार आठ सालों से प्राइवेट स्कूलों से बेहतर आ रहे हैं। पहले सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे ड्राइवर, मैकेनिक या किसी दुकान में काम करने वाला बनता था। लेकिन अब दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे नीट, जेईई का एग्जाम क्लियर करके देश के सबसे बड़े मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन ले रहे हैं। अगर हम सिर्फ पिछले साल का आंकड़ा उठाएं तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 2 हजार से ज्यादा बच्चों ने जेईई, नीट का एग्जाम क्लियर किया और मेडिकल व इंजीनियर कॉलेज में एडमिशन लिया। जहां देश की बाकी जगहों पर लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल से निकालकर प्राइवेट स्कूल में एडमिशन करवाते हैं। वहीं, दिल्ली देश का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां पर पिछले कुछ सालों में चार लाख से ज्यादा बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया। यह दिल्ली के अलावा किसी और राज्य में नहीं हो रहा है।

आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बच्चों को विदेश में जाकर पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है – सीएम आतिशी

मुख्यमंत्री आतिशी ने आगे कहा कि अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पेरिस जा रहे हैं। सरकार के खर्चे पर जा रहे हैं और फ्रेंच भाषा सीखने जा रहे हैं। क्या कभी किसी ने सोचा था कि सरकारी स्कूल के बच्चे विदेश पढ़ने भी जाएंगे। लेकिन आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बच्चों को यह अवसर भी मिल रहा है कि वो विदेश पढ़ाई करने जा रहे हैं। यह जो शिक्षा क्रांति पिछले दस साल में आई है, इसका नतीजा है कि ना सिर्फ हमारे बच्चे और उनका परिवार बल्कि पूरी दिल्ली और पूरा देश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

दिल्ली स्किल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चे 10-10 लाख रुपए के पैकेज की नौकरियां लेकर निकल रहे- सीएम आतिशी

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि मुझे कई अभिभावक मिलते हैं और कहते हैं कि आपने स्कूल तो अच्छे कर दिए। स्कूलों में अच्छी पढ़ाई हो रही है। हमारे बच्चों के अच्छे रिजल्ट आ रहे हैं लेकिन हमारे बच्चे बारहवीं के बाद क्या करेंगे, उसके बारे में आपने क्या सोचा और किया। जब बच्चे नौवीं और दसवीं कक्षा में होते हैं तो उस वक्त हर माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि उनके बच्चे बारहवीं के बाद क्या करेंगे? लेकिन मैं बताना चाहती हूं कि पिछले दस साल से ना सिर्फ दिल्ली सरकार स्कूल ठीक कर रही है बल्कि यह तैयारी भी कर रही है कि जब बारहवीं के बाद बच्चों के लिए अच्छे कॉलेज और यूनिवर्सिटी तैयार हों। 2014 में जब हमारी सरकार बनी थी। दिल्ली सरकार की यूनिवर्सिटी, आईटीआई मिलाकर दिल्ली के बच्चों के लिए कुल 83,600 सीटें होती थीं। दिल्ली सरकार ने मात्र दस साल में दिल्ली के कॉलेजों में सीटों को दोगुना कर दिया है। आज दिल्ली के बच्चों के लिए दिल्ली के कॉलेजों में 1,55,000 सीटें हैं। जब हमारे बच्चे बारहवीं पास करके निकलेंगे तो उनके लिए दिल्ली की यूनिवर्सिटी में अनेकों अवसर हैं। हमने कई नई और अलग-अलग तरह की यूनिवर्सिटी बनाईं। दिल्ली में ‘दिल्ली स्किल एंड आंत्रप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी’ की एक बहुत बड़ी पहल हुई। क्योंकि बच्चे कई बार पूछते थे कि वह बीए, बीकॉम कर लेते हैं लेकिन उसके बाद उन्हें नौकरियां नहीं मिलती हैं। तो हमारे बच्चों के लिए स्किल में आंत्रप्रेन्योरशिप में बीए, बीकॉम और बीबीए के कोर्स शुरू हुए। आज दिल्ली स्किल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चे, जो अलग-अलग स्किल कोर्स करके निकल रहे हैं, वह दस-दस लाख रुपए के पैकेज की नौकरियां लेकर निकल रहे हैं। ऐसा इस देश में पहले कभी नहीं हुआ।

हमने दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी बनाई है और कई यूनिवर्सिटी में नए कैंपस बनाए हैं – सीएम आतिशी

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि इसके अलावा, एक दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी बनाई गई। दिल्ली में एक नेता जी सुभाष चंद्र बोस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कॉलेज होता था, उसको यूनिवर्सिटी बनाया गया और उसमें काफी सीटें बढ़ाई गईं। हमारी ही दिल्ली सरकार की यूनिवर्सिटीज में 6 नए कैंपस बनाए गए। अंबेडकर यूनिवर्सिटी में दो नए कैंपस बनाए गए। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में बच्चे इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई करने जाते हैं। उसका एक ईस्ट दिल्ली कैंपस इस स्कूल के पास में ही खोला गया है, जहां पर हमारे बच्चे आगे जाकर पढ़ाई कर सकते हैं। नेता जी सुभाष चंद्र बोस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के दो नए कैंपस जाफरपुर और गीता कॉलोनी में खोले गए। आईपी यूनिवर्सिटी का भी नया ईस्ट कैंपस खोला गया है। तो दिल्ली सरकार की यूनिवर्सिटीज में छह नए कैंपस खोले गए। उसके अलावा, दिल्ली के बच्चों के लिए आईपी यूनिवर्सिटी में 27 नए कॉलेज खोले गए, जहां पर टेक्निकल कोर्सेज में हमारे बच्चे अच्छी नौकरियों के लिए पढ़ाई कर सकते हैं। यह पिछले दस साल की कहानी है।

