एक तरफ राजधानी दिल्ली में बड़े-बड़े मंचों पर अनुभवी कलाकारों और अभिनेता-अभिनेत्रियों द्वारा भव्य रामलीला के मंचन का आयोजन किया गया, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के रोहिणी स्थित आस्था कुंज सोसायटी ने सादगी और भक्ति का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। ये तस्वीर आप जो रामलीला के किरदारों की देख रहे हैं। ये दरअसल ये कलाकार नहीं हैं। यहां न तो बड़े कलाकार थे, न ही भव्य मंच और न ही लाखों का रामलीला मंचन का सेट था। ये सभी यहाँ के स्थानीय निवासियों ने ही मिलकर रामलीला का मंचन किया। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने श्री राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण और अन्य रामलीला के किरदारो की भूमिकाएं निभाईं। मात्र तीन घंटे में संपूर्ण रामलीला का मंचन संपन्न हुआ, जिसे देखने के लिए सोसायटी के सैकड़ों निवासी एकत्र हुए।
अंत में परंपरागत रूप से रावण दहन किया गया। रावण के पुतले के जलते ही पूरा परिसर “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।
सोसायटी की प्रधान बिन्दु श्री राम ने बताया कि इस वर्ष सोसायटी का दूसरा दशहरा महोत्सव मनाया गया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने सभी निवासियों के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। सोसायटी के निवासियों ने इसे एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन बताया। देखते हैं टोटल ख़बरें के वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना की एक्सक्लूसिव इंटरव्यू रिपोर्ट में और यहाँ के लोगो से ख़ास बातचीत की यह रिपोर्ट में।
2026-10-21








