*भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधते हुए बोले राहुल- आदिवासियों को वनवासी कहकर जंगलों तक सीमित रखने का प्रयास किया जा रहा
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने वायनाड दौरे के अपने दूसरे दिन डॉ. अंबेडकर डिस्ट्रिक्ट मेमोरियल कैंसर सेंटर में एचटी कनेक्शन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को भी संबोधित किया।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि अस्पताल में बिजली कटौती होती थी, जिससे मरीजों और डॉक्टरों को असुविधा होती थी। उन्हें उम्मीद है कि यह नई बिजली लाइन इस समस्या को खत्म कर देगी। इसे संभव बनाने के लिए सांसद निधि से 50 लाख का योगदान देकर उन्हें खुशी हो रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें वायनाड आकर बहुत खुशी होती है। जब उन्हें संसद से अयोग्य घोषित किया गया था तो वायनाड की पूरी जनता ने उनका साथ दिया जा। वह वायनाड के सभी लोगों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश में इस समय दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई है। हम आपको आदिवासी मानते हैं, यानी इस देश के असली हकदार। हमारे आदिवासी भाई-बहन इस देश के मूल मालिक हैं। इस जमीन के असली मालिक के रूप में आपको अपने बच्चों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने, डॉक्टर और वकील बनाने, व्यवसाय शुरू कराने में सक्षम होना चाहिए। इसके साथ ही आपको जमीन और जंगल पर अधिकार मिलना चाहिए। जंगल की जो उपज होती है, उस पर आपको अधिकार मिलना चाहिए।
राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरी तरफ जो विचारधारा है वो आपको आदिवासी नहीं, वनवासी कहकर बुलाती है। वे लोग आपको देश का असली मालिक नहीं मानते हैं। वनवासी शब्द इस बात से इनकार करता है कि आप इस देश के असली हकदार हैं। यह आपको जंगल तक ही सीमित रखता है।आदिवासियों को वनवासी कहकर जंगलों तक सीमित रखने का प्रयास किया जा रहा है। यह हमें स्वीकार्य नहीं है।
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा समय में पर्यावरण शब्द फैशन में आ गया है। कुछ सौ सालों से आधुनिक समाज पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। जंगल जलाए जा रहे हैं और प्रदूषण फैल रहा है। अब अचानक से पर्यावरण संरक्षण की बातें होने लगी हैं। यहां पर आदिवासियों की समझदारी देखनी चाहिए। आदिवासी पिछले पांच हजार साल से पर्यावरण संरक्षण की बात कर रहे हैं। आदिवासियों के इतिहास, परंपरा, जिंदगी जीने के तरीके से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। आदिवासियों से सिर्फ पर्यावरण के बारे में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ कैसे व्यवहार करें, एक-दूसरे का सम्मान कैसे करें यह भी सीखा जा सकता है।


