सरकारी सेवाएँ बिना किसी बाधा के नागरिकों तक पहुँचना ही सुशासन की पहली कसौटी: विजेंद्र गुप्ता

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नई दिल्ली, 03 अक्टूबर 2026: “सुशासन की वास्तविक कसौटी यही है कि नागरिकों को सरकारी सेवाएँ कितनी सहजता और सरलता से उपलब्ध होती हैं। किसी भी योजना की सार्थकता तभी है, जब उसकी जानकारी, मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता बिना किसी अनावश्यक बाधा के लोगों तक पहुँचे।” यह बात दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष एवं रोहिणी से विधायक श्री विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को कही।

वह रोहिणी सेक्टर-8 स्थित केंद्रीय विद्यालय में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘सेवा सेतु कैंप’ का उद्घाटन कर रहे थे। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के दौरान उत्तर-पश्चिम दिल्ली की जिलाधिकारी (आईएएस) सुश्री सौम्या सौरभ भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

‘सिंगल विंडो’ सुविधा केंद्र बना ‘सेवा सेतु कैंप’

‘सेवा सेतु कैंप’ को नागरिकों के लिए एक एकल सुविधा केंद्र (Single Window Facilitation Centre) के रूप में तैयार किया गया है। यहाँ दिल्ली सरकार और विभिन्न सार्वजनिक एजेंसियों की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी, मार्गदर्शन और आवेदन संबंधी सहायता एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कैंप में तैनात अधिकारियों से बातचीत की, व्यवस्थाओं का जायजा लिया और स्पष्ट किया कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र लाभार्थियों तक समय पर सहायता पहुँचाना और उन्हें जागरूक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

एक ही स्थान पर मिले 14 से अधिक प्रमुख विभाग

कैंप में नागरिकों को विभिन्न विभागों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए प्रमुख सरकारी एजेंसियों के स्टॉल लगाए गए:

  • स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग
  • खाद्य एवं आपूर्ति विभाग
  • बीएसईएस (BSES) एवं टीपीडीडीएल (TPDDL)
  • समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग
  • दिल्ली परिवहन निगम (DTC) व दिल्ली पुलिस
  • शिक्षा, श्रम और दिल्ली जल बोर्ड (DJB)
  • दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) एवं SC/ST विभाग
  • दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन (DDB)

प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद

विधानसभा अध्यक्ष ने शिविर में पहुँचे स्थानीय नागरिकों से व्यक्तिगत रूप से बात की और उनके अनुभवों की जानकारी ली।

उन्होंने कहा:

“अलग-अलग सरकारी विभागों को एक ही स्थान पर लाने से नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने की झंझट से मुक्ति मिलती है। स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के शिविर नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करते हैं, जिससे समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हो पाता है।”

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