दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने फर्जी जीएसटी इनवॉइसिंग और फर्जी फर्मों के माध्यम से सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को दिल्ली एनसीआर के विभिन्न इलाकों से गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों के नाम दिलीप कुमार, राज कुमार दीक्षित , अमर कुमार , विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद बताया गया है। पुलिस के अनुसार लगभग 128 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी लेनदेन का खुलासा हुआ है, जिसके जरिए आरोपियों ने करीब 10 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट अवैध रूप से प्राप्त किया। बताया जाता है कि फर्जी फर्म और फर्जी जीएसटी बिलिंग रैकेट चलाने के आरोप में पुलिस ने 6 आरोपी गिरफ्तार किये हैं। बताया जाता है कि लगभग 128 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी लेनदेन का पता चला। जांच में सामने आया कि फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी जीएसटी रिटर्न, फर्जी बिलिंग और गलत ITC क्लेम किया जा रहा था। अब तक 50 शेल कंपनियों की पहचान हुई है जिनका इस्तेमाल नकद लेनदेन के बदले पैसा रूट करने और फर्जी जीएसटी एंट्री के लिए किया जा रहा था। गिरोह से जुड़े अन्य लाभार्थियों और कंपनियों की पहचान के लिए जांच जारी है। बताया जाता है कि
24 मार्च को थाना EOW में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, एक भोले भाले व्यक्ति को जीएसटी विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर सितंबर 2025 में ‘मैसर्स आर.के. एंटरप्राइजेज’ नाम से फर्जी प्रोपराइटरशिप फर्म बनाई गई। बताया जाता है कि तकनीकी निगरानी, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, ईमेल आईडी और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला कि आरोपी दिलीप कुमार और राज कुमार दीक्षित इस फर्जीवाड़े के मुख्य साजिशकर्ता थे। आरोपी अमर कुमार और विभाष कुमार मित्रा ने फर्जी कंपनियों के संचालन में मदद की, जबकि आरोपी नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद ने बैंक खाते और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी देकर फर्जी लेनदेन में सहयोग किया।
एसीपी वीरेंद्र कादयान के नेतृत्व में इंस्पेक्टर रामकेश, इंस्पेक्टर किशनवीर, एसआई नवीन (आईओ), एसआई दीपेश और एसआई राहुल की टीमों ने 15 मई को दिल्ली एनसीआर में समन्वित छापेमारी कर राज कुमार दीक्षित, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को गिरफ्तार किया। गिरोह जाली दस्तावेजों से फर्जी फर्म बनाकर बिना माल/सेवा की आपूर्ति के फर्जी जीएसटी इनवॉइस जारी करता था। इन फर्मों के जरिए बैंकिंग चैनल से एंट्री देकर नकदी के बदले पैसा रूट किया जाता था, फर्जी जीएसटी रिटर्न दाखिल किए जाते थे और गलत तरीके से ITC का लाभ लिया/दिलाया जाता था। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। राज कुमार दीक्षित (43), निवासी दरियागंज, दिल्ली – मास्टरमाइंड। 9वीं पास होने के बावजूद दरियागंज से लगभग 250 शेल कंपनियां चलाकर फर्जी बिलिंग रैकेट संचालित करता था।
विभाष कुमार मित्रा (34), निवासी वसुंधरा, गाजियाबाद सीए की पढ़ाई अधूरी छोड़कर अकाउंटिंग में आया। फर्जी फर्मों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन और फर्जी बिलिंग करता था। अमर कुमार (35), निवासी मथुरा विभाष के साथ मिलकर करीब 200 शेल फर्म बनाईं। नितिन वर्मा (43), निवासी शाहदरा छोटे कारोबार से फर्जीवाड़े में आया। बिना माल आपूर्ति के फर्जी बिलिंग करता था। मोहम्मद वसीम (30), निवासी जामा मस्जिद फर्जी फर्मों के बैंक खाते संचालित कर फंड रूट करता था।
आबिद, निवासी ऊंचा चल्लन, दिल्ली मीट सप्लाई का काम करने वाला अशिक्षित आरोपी। 4 बैंक खाते उपलब्ध कराए जिनसे शेल कंपनियों के जरिए पैसा घुमाया गया। आइए देखते हैं टोटल खबरें के वरिष्ठ संवाददाता राजेश खन्ना की इस रिपोर्ट में
फ़िलहाल पुलिस ने आरोपियों के क़ब्ज़े से 51.12 लाख नकद, आर.के. एंटरप्राइजेज के नाम की मुहरें व जाली दस्तावेज, बड़ी संख्या में फिजिकल व डिजिटल फर्जी इनवॉइस, 15 मोबाइल, कई सिम कार्ड, 2 लैपटॉप जिनमें फर्जी जीएसटी डेटा और 2 कार बरामद करी है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। टोटल खबरें दिल्ली से राजेश खन्ना की विशेष रिपोर्ट।