दिल्ली सरकार की अलग-अलग यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चों को बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी मिल रही हैं- सीएम आतिशी

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि हमारी यूनिवर्सिटी से पढ़ने वाले बच्चे बढ़िया नौकरी कर रहे हैं। सरकार की एक यूनिवर्सिटी इंदिरा गांधी टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमन है। यहां पर दिल्ली की लड़कियां इंजीनियरिंग पढ़ने जाती हैं। इस बार इस यूनिवर्सिटी से हमारी एक बिटिया 82 लाख रुपए का पैकेज लेकर नौकरी कर रही है और अपना शानदार भविष्य बना रही है। हमारी अलग-अलग यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चों को बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी मिल रही हैं। कोई टोयोटा, मारुति या माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी कर रहा है। इस सब का नतीजा है कि दिल्ली में रहने वाले आम और गरीब परिवार के बच्चों को आज शानदार शिक्षा स्कूलों में भी मिलती है और कॉलेज में भी मिलती है। हर बच्चे को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। मैं उम्मीद करती हूं कि जो बच्चे आज झिलमिल स्कूल में पढ़ रहे हैं, वह आने वाले सालों में ना सिर्फ अपने परिवार का बल्कि दिल्ली और देश का भी नाम दुनिया में जरूर रौशन करेंगे।

इस स्कूल ने शिक्षा के साथ ही खेलों में भी बहुत नाम कमाया है, आज यहां के बच्चे इंडिया लेवल पर हॉकी खेल रहे हैं – राम निवास गोयल

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष और स्थानीय विधायक रामनिवास गोयल ने कहा कि नवनिर्मित एकेडमिक ब्लॉक में 46 नए कामरे जुड़ रहे हैं। इससे बच्चों को पढ़ने में ज्यादा सुविधा मिलेगी। इसमें छह लैब भी बनी है। पिछले 10 साल का इतिहास उठाकर देखें तो इस स्कूल ने शिक्षा में ही नहीं, बल्कि खेलों में भी बहुत प्रगति की है। जिला स्तर पर इस स्कूल ने नाम कमाया है। हॉकी के बच्चे इस वक्त इंडिया लेवल पर खेल रहे हैं। अगर इस स्कूल का रिजल्ट देखा जाए, तो 2014-15 में दसवीं का रिजल्ट 60 फीसद था, जो बढ़कर के 95 फीसद हो गया है। लड़कों का रिजल्ट 100 फीसद रहा है। इसके लिए मैं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं बधाई देता हूं। यह बिल्डिंग बहुत सुंदर बनी है। लैब भी बहुत सुंदर है। यहां के बच्चों ने स्टार्टअप में बहुत अच्छा काम किया है। बच्चों ने जो प्रोजेक्ट बनाया है उसमें से उन्होंने अपने प्रोडक्ट बेचे भी है। एक बच्ची ने बताया कि उसके 50 आइटम सेल हो चुके हैं। यह स्कूल निरंतर आगे बढ़े। पहले झिलमिल के इस स्कूल में पेरेंट्स अपने बच्चों को भेजना पसंद नहीं करते थे, लेकिन शिक्षा विभाग ने मेहनत की और आज इस स्कूल में बहुत से बच्चों को एडमिशन नहीं मिल पाता है। इस स्कूल के हॉकी का ग्राउंड दिल्ली का एक प्रसिद्ध ग्राउंड बन चुका है। यहां बैडमिंटन और टेबल टेनिस दोनों गेम हैं। यहां की लाइब्रेरी भी दर्शनीय है।

नवनिर्मित स्कूल ब्लॉक में सुविधाएं

नव निर्मित स्कूल ब्लॉक में 46 कमरे बने हैं। इनमें 25 कमरों में क्लासेज चलेंगी। जबकि एक रूम में प्रधानाचार्य का कार्यालय होगा, एक स्टॉफ रूम होगा, छह रूम में लैब्स समेत अन्य सुविधाएं होंगी। इस ब्लॉक में 8 शौचालय बनाया गया है और एक लिफ्ट भी लगी है।

नए एकैडिक ब्लॉक के फायदे

झिलमिल कॉलोनी में जीजीएसएसएस स्कूल में दो शिफ्टों में क्लासेज चलती हैं। सुबह की शिफ्ट में 1187 और शाम की शिफ्ट में 1435 छात्र नामांकित हैं। पहले स्कूल में 36 क्लासरूम थे, जिससे छात्र-कक्षानुपात लगभग 40 था। नए क्लासरूम जुड़ने के बाद वाणिज्य, कला और विज्ञान स्ट्रीम की क्लासेस भी चलेंगी, जो पहले केवल लड़कों के स्कूल में उपलब्ध थीं लेकिन अब लड़कियों के स्कूल में भी वाणिज्य, कला और विज्ञान स्ट्रीम के तहत क्लासेस शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, सुबह की शिफ्ट में प्राथमिक वर्ग शुरू होने की संभावना भी है।

आपसपास के कई कालोनियों के बच्चों को होगा लाभ

स्कूल में नए ब्लॉक के शुरू होने के बाद झिलमिल कॉलोनी के अलावा आसपास की कई कालोनियों के बच्चों को भी इसका फायदा मिल सकेगा। अब यह स्कूल विवेक विहार, झिलमिल, ज्वाला नगर, विश्वास नगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और कस्तूरबा नगर के छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद होगा। अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और क्लासरूम छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा सुविधाएं प्रदान करेंगे।

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