दिल्ली के कई इलाकों में बार-बार बिजली कटौती से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है-जब तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग चरम पर होगी, तब क्या होगा- देवेंद्र यादव

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*बिजली कंपनियां बिजली दरों में वृद्धि करने के लिए बिजली कटौती करके भाजपा सरकार पर दबाव बना रही है, लेकिन सरकार भी बिजली कंपनियों पर नियंत्रण रखने में नाकाम साबित हो रही है।- देवेन्द्र यादव

*कहीं पिछली केजरीवाल सरकार की तरह भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार भी बिजली कंपनियों को फायदा पहुॅचाने की दिशा में काम तो नही कर रही है? – देवेन्द्र यादव

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली में बिजली कटौती पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा की दिल्ली सरकार भी बिजली कम्पनियों पर नियंत्रण रखने में नाकाम साबित हो रही है। डिस्कॉम भी मानती है कि घंटों बिजली कटौती का दिल्लीवालों को सामना करना पड़ रहा है। बिजली कम्पनियां बिजली दरों में वृद्धि करने के लिए बिजली कटौती करके सरकार पर दवाब बना रही है जिस पर बिजली मंत्री पहले ही बयान दे चुके हैं कि बिजली की दरें बढ़ सकती है। कहीं पिछली केजरीवाल सरकार की तरह भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार भी बिजली कंपनियों को फायदा पहुॅचाने की दिशा में काम तो नही कर रही है?

देवेन्द्र यादव ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार इस वर्ष भीष्ण गर्मी में बिजली की मांग 9000 मेगावाट तक पहुॅचने की संभावना है, जबकि रिकॉर्ड पिछले वर्ष 2024 की भीष्म गर्मी के समय यह मांग 8656 मेगावाट तक बढ़ गई थी। हमारा कहना है कि जब 25 मार्च के बाद बिजली की मांग 4070-4360 मेगावाट बीच होने के बावजूद दिल्लीवालों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, भीष्ण गर्मी के समय जब बिजली की मांग 9000 मेगावाट पहुॅचने की आशंका है, सरकार उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति कैसे और कहां से पूरी करेगी?

देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली के 50 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली आपूर्ति देने के बजाय क्या भाजपा सरकार भी केजरीवाल सरकार की तरह सिर्फ सरचार्ज सहित बिल वसूलने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त बिजली मांग के लिए अभी एक महीने से भी ज्यादा का समय है यदि भाजपा मुख्यमंत्री बिजली आपूर्ति पर संवेदनशीलता पूर्वक बिजली मंत्री को काम करने के लिए कहेंगी तो दिल्ली वालों को बिजली आपूर्ति में राहत मिल सकती है।

देवेन्द्र यादव ने कहा कि कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार ने दिल्ली में बिजली का निजीकरण करके दिल्लीवालों 24 घंटे बिजली उपलब्धता की सहूलियत देने का काम किया था और बिजली कम्पनियों को सब्सिडी न देकर बिजली उपभोक्ताओं को पूरे 15 वर्ष सब्सिडी देने का काम किया था। आम आदमी पार्टी ने बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी को बिजली कम्पनियों को दिया और पेंशन चार्ज सहित अन्य सरचार्ज बढ़ाकर बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी करके दिल्लीवालों के बिल दुगने कर दिए और भाजपा की सरकार भी केजरीवाल नीति पर चल रही है और दिल्लीवालों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

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