कांग्रेस अधिवेशन में बोले खरगे-आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ रही कांग्रेस; यह लड़ाई सांप्रदायिकता, अन्याय, असमानता, गरीबी और भेदभाव के खिलाफ

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*बीते 11 वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं, लोकतंत्र और आरक्षण प्रणाली पर निरंतर हमले किए गए

*जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सरकार ध्रुवीकरण का सहारा ले रही

*चुनाव आयोग से लेकर संसद तक को सरकार का विस्तार बनाने की कोशिश हो रही 

*कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया, कहा-  जो लोग पार्टी के काम में हाथ नहीं बंटाते, उन्हें आराम करने की आवश्यकता 
 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ रही है और यह लड़ाई सांप्रदायिकता, अन्याय, असमानता, गरीबी और भेदभाव के खिलाफ है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बुधवार को अहमदाबाद में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन के प्रातःकालीन सत्र में अध्यक्षीय संबोधन दे रहे थे।

खरगे ने कहा कि पहले विदेशी शासकों द्वारा अन्याय, असमानता और गरीबी को बढ़ावा दिया जाता था, लेकिन आज हमारी अपनी सरकार ऐसा कर रही है। उस समय विदेशी सरकार ने सांप्रदायिकता का फायदा उठाया और आज हमारी अपनी सरकार भी वह फायदा उठा रही है, लेकिन हम इस लड़ाई को जीतकर रहेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बीते 11 वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं, लोकतंत्र और आरक्षण प्रणाली पर निरंतर हमले किए गए हैं। बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया। खरगे ने कहा कि जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सरकार ध्रुवीकरण का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया, लेकिन इस मामले पर संसद में चर्चा नहीं होने दी गई। सरकार मणिपुर हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस से भाग रही है, जबकि आधी रात को बिल पास किए जा रहे हैं। 

खरगे ने चुनावों में हो रही धांधली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज चुनाव आयोग से लेकर संसद तक को सरकार का विस्तार बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने ईवीएम प्रणाली को धोखाधड़ी बताया और बैलेट पेपर की वापसी की मांग की। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदाता सूची का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन चुनाव आयोग पर कोई असर नहीं हुआ। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में एकाधिकार स्थापित किया जा रहा है। सार्वजनिक उपक्रमों को चुनिंदा पूंजीपतियों को बेचकर सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के आरक्षण पर चोट की है।  

खरगे ने देश में बेतहाशा बेरोजगारी और महंगाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आगे कहा कि सरकार एमएसपी और किसानों की आय दोगुनी करने के वादे से पीछे हट रही है। इसी तरह श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है और ट्रेड यूनियनों को कुचला जा रहा है। दलितों के साथ भेदभाव की घटनाओं पर भी कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर समय बोलते रहते हैं, लेकिन जब देश के लोगों पर अन्याय होता है, तो वह चुप हो जाते हैं। 

खरगे ने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड जैसे विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और उनके हक की राशि से वंचित रख रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें राज्यपालों को बिलों पर समय सीमा के अंदर निर्णय लेने की सलाह दी गई है।

उन्होंने जातिगत जनगणना को जरूरी बताते हुए कहा कि मोदी सरकार इसे नहीं करा रही है। जनगणना न कराने के कारण 14 करोड़ लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और बाकी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पार्टी के काम में हाथ नहीं बंटाते, उन्हें आराम करने की आवश्यकता है। जो जिम्मेवारी नहीं निभाते उन्हें रिटायर किया जाएगा।

इस अवसर पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और देश भर से आए अन्य वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि मौजूद थे।

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