अनुराग गुप्ता, ‘फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ़ इंडिया’ (FDCI) के साथ साझेदारी में, लैक्मे फैशन वीक में ‘आर्टिसनल’ (Artisanal) के ज़रिए बिस्कोहर की कहानियों को रनवे पर लेकर आए हैं

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*उत्तर प्रदेश में स्थित डिज़ाइनर के गृह-नगर से प्रेरित यह कलेक्शन, जलकुंभी (water hyacinth) को एक ऐसी कलाकृति में बदल देता है जो महिलाओं के लिए सम्मान और आजीविका के नए विकल्पों का द्वार खोलती है।
फैशन, कारीगरी और सामाजिक बदलाव के प्रति गहरी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को एक साथ लाते हुए, डिज़ाइनर अनुराग गुप्ता ने नई दिल्ली के ताज पैलेस में FDCI के साथ साझेदारी में आयोजित ‘लैक्मे फैशन वीक’ (Lakmē Fashion Week) में अपना नवीनतम कलेक्शन ‘आर्टिसनल’ (Artisanal) पेश किया। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के ‘बिस्कोहर’ गाँव – जहाँ डिज़ाइनर पले-बढ़े हैं – से प्रेरित इस कलेक्शन ने उन महिलाओं के जीवन की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनकी आर्थिक परिस्थितियों और आजीविका के सीमित अवसरों ने उन्हें ऐतिहासिक रूप से ‘सेक्स वर्क’ (यौन व्यापार) पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया है। अनोखी सामग्रियों, पारंपरिक कारीगरी तकनीकों और आधुनिक डिज़ाइनों के इस्तेमाल के ज़रिए, यह कलेक्शन फैशन को एक ऐसे मंच के रूप में पेश करता है जो सार्थक बातचीत, सम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है।
‘आर्टिसनल’ कलेक्शन के केंद्र में ‘जलकुंभी’ (water hyacinth) थी – एक ऐसा जलीय पौधा जिसे आमतौर पर पर्यावरण के लिए हानिकारक या परेशानी पैदा करने वाला माना जाता है। इस नज़रअंदाज़ किए गए प्राकृतिक संसाधन को एक नए रूप में देखते हुए, अनुराग गुप्ता ने इसे एक ऐसी सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे बिस्कोहर की महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इस पौधे को इकट्ठा करके, सुखाकर और प्रोसेस करके, इसके रेशों से मज़बूत कपड़े और हाथ से बनी चीज़ें तैयार की जा सकती हैं। इस कलेक्शन ने सामग्री के साथ किए गए इन प्रयोगों को एक विशिष्ट डिज़ाइन भाषा में ढाला, जिसमें बेहतरीन सिलाई, बुनावट और सतह पर की गई विशेष कारीगरी का संगम देखने को मिला। अपनी बनावट, परतों वाली संरचना और बारीकियों के ज़रिए, इन कपड़ों ने प्राकृतिक सामग्रियों, आधुनिक डिज़ाइन और मानवीय कौशल के बीच के गहरे रिश्ते को दर्शाया।

