- एलजी ऑफिस लगातार झूठा बयान जारी कर रहा है कि आशा किरण होम के अधिकारियों की नियुक्ति साल 2020 में हुई थी- कुलदीप कुमार
- सच ये है कि मई 2022 में वीके सक्सेना एलजी बने और 04 अक्टूबर 2022 को 5 साल निलंबित रहे अफसर को प्रशासक बनाया- कुलदीप कुमार
- मंत्री के कहने के बाद भी एलजी साहब ने सरकारी अस्पतालों, मोहल्ला क्लीनिकों और शेल्टर होम में डॉक्टर समेत अन्य स्टाफ की भर्ती नहीं की है- कुलदीप कुमार
- याचिका समिति आशा किरण में खाली पदों को भरने और मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए एलजी को पत्र लिखेगी- कुलदीप कुमार
- दिल्ली विधानसभा की याचिका समिति ने शनिवार को आशा किरण होम का दौरा करने के बाद सोमवार को उसके अधिकारियों के साथ बैठक की
दिल्ली विधानसभा की याचिका समिति ने आशा किरण शेल्टर होम को लेकर सोमवार को बड़ा खुलासा किया। पिछले कुछ दिनों में होम में रहने वाले कई लोगों की हुई मौतों की जांच कर रही याचिका समिति का कहना है कि एलजी वीके सक्सेना के अधीन ही )दिल्ली सरकार के मंत्री से बिना सुझाव लिए ही ) एक भ्रष्ट अफसर को आशा किरण होम का प्रशासक नियुक्त कर दिया। समिति के चेयरमैन कुलदीप कुमार ने एलजी ऑफिस के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि आशा किरण होम के अधिकारियों की नियुक्ति साल 2020 में हुई थी। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया है कि मई 2022 में वीके सक्सेना दिल्ली के एलजी बने थे और 04 अक्टूबर 2022 को उन्होंने रिश्वत लेने के मामले में 5 साल तक निलंबित रहे अफसर को इस होम का प्रशासक बनाया। याचिका समिति आशा किरण में खाली पदों को तत्काल भरने और उसमें हुई मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए एलजी साहब को पत्र लिखेगी।
दिल्ली विधानसभा की याचिका समिति के चेयरमैन एवं ‘‘आप’’ विधायक कुलदीप कुमार ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर आशा किरण होम में हुई कई लोगों की मौतों की जांच में आए तथ्यों को जनता के सामने रखा। इस दौरान समिति के सदस्य व विधायक राजकुमारी ढिल्लन, भूपेंद्र सिंह जून, जय भगवान उपकार, हाजी यूसूफ भी मौजूद रहे। चेयरमैन कुलदीप कुमार ने बताया कि दिल्ली विधानसभा की याचिका समिति ने शनिवार को आशा किरण शेल्टर होम का दौरा करने के बाद सोमवार को दिल्ली विधानसभा में शेल्टर होम के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। बैठक में अधिकारियों से शेल्टर होम में हुई इस घटना के कारणों की जानकारी ली गई।
उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल की ओर से लगातार एक झूठा बयान जारी किया जा रहा था कि वे अधिकारी दो दिन से कह रहे हैं कि उनकी नियुक्ति 2020 में की गई थी। जबकि इस बैठक में अधिकारियों से मिले आंकड़ों से पता चला है कि 04 अक्टूबर 2022 को शेल्टर होम के प्रशासक की नियुक्ति की गई थी। वहीं, इससे पहले मई 2022 में वीके सक्सेना दिल्ली के एलजी बने थे। आशा किरण शेल्टर होम में प्रशासक की यह नियुक्ति दिल्ली सरकार के किसी मंत्री के सुझाव के बिना की गई थी। वह फाइल किसी मंत्री को नहीं भेजी गई। इसलिए सवाल उठता है कि एलजी साहब ने फिर एक ऐसे अफसर को जो 5 साल तक सस्पेंड था और उस पर 2016 में सीबीआई का केस दर्ज था, उसको इतने बड़े शेल्टर होम की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी?
कुलदीप कुमार ने बताया कि हमें अफसरों से पता चला है कि आशा किरण शेल्टर होम में स्टाफ की भारी कमी है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने एलजी पदों की भर्तियों के लिए लगातार एलजी साहब को पत्र लिखा है कि वे दिल्ली के अस्पतालों, मोहल्ला क्लीनिक और शेल्टर होम में डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ और एएनएम की तुरंत भर्ती करें। लेकिन एलजी साहब ने आज तक कोई नियुक्ति नहीं की। दिल्ली में आज कई डॉक्टर्स, एनओ, हाउस आंटी, नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम, किचन हेल्पर, कुक, वॉशरमैन, मेडिकल स्पेशलिस्ट, जीडीएमओ, जूनियर स्पेशलिस्ट, ड्रेसर समेत कई पद खाली पड़े हैं। हमारी मांग है कि एलजी साहब तुरंत इन पदों को भरें।
कुलदीप कुमार ने बताया कि दिल्ली विधानसभा की याचिका समिति एलजी को पत्र लिखेगी कि वे तत्काल प्रभाव से इन खाली पदों को भरने का काम करें। एलजी साहब को यह भी बताना होगा कि इस घटना के तीन दिन बीतने के बाद भी उन्होंने उस विभाग के अधिकारियों के ऊपर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? वे उन अधिकारियों को बचाने का काम क्यों कर रहे हैं? याचिका समिति की मांग है कि वे तुरंत इन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करें, जिनकी लापरवाही के कारण ये मौतें हुई हैं।
कुलदीप कुमार ने आगे बताया कि याचिका समिति के संज्ञान में यह भी आया है कि इस शेल्टर होम में लगभग 33 एएनएम और 2 जीडीएमओ के ऐसे पद हैं, जिनका मार्च और अप्रैल से कॉन्ट्रेक्ट रीन्यू नहीं किया गया है। इसलिए उन लोगों की 6 महीने की सैलरी तुरंत जारी की जाए और उनका कॉन्ट्रेक्ट रीन्यू किया जाए। क्योंकि एएनएम वहां लोगों की देखभाल करती हैं। इसलिए एलजी साहब को तुरंत उनका सैलरी जारी करनी चाहिए। हम एलजी साहब को इसके लिए पत्र लिखेंगे, ताकि वे जल्द इस पदों को भरने का काम करें। समिति इस मामले में और अधिकारियों को बुलाकर इसकी जांच करेगी। दिल्ली में सर्विसेज एलजी के अधीन हैं। इसलिए अधिकारियों का ट्रांसफर पोस्टिंग की जिम्मेदारी उनकी है। वो अपनी जिम्मेदारी से न भागें।



