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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (एनआईईपीए) ने सोमवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपना 19वां स्थापना दिवस मनाया। इस समारोह में जानेमाने विचारकों ने 21वीं सदी की चुनौतियों एवं अवसरों के लिए भारत के शैक्षिक परिदृश्य को आकार देने में इस संस्थान की विरासत और भूमिका पर विचार-विमर्श किया। समारोह के मुख्यातिथि इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राम माधव थे। उन्होंने “उभरती नई दुनिया के लिए भारत को तैयार करना” विषय पर स्थापना दिवस व्याख्यान दिया।एनआईईपीए की डीन प्रोफेसर मोना खरे के स्वागत भाषण से हुई। इस भाषण ने विचारपूर्ण चर्चाओं के लिए मंच तैयार किया। इसके बाद एनआईईपीए की कुलपति प्रोफेसर शशिकला वांजारी ने भारतीय शिक्षा के लिए संस्थान की दूरदर्शी दिशा और राष्ट्रीय नीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता एनआईईपीए के कुलाधिपति महेश चंद्र पंत ने की।
एनआईईपीए के कर्मचारियों और विद्वानों के लिए एक विशेष सम्मा पुरस्कार शामिल किया गया। एनआईईपीए की कुलपति प्रोफेसर शशिकला वांजारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के परिवर्तनकारी लक्ष्यों के साथ भारतीय शिक्षा को जोड़ने में एनआईईपीए की भूमिका का प्रभावशाली विवरण प्रस्तुत किया। प्रोफेसर वांजारी ने एनआईईपीए के मूल मिशन को रेखांकित करते हुए कहा, “एनआईईपीए में, हमारा लक्ष्य छात्रों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक उन्नति के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और उपकरणों से लैस करना है। एनईपी 2020 के उन लक्ष्यों के साथ गहराई से मेल खाती है जो 2035 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50% तक बढ़ाने और बहु-विषयक, कौशल-आधारित तथा शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करते हैं। आइए देखते हैं टोटल ख़बरें हैं कि वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना की इस विशेष रिपोर्ट

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