FDCI के साथ साझेदारी में आयोजित लैक्मे फैशन वीक में, अली फज़ल तरुण तहिलियानी के ब्रांड ‘तस्वा’ (Tasva) के लिए शोस्टॉपर बने

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*पारंपरिक शिल्पकारी और आधुनिक अवसर-विशेष परिधानों (ऑकेज़न-वियर) के संगम का जश्न मनाते हुए, इस शो में अभिनेता अली फ़ज़ल ‘शोस्टॉपर’ के रूप में नज़र आए। उन्होंने रैंप पर भारतीय शालीनता को एक समकालीन अंदाज़ में पेश किया।
भारतीय शिल्पकारी की समृद्धि और खास मौकों के लिए आधुनिक पहनावे के दृष्टिकोण को एक साथ लाते हुए, तरुण तहिलियानी के ब्रांड ‘तस्वा’ (Tasva) ने नई दिल्ली के ताज पैलेस में FDCI के साथ साझेदारी में, लैक्मे फैशन वीक (Lakmē Fashion Week) में अपना नवीनतम पुरुष परिधान (मेन्सवियर) कलेक्शन पेश किया। आधुनिक कट-डिज़ाइन, बारीक काम और बेहतरीन रंगों के ज़रिए पारंपरिक पुरुष परिधानों को एक नया रूप देते हुए, इस शो ने आधुनिक भारतीय दूल्हे की अपनी अलग पहचान और बदलती फैशन पसंद को बखूबी दर्शाया। शो के दौरान, अभिनेता अली फ़ज़ल ‘तस्वा’ के लिए शोस्टॉपर बने और उन्होंने इस कलेक्शन के आत्मविश्वास, परिष्कार और सहज शालीनता के भाव को पूरी तरह से जीवंत कर दिया।
इस सोच के साथ कि खास मौकों के कपड़े परंपरा का सम्मान करते हुए व्यक्ति की अपनी निजी शैली को भी दर्शाने चाहिए, यह कलेक्शन भारतीय शादियों से जुड़े विभिन्न समारोहों के लिए एक बेहतरीन वॉर्डरोब पेश करता है। ‘ट्री ऑफ़ लाइफ़’ (जीवन का वृक्ष), ‘लिपन आर्ट’ की बारीक कलाकारी, ‘पेस्ले’ (बूटेदार डिज़ाइन) के सुंदर घुमाव और ‘आर्ट ऑफ़ लाइट’ (प्रकाश की कला) से प्रेरित होकर, इस कलेक्शन ने समकालीन डिज़ाइन भाषा के ज़रिए कई तरह की कलात्मक शैलियों को एक साथ पिरोया है। फूलों वाले, घुमावदार और ज्यामितीय (जियोमेट्रिक) डिज़ाइन एक अनोखी कहानी कहते हैं, जो पारंपरिक तत्वों को ऐसे परिधानों में बदल देते हैं जो सदाबहार भी हैं और आज के आधुनिक वॉर्डरोब के लिए एकदम उपयुक्त भी।
समकालीन डिज़ाइन के ज़रिए भारतीय शिल्पकारी को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ़ इंडिया (FDCI) के चेयरमैन सुनील सेठी ने कहा, “तरुण तहिलियानी का ‘तस्वा’ (Tasva), भारत की समृद्ध पारंपरिक वेशभूषा और आधुनिक भारतीय पुरुष की बदलती पसंद के बीच एक दिलचस्प संवाद पेश करता है। इस कलेक्शन की सबसे खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक तकनीकों और कलात्मक प्रभावों को आधुनिक कट-डिज़ाइन के ज़रिए कितनी खूबसूरती से ढाला गया है। FDCI के साथ साझेदारी में आयोजित लैक्मे फैशन वीक जैसे मंच, इस बदलाव को दुनिया के सामने लाने का मौका देते हैं, और साथ ही आज के फैशन जगत में भारतीय शिल्पकारी की अहमियत को भी उजागर करते हैं।” इस कलेक्शन में भारतीय कारीगरी की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है, जिनमें आरी का काम, जरदोजी और मिरर वर्क शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें एप्लिक, मोतियों की सजावट और थ्री-डायमेंशनल डिटेलिंग का भी इस्तेमाल किया गया है। इन तत्वों ने परिधानों में एक खास टेक्सचर और गहराई ला दी है, जो पारंपरिक शिल्प कौशल और आधुनिक बनावट के बीच के तालमेल को दर्शाते हैं। हर परिधान में डिजाइन के प्रति एक सोची-समझी सोच दिखाई देती है, जहाँ सतह पर की गई बारीक सजावट, साफ-सुथरी लाइनों और समकालीन अनुपात के साथ बखूबी मेल खाती है।

Ali Fazal & Designer TASAVA walks the ramp during the TASVA at the Lakmé Fashion Week 2026, held on October 15th at Taj Palace , New Delhi, India. Photo : FS Media Pro / FDCI x Lakme Fashion Week / RISE Worldwide

