नई दिल्ली, 03 अक्टूबर 2026: भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय (6A, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग) से जारी प्रेस वक्तव्य में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ‘अवैध’ बताना कांग्रेस की हताशा, पराजय की मानसिकता और संवैधानिक संस्थाओं पर प्रहार करने की पुरानी परिपाटी का एक और प्रमाण है।
श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि जब-जब देश की जनता कांग्रेस को चुनावों में नकारती है, तब-तब वह लोकतंत्र, चुनाव आयोग, ईवीएम और जनता के जनादेश को बदनाम करने की साजिश रचने लगती है।
“क्या लोकतंत्र तभी वैध होता है जब गांधी परिवार सत्ता में हो?”
केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा:
“जिस प्रधानमंत्री को देश की जनता ने पूर्ण बहुमत और रिकॉर्ड जनादेश देकर लगातार तीसरी बार चुना है, उन्हें ‘अवैध’ करार देना कांग्रेस के अहंकार को दर्शाता है। क्या कांग्रेस की नजर में लोकतंत्र केवल तभी वैध होता है, जब गांधी परिवार या कांग्रेस सत्ता में हो? भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में लगातार 3 बार मुख्यमंत्री और फिर लगातार 3 बार प्रधानमंत्री चुना जाना साबित करता है कि जनता का अटूट विश्वास किसके साथ है।”
चुनाव आयोग और निष्पक्षता पर भ्रम फैला रही है कांग्रेस
शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भ्रम फैलाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा:
- पारदर्शी कानून: ‘मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023’ को संसद द्वारा पूरी तरह संवैधानिक और पारदर्शी तरीके से पारित किया गया है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को भी चयन समिति का हिस्सा बनाया गया है।
- कांग्रेस का इतिहास: दशकों तक कांग्रेस सरकारों ने बिना किसी कानून के, केवल प्रधानमंत्री कार्यालय की एक ‘पर्ची’ पर मनमाने तरीके से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की और बाद में उन्हें मंत्री पद तथा सांसद के इनाम दिए।
- मतदाता सूची और तुष्टीकरण: मतदाता सूची को अपडेट करना चुनाव आयोग की एक सतत और वैधानिक प्रक्रिया है। कांग्रेस ‘गरीबों’ और ‘मुस्लिम अल्पसंख्यकों’ के नाम पर डर का माहौल बनाकर अपनी तुष्टीकरण की राजनीति को जिंदा रखना चाहती है।
EVM पर दोहरा रवैया और बैलेट पेपर के दौर में लौटने की चाहत
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के दोहरे रवैये को उजागर करते हुए कहा कि जब कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना या हिमाचल प्रदेश में जीतती है, तब उसे ईवीएम पर कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन जब जनता उनके भ्रष्टाचार को खारिज कर देती है, तो हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ईवीएम की विश्वसनीयता पर मुहर लगाए जाने के बावजूद कांग्रेस देश को 1980 और 90 के दशक के बूथ कैप्चरिंग, मतपेटी लूटने और हिंसा वाले बैलेट पेपर के दौर में वापस धकेलना चाहती है। भाजपा यह स्पष्ट करती है कि देश का लोकतंत्र बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान पर अडिग है और जनता ऐसे आधारहीन बयानों का करारा जवाब देती रहेगी।










