नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर समयपुर बादली थाने के पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रसारित की जा रही एक वीडियो और खबरों पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो में लगाए गए जबरन घर में घुसने, गाली-गलौज और दुर्व्यवहार के सभी आरोप पूरी तरह से निराधार और असत्य हैं। पुलिस की यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर एक आपराधिक मामले की जांच के सिलसिले में की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला समयपुर बादली थाने में दर्ज FIR No. 492/2026 (धारा 110/115(2)/3(5) BNS) से जुड़ा हुआ है। यह एफआईआर बीती 10 जून 2026 को हुई एक मारपीट की घटना के संबंध में दर्ज की गई थी, जिसमें सचिन, जीतू, भारत और चिंता देवी को आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए माननीय न्यायालय में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी दाखिल की थी, जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। पुलिस इस मामले में एक आरोपी जीतू को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
फरार आरोपियों के घर दी गई थी दबिश
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, सोशल मीडिया पर आरोप लगाने वाली महिला कोई पीड़ित नहीं, बल्कि मामले के मुख्य फरार आरोपी सचिन और भारत की सगी बहन है। पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि फरार आरोपी अपने घर पर मौजूद हो सकते हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिसकर्मी नियमानुसार उन्हें पकड़ने के लिए उनके आवास पर पहुंचे थे।
पुलिस ने नहीं किया दुर्व्यवहार; घर के बाहर चिपकाया गया नोटिस
जांच टीम के वहां पहुंचने पर आरोपी घर पर मौजूद नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए घर के बाहर धारा 35(3) BNSS के तहत कोर्ट का नोटिस चस्पा (अफ़िक्स) कर दिया।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध तथ्यों और सबूतों के अनुसार, कोई भी पुलिसकर्मी घर के भीतर दाखिल नहीं हुआ था। अतः महिला द्वारा पुलिस पर लगाए गए जबरन घुसने, गाली-गलौज, धमकी देने या किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और पुलिस के पास मौजूद साक्ष्यों से इनकी पुष्टि नहीं होती है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि उनकी यह कार्रवाई पूरी तरह से कानून सम्मत और मामले की निष्पक्ष जांच का हिस्सा थी। पुलिस ने जनता से सोशल मीडिया पर बिना जांचे-परखे साझा की जा रही भ्रामक खबरों और वीडियो पर विश्वास न करने की अपील की है।