सोच-समझकर चुने गए रंगों के पैलेट ने इस कलेक्शन की विज़ुअल पहचान को और निखारा। आइवरी, लाइलैक, सैल्मन और जेड जैसे हल्के रंगों ने दिन के आयोजनों के लिए डिज़ाइन किए गए परिधानों में एक शालीन सुंदरता जोड़ी, जबकि गहरे ‘ज्वेल टोन’ और चटख रंगों ने कॉकटेल पार्टियों और मेहंदी जैसे समारोहों के लिए एक जीवंत और आकर्षक अंदाज़ पेश किया।
सादगी और शानदार स्टाइल के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए, यह कलेक्शन उन अलग-अलग मौकों और व्यक्तिगत पसंदों को दर्शाता है, जो आज की भारतीय शादियों का अहम हिस्सा हैं।
इसके परिधानों की बनावट (सिलुएट) पारंपरिक पुरुषों के पहनावे को एक नया रूप देती है। इसमें क्लासिक शेरवानियों को एसिमेट्रिकल (असममित) डिज़ाइन और बेहतरीन टेलरिंग के साथ पेश किया गया है, साथ ही स्लीक डिनर जैकेट और आधुनिक इंडो-वेस्टर्न परिधान भी शामिल हैं। बनावट और आराम का बेहतरीन मेल पेश करते हुए, यह कलेक्शन दिखाता है कि कैसे पारंपरिक शादी-ब्याह के स्टाइल को आज की नई पीढ़ी के दूल्हों और मेहमानों की पसंद के हिसाब से बदला जा सकता है। इसका नतीजा एक ऐसा कलेक्शन है, जो भारतीय पारंपरिक परिधानों की भव्यता और आधुनिक पहनावे के लचीलेपन व आत्मविश्वास के बीच एक शानदार संतुलन बनाता है।
FDCI के साथ साझेदारी में लैक्मे फैशन वीक में इस कलेक्शन की प्रेरणा और प्रस्तुति के बारे में बात करते हुए, तरुण तहिलियानी ने कहा, “तस्वा (Tasva) में, हमारी कोशिश हमेशा यही रही है कि भारतीय पारंपरिक परिधान आज के पुरुषों के पहनावे और उनके जश्न मनाने के तरीकों के हिसाब से प्रासंगिक लगें। यह कलेक्शन पारंपरिक कारीगरी की सुंदरता को आधुनिक बनावट, आराम और व्यक्तिगत पहचान के साथ जोड़ता है।”
उन्होंने आगे कहा, “बारीक कढ़ाई से लेकर क्लासिक शेरवानियों और टेलरिंग के आधुनिक रूप तक, हर चीज़ हमारे इस विश्वास को दर्शाती है कि परंपराओं का समय के साथ विकसित होते रहना ज़रूरी है। हम एक ऐसा कलेक्शन तैयार करना चाहते थे, जो आज के दूल्हे को अपनी विरासत का जश्न मनाने के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व को भी खुलकर ज़ाहिर करने का मौका दे।”
इस शोकेस और भारतीय पारंपरिक परिधानों में आ रहे बदलावों पर टिप्पणी करते हुए, रिलायंस ब्रांड्स लिमिटेड के ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट, जसप्रीत चंडोक ने कहा, “भारतीय पुरुषों के पहनावे में एक रोमांचक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ अब व्यक्तिगत पहचान, बहुउपयोगिता और आधुनिक डिज़ाइन पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। तस्वा का यह शोकेस इस बदलाव को बहुत खूबसूरती से पेश करता है। यह पारंपरिक कारीगरी को एक ऐसे आधुनिक रूप में लाता है, जो आज के ग्राहकों की पसंद और ज़रूरतों से पूरी तरह मेल खाता है।” FDCI के साथ साझेदारी में आयोजित लैक्मे फैशन वीक में, हम उन डिज़ाइनरों और ब्रांड्स का जश्न मनाना जारी रखते हैं जो भारतीय फैशन को लेकर नई चर्चाओं को आकार दे रहे हैं। यह कलेक्शन खास मौकों पर पहने जाने वाले कपड़ों (ऑकेज़न-वियर) के भविष्य पर एक विचारशील नज़रिया पेश करता है।
अपने नवीनतम शोकेस के ज़रिए, तरुण तहिलियानी के ब्रांड ‘तस्वा’ (Tasva) ने आधुनिक भारतीय पुरुष परिधानों पर एक अनूठा नज़रिया पेश किया, जहाँ परंपरा और नवाचार (इनोवेशन) का बहुत ही सहज मेल देखने को मिलता है। कारीगरी, व्यक्तिगत पहचान और खास मौकों के पहनावे को नए ढंग से पेश करने की आज़ादी का जश्न मनाते हुए, यह कलेक्शन इस बात को पुख्ता करता है कि समकालीन भारतीय शालीनता अपनी जड़ों का सम्मान करने और साथ ही अपने निजी स्टाइल को अपनाने में ही निहित है।

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