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बिल्डर माफ़िया नियम और क़ानून का किस तरह दुरुपयोग करते हैं। लोगों को अपने ही घरों का क़ब्ज़ा लेने के लिए विरोध प्रदर्शन करना पड़ता है और बिल्डर के ख़िलाफ़ प्रैस वार्ता करनी पड़ती है। जी हाँ मंच पर ये पाँच लोग जो कि बिल्डर माफ़िया से पीड़ित हैं। अपनी आपबीती सुनाते हुए। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पार्ट वन में एक बिल्डर किस तरह इलाक़े के लोगों को गुमराह कर उनके मकानों के निर्माण के नाम पर पहले तो उनके साथ एक एग्रीमेंट कर लेता है और उसके बाद अपने ही नियम शर्तों के अनुसार तय समय सीमा में लोगों को मकान का क़ब्ज़ा नहीं देता है। बुजुर्गों को गुमराह और परेशान कर खुलेआम शोषण कर रहा है। गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में ग्रेटर कैलाश पार्ट वन के एक बिल्डर के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलते हुए बिल्डर पर गंभीर आरोप लगाए। पीड़ितों के आरोपों के अनुसार बताया गया कि अर्थ्ज़ अर्बन स्पेसेस प्राइवेट लिमिटेड, जिसके CEO प्रलीन चोपड़ा हैं। बताया जाता है कि पहले बिल्डर मकान निर्माण के लिए एक एग्रीमेंट करता है उसके बाद तहत समय सीमा पर लोगों को मकानों का क़ब्ज़ा नहीं देता है। निर्माण में लगातार देरी और अधूरे काम के कारण वे लगभग चार साल से अपने ही घर से बाहर रहने को मजबूर हैं। उनके पास कोई जमा पूंजी नहीं बची। 82 वर्षीय मंजीत सिंह खुराना, उनके पुत्र गुरमीत खुराना और 75 वर्षीय वेद गिरधारी जो वरिष्ठ नागरिक हैं। पीड़ितों ने आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले 3 साल 6 महीने से अपने ही घर से बाहर रह रहे हैं। वे हर महीने ₹1.75 लाख किराया दे रहे हैं, बिल्डर के शोषण ने मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से तोड़ दिया है। 26 अक्टूबर को पीड़ित लोगों ने बिल्डर के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर अपना रोष प्रकट कर चुके हैं। पीड़ितों ने प्रैस वार्ता में अधूरे मकान निर्माण के कई वीडियो दिखाए। आरोप है कि बिल्डर मकान का निर्माण पूरा नहीं करवा रहा है। इस मकान के निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के चलते उन्हें क़ब्ज़ा देने में आनाकानी करी जा रही है। वह बिल्डर के पास कई बार बार जाकर परेशान हो चुके हैं। आइए देखते हैं टोटल ख़बरें के वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना की रिपोर्ट में।

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