*यह आयोजन फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ़ इंडिया (FDCI) के साथ साझेदारी में किया गया है।
*उभरती फैशन प्रतिभाओं, छह शिल्पों और उनके कुशल कारीगरों को एक साथ लाते हुए, फर्स्ट कट ने एक नए भारतीय लुक की खोज की।
*यह लुक भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं के समकालीन दृष्टिकोण से आकार लेता है।
भारत के एआई-आधारित डिज़ाइन संस्थान, पर्ल अकादमी के फैशन डिज़ाइन और स्टाइलिंग के छात्रों ने फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (एफडीसीआई) और पर्ल अकादमी द्वारा आयोजित एक मंच, फर्स्ट कट में ‘जेनअनोखी: इंडिया, वोर्न योर वे’ प्रस्तुत किया, जो उभरती प्रतिभाओं को उद्योग के सामने लाता है। इस वर्ष के शोकेस में यह दिखाया गया कि कैसे एक नई पीढ़ी समकालीन भारतीय पहचान को व्यक्त करने के लिए फैशन को एक भाषा के रूप में उपयोग करती है।
जेनअनोखी, जिसका अर्थ है अद्वितीय या विशिष्ट, एक ऐसी पीढ़ी की बात करता है जो विरासत और वैश्विक प्रभावों के बीच सहजता से आगे बढ़ती है, और दोनों को अपनी शैली में नया रूप देती है। इन संग्रहों में यह सवाल उठाया गया कि भारतीय पहचान को किस प्रकार से
पुनर्परिभाषित, रीमिक्स और अलग-अलग ढंग से पहना जा सकता है, जिसमें समकालीन सिल्हूट और प्रयोगात्मक स्टाइल को
पारंपरिक शिल्प कला और नए सिरे से तैयार किए गए वस्त्रों के साथ मिलाकर ऐसे परिधान बनाए गए हैं जो अपनी जड़ों से जुड़े होने के साथ-साथ व्यक्तिगत भी लगते हैं।
फर्स्ट कट प्रस्तुति में छह कारीगर शामिल हुए, जिन्होंने चारपाई
बुनाई, जरदोजी कढ़ाई, हथकरघा ऊन बुनाई, ब्लॉक प्रिंटिंग, गोटा पत्ती और टैसल वर्क, और
चरखा कताई सहित पारंपरिक शिल्प और तकनीकों का प्रतिनिधित्व किया।

पर्ल एकेडमी की अध्यक्ष अदिति श्रीवास्तव ने कहा, “आज भारत एक सांस्कृतिक मोड़ पर खड़ा है। एक नई पीढ़ी यह नए सिरे से तय कर रही है कि कपड़े पहनने, किसी समूह का हिस्सा बनने और अपनी पहचान जाहिर करने का क्या मतलब है। भारतीय ‘जेन जेड’ (Gen Z) के लिए, ‘नया लुक’ किसी एक खास तरह की बनावट, शरीर के किसी एक आदर्श ढांचे या सुंदरता के किसी तय पैमाने तक सीमित नहीं है। यह लचीला, स्थानीय, मिश्रित, जागरूक और पूरी तरह से व्यक्तिगत है। परिसरों, सड़कों, स्टूडियो, डिजिटल संस्कृति और क्षेत्रीय समुदायों में, ‘जेन जेड’ एक ऐसी विज़ुअल भाषा (दृश्य भाषा) तैयार कर रही है, जो अपनी जड़ों से भी जुड़ी है और साथ ही लीक से हटकर भी है। अब शिल्प (craft) को केवल पुरानी यादों से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि यह एक नज़रिया, बनावट, ढांचा और एक बयान बन गया है। फैशन अब केवल शरीर को कपड़े पहनाने तक सीमित नहीं है। यह एक भाषा बन गया है—अपनी पहचान, संस्कृति, मूल्यों और इस ग्रह के साथ हमारे संबंधों को व्यक्त करने का एक ज़रिया। पर्ल एकेडमी में, प्रयोग करने, नई खोज करने और ज़िम्मेदारी के साथ डिज़ाइन तैयार करने की संस्कृति के ज़रिए यह भावना जीवंत होती है। इससे अगली पीढ़ी को भारत की बदलती फैशन भाषा को आकार देने का सशक्त माध्यम मिलता है।”
इस सहयोग और अवसर पर बात करते हुए, फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ़ इंडिया (FDCI) के चेयरमैन सुनील सेठी ने कहा, “पर्ल एकेडमी का ‘फर्स्ट कट’ उभरते हुए डिज़ाइनरों के लिए इंडस्ट्री का अनुभव पाने का एक अहम मंच रहा है। वहीं, ‘जेन अनोखी’ (GenAnokhi) पारंपरिक शिल्प कौशल को आज के नज़रिए के साथ मिलाकर भारतीय फैशन की एक दिलचस्प व्याख्या पेश करता है। फैशन और स्टाइल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। मुझे डॉ. शरद मेहरा की किताब ‘द अल्टीमेट स्टाइलिंग गाइड फॉर मॉडर्न मेन’ का इंतज़ार है, जो आधुनिक स्टाइलिंग के बारे में बेहतरीन जानकारी देने का वादा करती है।”

इस कार्यक्रम में डॉ. शरद मेहरा, चेयरमैन, पर्ल एकेडमी द्वारा लिखित और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित पुस्तक “द अल्टीमेट स्टाइलिंग गाइड फॉर मॉडर्न मेन” का विमोचन भी हुआ।
यह पुस्तक क्षणिक फैशन रुझानों से परे जाकर बताती है कि कैसे फिटिंग, व्यक्तिगत शैली, शरीर का अनुपात, रंग और वार्डरोब की आवश्यक वस्तुएं पुरुषों को रोजमर्रा के पहनावे और आत्म-अभिव्यक्ति के प्रति अधिक सजग दृष्टिकोण विकसित करने में मदद कर सकती हैं।
प्राचीन तकनीक को आधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़कर, फर्स्ट कट विरासत और नवाचार के बीच एक महत्वपूर्ण मिलन बिंदु के रूप में कार्य करना जारी रखता है।
जेन अनौखी इस बात पर जोर देती हैं कि जेन Z फैशन के प्रति किस तरह का व्यापक दृष्टिकोण अपना रही है: क्षणिक रुझानों से दूर होकर व्यक्तिगत पहचान, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सीमाओं को तोड़ने वाले प्रयोगों की ओर बढ़ना।