इस शोकेस में ‘प्रोजेक्ट बिस्कोहर’ पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। ‘लेबल अनुराग गुप्ता’ की इस पहल का उद्देश्य शिल्प-आधारित रोज़गार के ज़रिए आजीविका के वैकल्पिक अवसर पैदा करना है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ‘जलकुंभी’ (water hyacinth) को बाज़ार में बिकने वाले उत्पादों में बदलने के विचार पर आधारित इस प्रोजेक्ट में महिलाओं के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण, उचित पारिश्रमिक और घर से काम करके कमाने के अवसर शामिल हैं। इसके 30-दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का लक्ष्य 30 महिलाओं के एक शुरुआती समूह को कटाई, प्रोसेसिंग, बुनाई और उत्पाद विकास का कौशल सिखाना है, साथ ही सीखने की अवधि के दौरान उन्हें स्टाइपेंड (भत्ता) भी दिया जाएगा। ‘अर्थोमैडिक फाउंडेशन’ (Earthomadic Foundation) के सहयोग से, यह पहल पारंपरिक शिल्प ज्ञान को डिज़ाइन, उत्पादन और बाज़ार तक पहुँच से जोड़ती है, जिससे निरंतर आय और बेहतर आर्थिक स्वतंत्रता का रास्ता खुलता है। यह कलेक्शन एक बड़े उद्देश्य के साथ अपनी जड़ों की ओर लौटने जैसा था। बिस्कोहर की महिलाओं को केवल कमज़ोर या असहाय दिखाने के बजाय, ‘आर्टिसनल’ (Artisanal) ने उनके कौशल, मज़बूती और सपनों को अपनी कहानी के केंद्र में रखा। इस कलेक्शन ने दिखाया कि कैसे एक ऐसी चीज़, जिसे अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उसे मूल्यवान उत्पाद में बदला जा सकता है। यह उन मौकों को पहचानने के महत्व को भी दर्शाता है, जिन्हें लंबे समय से अनदेखा किया जाता रहा है। शिल्प कौशल और सामग्री के सोच-समझकर किए गए नवाचार पर ज़ोर देते हुए, इस शोकेस ने इस विश्वास को मज़बूत किया कि फ़ैशन केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवसर, चुनाव और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव के बारे में बातचीत को भी बढ़ावा दे सकता है।

इस कलेक्शन की प्रेरणा और ‘प्रोजेक्ट बिस्कोहर’ के लिए अपने विज़न के बारे में बात करते हुए, डिज़ाइनर अनुराग गुप्ता ने कहा, “बिस्कोहर वह जगह है जहाँ से मैं आता हूँ, और यह कलेक्शन मेरे लिए बहुत निजी है। वहाँ बड़े होते हुए, मैंने उन महिलाओं की हकीकत देखी है, जिनके पास आजीविका के लिए कोई दूसरा विकल्प चुनने के बहुत कम मौके थे। ‘आर्टिसनल’ के ज़रिए, मैं उन वास्तविकताओं की ओर ध्यान दिलाना चाहता था, लेकिन इन महिलाओं को केवल उनकी परिस्थितियों के आधार पर परिभाषित नहीं करना चाहता था। मेरा विचार यह खोजना था कि कैसे जलकुंभी जैसी अनदेखी चीज़, शिल्प, आय और स्वतंत्रता का स्रोत बन सकती है। हम यहाँ उनकी ओर से बोलने या उनका भविष्य तय करने के लिए नहीं हैं, बल्कि ऐसे अवसर बनाने में मदद करना चाहते हैं, जिससे वे अपने लिए खुद फ़ैसले ले सकें।” इस कहानी को रैंप तक लाना एक महत्वपूर्ण शुरुआत है, और मुझे उम्मीद है कि यह आगे चलकर कुछ ऐसा रूप लेगी जो एक सार्थक और स्थायी बदलाव ला सके।

‘आर्टिसनल’ (Artisanal) के ज़रिए, अनुराग गुप्ता ने एक ऐसा कलेक्शन पेश किया जो रनवे से कहीं आगे तक जाता है। इसमें उनके गृहनगर की कहानियाँ, सामग्री में नवाचार की संभावनाएँ और बेहतर आर्थिक अवसरों का एक विज़न शामिल है। बिस्कोहर की महिलाओं और उनकी आकांक्षाओं को इस कहानी के केंद्र में रखकर, यह शो याद दिलाता है कि फ़ैशन का प्रभाव केवल पहने जाने वाले कपड़ों तक सीमित नहीं है; यह नए कौशल, आत्मनिर्भर आजीविका और व्यक्तिगत पसंद के आधार पर भविष्य गढ़ने के लिए एक मंच तैयार करता है।

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