दिल्ली के हर 10 में से 1 सरकारी स्कूल की इमारत खतरनाक; जर्जर भवनों और बदहाल शिक्षा व्यवस्था के लिए BJP और AAP दोनों जिम्मेदार: देवेंद्र यादव

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नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेंद्र यादव ने राजधानी की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर वर्तमान भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार और पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (AAP) की केजरीवाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के हर दस में से एक सरकारी स्कूल की इमारत आज असुरक्षित और खतरनाक हालत में पहुंच चुकी है। इसके लिए पिछले 11 वर्षों तक दिल्ली की सत्ता में रही आम आदमी पार्टी की सरकार और पिछले डेढ़ साल से सत्ता संभाल रही भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार दोनों बराबर की जिम्मेदार हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर दोनों ही पार्टियों का रवैया पूरी तरह से असंवेदनशील रहा है।

108 स्कूलों की जांच में खुली पोल, 54 इमारतों को गिराने के आदेश

कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली सरकार के अधीन कुल 1,270 स्कूल हैं, जिनमें 799 सरकारी और 471 सहायता प्राप्त (गवर्नमेंट एडेड) स्कूल शामिल हैं। हाल ही में हुई एक जांच में 108 स्कूली इमारतों की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई है, जिनमें से 54 इमारतों को तुरंत गिराने के आदेश दिए गए हैं। श्री यादव ने आरोप लगाया कि जहां आम आदमी पार्टी ने नए स्कूल बनाने के नाम पर केवल पुराने कमरों की लिपाई-पोताई कर भ्रष्टाचार किया, वहीं अब भाजपा सरकार भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह उदासीन बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि 3-4 साल पहले बने नए स्कूलों के टूटने के पीछे के भ्रष्टाचार की सीएजी (CAG) रिपोर्ट को आधार बनाकर सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए।

वादे हवा-हवाई, 6 महीनों में शिक्षा विभाग के बयानों में विरोधाभास

देवेंद्र यादव ने भाजपा की दिल्ली सरकार को घेरते हुए पूछा कि दो शिफ्टों में चल रहे 284 स्कूलों को सिंगल शिफ्ट में करने और हर साल 10 नए स्कूल बनाने के वादे का क्या हुआ? उन्होंने कहा, “जनवरी में शिक्षा निदेशालय ने 284 स्कूलों को एक शिफ्ट में करने के लिए 70 खाली प्लॉट चिन्हित किए थे, लेकिन अब केवल 27 खाली प्लॉटों पर ही स्कूल बनाने का प्रस्ताव लाया जा रहा है। आखिर महज 6 महीनों में एक ही विभाग के दावों में इतना विरोधाभास कैसे आ गया?” उन्होंने याद दिलाया कि साल 2013 में कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार ने दिल्ली में 1000 नई जगहों पर सरकारी स्कूल बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन आज की सरकारों में वह संवेदनशीलता गायब है।

सरकारी स्कूलों में घटा एनरोलमेंट, प्राइवेट स्कूलों को मिल रहा बढ़ावा

दिल्ली इकोनॉमिक सर्वे (2025-26) के आंकड़ों को रेखांकित करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली में जनसंख्या बढ़ने के बावजूद सरकारी स्कूलों में छात्रों के दाखिले (Enrollment) में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

  • वर्ष 2024-25 में दिल्ली के कुल स्कूली छात्रों में से 39.75 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे।
  • वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर मात्र 22.85 प्रतिशत रह गया है।
  • दूसरी ओर, दिल्ली में अब 5,556 मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें 44.91 लाख छात्र पढ़ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सरकारी स्कूलों की अनदेखी कर प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना ही पूर्ववर्ती ‘आप’ और वर्तमान ‘भाजपा’ सरकार की मुख्य प्राथमिकता रही है।

बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता दे सरकार

देवेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा मंत्री जहाँ हर कक्षा को आधुनिक और डिजिटल बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि बच्चों के पास बैठने के लिए सुरक्षित छत तक नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इतनी बड़ी संख्या में जर्जर इमारतों को गिराने से पहले वहां पढ़ने वाले गरीब बच्चों की वैकल्पिक पढ़ाई की पुख्ता और व्यवस्थित व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो और किसी भी संभावित बड़ी दुर्घटना को समय रहते टाला जा सके।

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