“2047 तक दिल्ली को विकास, नवाचार और वैश्विक साझेदारी की राजधानी बनाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता” — शिक्षा मंत्री
श्री सूद ने CII दिल्ली स्टेट एनुअल सेशन 2025–26 एवं बिज़नेस कॉन्फ्रेंस में लिया भाग
व्यापार, रोजगार और आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए नीति सुधार और उद्योग से संवाद के लिए प्रतिबद्ध है दिल्ली सरकार — श्री सूद
सरकार उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देगी; आगामी इन्क्यूबेशन नीति के तहत 2035 तक 5,000 स्टार्टअप को समर्थन देने की योजना
फायर NOC, श्रम और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाकर ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बेहतर बनाने के लिए सुधार जारी — श्री सूद
दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने आज नई दिल्ली में आयोजित CII दिल्ली स्टेट एनुअल सेशन 2025–26 एवं बिज़नेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। यह सम्मेलन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग प्रतिनिधि, नीति निर्माता और विशेषज्ञ शामिल हुए।
“दिल्ली 2047: कैपिटल ऑफ ग्रोथ, इनोवेशन एंड ग्लोबल पार्टनरशिप्स” विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए श्री सूद ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार दिल्ली बनाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली के व्यापार जगत ने व्यापार वृद्धि, रोजगार सृजन और शहर की अर्थव्यवस्था में उद्योगों के योगदान से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें बुनियादी ढांचे, नीतिगत ढांचे और भूमि की उपलब्धता से जुड़े विषय भी शामिल हैं।
सरकार का दृष्टिकोण साझा करते हुए श्री सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार नीतियां बनाने और बेहतर व्यावसायिक वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि डीरिगुलेशन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से दिल्ली में व्यापार और उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योगों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए लगातार उद्योग संगठनों और हितधारकों से बातचीत कर रही है, इसके सार्थक परिणाम भी आ रहे है। इस बातचीत का उद्देश्य दिल्ली की आर्थिक प्रगति को और मजबूत करना है।
श्री सूद ने कौशल विकास पर भी जोर देते हुए कहा कि सरकार शिक्षा को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर काम कर रही है। इसके तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के पाठ्यक्रम को आधुनिक और तकनीक युक्त बनाया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार कौशल की ट्रेनिंग मिल सके।
उन्होंने दिल्ली में युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में आयोजित एक नए कार्यक्रम स्टार्टअप युवा फेस्टिवल के माध्यम से कई नवाचारपूर्ण स्टार्टअप विचारों को आर्थिक सहायता भी दी गई। साथ ही सरकार एक नई इन्क्यूबेशन नीति पर काम कर रही है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में लगभग ₹325 करोड़ का निवेश कर 2035 तक करीब 5,000 स्टार्टअप्स को समर्थन देने की योजना है।
श्री सूद ने कहा कि सरकार असंगठित सेवा क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर विचार कर रही है, जो आने वाली नीतिगत पहलों का हिस्सा हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बेहतर बनाने के लिए कई सुधार किए जा रहे हैं। इसके तहत फायर NOC प्रक्रिया का सरलीकरण, श्रम नियमों और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े कुछ लाइसेंसिंग प्रावधानों को जनहितकारी बनाया जा रहा है, ताकि दिल्ली में स्थापित और नए उद्योगों के लिए काम करना और आसान हो सके।
भूमि की उपलब्धता को एक संरचनात्मक चुनौती बताते हुए श्री सूद ने कहा कि दिल्ली के सीमित भौगोलिक क्षेत्र और कई एजेंसियों के प्रशासनिक ढांचे के कारण यह एक जटिल विषय है। फिर भी सरकार भविष्य की योजना और विकास नीतियों पर सभी हितधारकों से सुझाव लेने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में भविष्य में तकनीक आधारित शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और ICT लैब स्थापित की जाएं, ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 18 लाख छात्रों को आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा मिल सके।
अंत में श्री सूद ने कहा कि सरकार, उद्योग और समाज के बीच मजबूत सहयोग ही दिल्ली को विकास, नवाचार और अवसरों का वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।












