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90 के दशक की फ़िल्म का एक गाना था पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा बेटा हमारा ऐसा काम करेगा। जी हाँ देश भर में लाखों छात्र सफ़ेद कोट पहनने का सपना देखते हैं, लेकिन केवल कुछ असाधारण प्रतिभाएँ ही दृढ़ संकल्प, अनुशासन और समर्पण के बल पर शीर्ष पर पहुंच पाते। तस्वीरों में आप देख रहे हैं ये वे होनहार मैडीकल के विद्यार्थी है। जो कि नए डॉक्टरों की पीढ़ी हैं। डैम्स यानी दिल्ली एकेडमी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ हैं। डीएएमए के विद्यार्थियों का मेडिकल शिक्षा संस्थान है। डीएएमएस ने गर्व के साथ राष्ट्र के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले मेडिकल विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए एक भव्य समारोह का आयोजन दिल्ली के क्राउन प्लाज़ा, मयूर विहार में आयोजित किया गया , जहां नीट पीजी, आईएनआई सीईटी और अन्य प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले देश के सबसे उज्ज्वल प्रतिभाशाली छात्र एक मंच पर एकत्रित किया गया। परिणाम हर वर्ष अच्छा होने का दावा किया गया। यह समारोह उन असाधारण अचीवर्स का सम्मान किया गया, जिन्होंने चुनौतियों को मील के पत्थर में बदला और वर्षों की मेहनत को उल्लेखनीय सफलता में तब्दील किया।
जिसने सीमाओं को पार किया वह सहनशीलता जिसने अनुशासन को आकार दिया वह प्रतिबद्धता जिसने सपनों को उपलब्धियों में बदला और वह मार्गदर्शन जिसने विद्यार्थियों को टॉपर बनाया। ये युवा डॉक्टर भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के भविष्य के टॉर्चबियरर्स हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि कड़ी मेहनत किस्मत बदल सकती है, दृढ़ निश्चय सीमाओं को पार कर सकता है, और उत्कृष्टता अडिग समर्पण का परिणाम होती है। डीएएमएस द्वारा उन विद्यार्थियों को सम्मानित किया। जिन्होंने न केवल टॉप रैंक हासिल किए बल्कि अकादमिक उत्कृष्टता, मेडिकल कौशल और अनुशासित तैयारी के नए मानक स्थापित किए। उनकी यात्राएँ अनगिनत घंटे की पढ़ाई, त्याग और केंद्रित प्रयासों को दर्शाती हैं। आइए देखते हैं टोटल ख़बरें के वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना कि इस विशेष रिपोर्ट में डीएएमएस के संस्थापक एवं निदेशक, डॉ. सुमेर सेठी और पदाधिकारियों के इलावा विद्यार्थियों ने क्या कहा।

बताया जाता है कि डीएएमएस भारत का पहला लाइव, इंटरैक्टिव, तकनीक आधारित शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म है। जिसने देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों को सशक्त बनाया। उनका विज़न हमेशा स्पष्ट रहा है बेहतरीन मार्गदर्शन देना, सही रणनीति प्रदान करना और ऐसा सीखने का माहौल तैयार करना जो एक्सीलेंस को बढ़ावा दें।
नए डॉक्टरों की पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। उनका नेतृत्व मेडिकल शिक्षा के भविष्य को आकार देना और विद्यार्थियों को उनके सपनों की ओर मार्गदर्शन प्रदान करना। टोटल ख़बरें दिल्ली से राजेश खन्ना की विशेष रिपोर्ट।

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