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दक्षिणी पूर्वी जिला पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से ठगी किया करते थे। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों का नाम धर्मेंद्र चौहान,
सोमवीर सैनी, मोहम्मद अहतेशामुल हक, संतोष कुमार खंडाई, मोहम्मद बुगारी पी पी, मोहम्मद शाहिद टी, नितेश कुमार, देव उर्फ सोनू एसपी, इम्तियाज, महेश्वर, पुंटिया उर्फ अजय पुंटिया। पुलिस के अनुसार सात दिसंबर को पुलिस स्टेशन शाहीन बाग में तनबीर अहमद पुत्र तौफीक अहमद निवासी शाहीन बाग, दिल्ली के द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसमें बताया कि अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से धमकाकर उनसे 99,888 रुपये की धोखाधड़ी की, जिसमें धोखेबाजों ने खुद को कर्नाटक पुलिस अधिकारी बताया और दावा किया कि उनका आधार नंबर और मोबाइल नंबर जघन्य अपराधों में शामिल हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर कई टीमों ने वित्तीय और तकनीकी दोनों तरह के सुरागों का बारीकी से विश्लेषण करके नेटवर्क को आपस में जोड़ा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान और ओडिशा में तकनीकी निगरानी और निरंतर फील्ड वर्क का उपयोग करते हुए, टीमों ने हवाई, सड़क और रेल मार्गों से संदिग्धों की गतिविधियों पर नज़र रखी और अंततः उन्हें नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और मुंबई हवाई अड्डे सहित रणनीतिक स्थानों पर रोका। इस त्वरित अभियान से डिजिटल फोरेंसिक, खुफिया जानकारी और अंतरराज्यीय समन्वय के प्रभावी तालमेल का पता चलता है।
पुलिस ने गिरोह के दस प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो खाताधारक और दो दलाल शामिल हैं, गिरफ़्तार किए गए व्यक्तियों के नाम धर्मेंद्र चौहान, सोमवीर सैनी, मोहम्मद अहतेशामुल हक, संतोष कुमार खंडाई, मोहम्मद बुगारी पी और मोहम्मद शाहिद टी। इनमें से कई साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पहले भी शामिल रहे हैं, जो दर्शाता है कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म और वित्तीय चैनलों का फायदा उठाने वाले एक अनुभवी आपराधिक तंत्र का हिस्सा हैं। बताया जाता हैं कि आरोपी व्यक्ति “डिजिटल गिरफ्तारी” का घोटाला चला रहे थे, जिसमें पीड़ितों को झूठे आपराधिक मामलों की धमकी देकर जबरन पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे। पुलिस अधिकारी बनकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल किए जाते थे, जिनमें आधार कार्ड के दुरुपयोग और आपराधिक मामलों से जुड़ी झूठी कहानियां गढ़ी जाती थीं। आइए देखते हैं टोटल ख़बरें के वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना कि इस विशेष रिपोर्ट में दक्षिणी पूर्वी जिला के DCP ने क्या कहा।

पुलिस ने आरोपियों के क़ब्ज़े से सिम एक्टिवेशन और व्हाट्सएप प्रमाणीकरण के लिए इस्तेमाल किए गए 10 मोबाइल फोन। धोखाधड़ी की गई राशि निकालने के लिए इस्तेमाल किए गए 2 डेबिट कार्ड, जिनमें पीएनबी खाते का डेबिट कार्ड भी शामिल है, जिसमें इस मामले के शिकायतकर्ता की धोखाधड़ी की गई राशि जमा की गई थी। 10 अज्ञात डेबिट/क्रेडिट कार्ड। आरोपियों के नाम पर जारी किए गए कई डेबिट कार्ड। सभी आरोपियों से प्राप्त व्हाट्सएप चैट, वॉयस नोट, खाता जमा करने के प्रमाण और लेनदेन विवरण सहित डिजिटल साक्ष्य और बलेनो कार बरामद करी है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। टोटल ख़बरें दिल्ली से राजेश खन्ना की विशेष रिपोर्ट।

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