भारतीय बीज उद्योग ने वैश्विक बीज व्यापार में भारत की हिस्सेदारी को 1% से बढ़ाकर 2035 तक 10% करने का लक्ष्य रखा है। फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (F S I I) ने अपनी 10वीं वार्षिक आम बैठक के तहत आयोजित नॉलेज डे 2026 में यह बात कही।
(F S I I) ने कहा कि वर्तमान में 3.6 बिलियन डॉलर का यह उद्योग 2030 तक 5 बिलियन डॉलर को पार कर जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भरता के विजन के अनुरूप तिलहन और दलहन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
(F S I I) के चेयरमैन और सवाना सीड्स के MD & CEO अजय राणा* ने कहा, “भारत के पास विज्ञान, प्रतिभा और किसान हैं जो इसे वैश्विक बाजार में बड़ा खिलाड़ी बना सकते हैं। उद्योग तिलहन और दलहन में अनुसंधान में अधिक निवेश के लिए तैयार है।”
उन्होंने बीज नियमन के लिए एकल राष्ट्रीय फ्रेमवर्क, नई किस्मों के लिए तेज वैज्ञानिक मंजूरी और बौद्धिक संपदा की मजबूत सुरक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि R & D पर खर्च किए गए हर एक रुपये पर 13 रुपये का रिटर्न मिलता है।
राणा ने कहा कि सरकार और उद्योग मिलकर 10 साल से कम में खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता हासिल कर सकते हैं। सरसों के हाइब्रिड बीजों से किसानों को प्रति एकड़ 1 टन तक पैदावार मिल रही है।
प्रगतिशील किसान किशोर जायसवाल और विशेषज्ञों ने बताया कि 93% सब्जी किसान हाइब्रिड बीजों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे 2.7 गुना ROI और 85% किसानों ने फसल में बेहतर मजबूती देखी है।




