‘तुम जैसे हो, वैसे ही पर्याप्त हो’: ईशा कोप्पिकर का आत्म-सम्मान जगाने वाला सशक्त संदेश

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*’खुद से खुद्दारी’: ईशा कोप्पिकर ने आत्म-मूल्य और आत्मबल का आंदोलन छेड़ा

*ईशा कोप्पिकर का सभी के लिए महत्वपूर्ण संदेश: ‘आपको छोटा करने, बदलने या किसी मान्यता पाने की ज़रूरत नहीं है’ — अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया दिवस पर

न्यू ऐज क्वीन ईशा कोप्पिकर एक बार फिर लौटी हैं — इस बार नए ज़माने के लिए नए लेकिन ज़रूरी संदेश के साथ। – एक ऐसी दुनिया में जहाँ अक्सर समाज आपको झुकने, ढलने और किसी तय मानक के अनुरूप बनने के लिए कहता है, वहाँ अपनी सच्चाई में अडिग रहना आत्म-सम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक है। अपने नवीनतम वीडियो में ईशा ने एक गहराई से भरा और प्रेरणादायक संदेश दिया है — खुद के सच्चे रूप में टिके रहना और दूसरों की कसौटियों में फिट होने के लिए खुद को छोटा न करने के बारे में एक मजबूत और आत्मा को झकझोर देने वाला संदेश देती हैं।

शांत आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ ईशा हमें याद दिलाती हैं कि हमें बाहरी दुनिया से मान्यता पाने की ज़रूरत नहीं है — हमारे भीतर ही सब कुछ मौजूद है जिसकी हमें ज़रूरत है।
“तुम — जैसे हो, वैसे ही पर्याप्त हो,” वो कहती हैं। यह affirmation (सकारात्मक पुष्टि) उन सभी के लिए बहुत ज़रूरी है जो कभी-कभी खुद पर संदेह करने लगते हैं।

उनके शब्द आत्मविश्वास के सार को दर्शाती हैं – न ज़ोरदार, न दिखावटी या शेखी बघारने वाले नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी और अडिग। ईशा कहती है, “आपको खुद को छोटा करने, बदलने या स्वीकृति पाने की कोशिश करने की ज़रूरत नहीं है। मैं यहाँ आपको याद दिलाने आई हूँ:
आप— जैसे हो, वैसे ही पर्याप्त हो।
मजबूती से खड़े रहो। सच्च बोलो। अपनी क़ीमत पहचानो।” 💛

नीचे पोस्ट देखें:

https://www.instagram.com/reel/DLgveUjRjoR


वीडियो के अंत में ईशा दर्शकों से कहती हैं, “खड़े रहो, सच बोलो, अपनी कीमत पहचानो,” यह सिर्फ एक मोटिवेशनल संदेश नहीं रह जाता, बल्कि उन सभी के लिए एक निजी मंत्र बन जाता है जो बिना किसी शर्म के खुद को स्वीकार करना सीख रहे हैं। #खुदसेखुद्दारी सिर्फ़ एक हैशटैग नहीं है, यह एक आंदोलन है और ईशा इसे शालीनता, धैर्य और ईमानदारी के साथ नेतृत्व कर रही हैं।

और इस तरह के शक्तिशाली संदेश को साझा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सोशल मीडिया दिवस से बेहतर दिन और क्या हो सकता है? एक ऐसे मंच पर जहाँ अक्सर तुलना और क्यूरेटेड परफ़ेक्शन को बढ़ावा दिया जाता है, ईशा के शब्द हमें याद दिलाते हैं कि स्वयं होना ही सबसे बड़ा सौंदर्य है। डिजिटल दुनिया का उपयोग हमें ऊपर उठाने के लिए हो — नीचा दिखाने के लिए नहीं।

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