संयुक्ता दत्ता ने ‘फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ़ इंडिया’ (FDCI) के साथ साझेदारी में, ‘लक्मे फैशन वीक’ में ‘सेनेह’ (Seneh) के ज़रिए असमिया विरासत की ख़ूबसूरती का जश्न मनाया

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*स्नेह, यादों और अपनापन की भावना को खूबसूरती से दर्शाते हुए, इस कलेक्शन ने पारंपरिक असमिया वस्त्रों को समकालीन डिज़ाइन और सदाबहार सुंदरता के साथ एक नया रूप दिया है।

असमिया कारीगरी की चिरस्थायी सुंदरता और इसकी वस्त्र परंपराओं में बुनी भावनाओं का जश्न मनाते हुए, डिज़ाइनर संजुक्ता दत्ता ने ‘फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ इंडिया’ (FDCI) के साथ मिलकर ‘लैक्मे फैशन वीक’ में ‘सेनेह, द अफेक्शन’ (SENEH, The Affection) पेश किया। घर की गर्माहट, यादों और अपनापन की भावना से प्रेरित यह कलेक्शन असम की समृद्ध वस्त्र विरासत की एक आधुनिक व्याख्या है। इसमें पारंपरिक बुनाई तकनीकों, बेहतरीन कारीगरी और आधुनिक डिज़ाइन को एक साथ लाकर सांस्कृतिक पहचान को दिल से व्यक्त किया गया है।

स्नेह की आत्मीयता और पीढ़ियों को जोड़ने वाली यादों से प्रेरणा लेते हुए, ‘सेनेह’ ने वस्त्रों और भावनाओं के बीच के रिश्ते को दर्शाया है। इस कलेक्शन में मूंगा, हल्के न्यूट्रल और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जो असम के मशहूर ‘मूंगा सिल्क’ की खास सुनहरी चमक को दर्शाते हैं। इन सौम्य रंगों ने बारीक कारीगरी के लिए एक बेहतरीन आधार (कैनवस) का काम किया, जिससे वस्त्रों की समृद्धि, बारीकी से की गई डिटेलिंग और डिज़ाइन का प्रवाह खुलकर सामने आया। रनवे पर परंपरा और आधुनिकता का एक सुंदर संगम देखने को मिला, जहाँ मेखेला चादर, ड्रेस और स्कर्ट ने असमिया वस्त्र परंपराओं को एक नया नज़रिया दिया। आधुनिक डिज़ाइन, कपड़ों का बेहतरीन फॉल और सोच-समझकर की गई बनावट ने इसमें एक सहजता और गतिशीलता ला दी। वहीं, हाथ से बुने कपड़े, पारंपरिक असमिया मोटिफ, हाथ की कारीगरी और नाज़ुक सजावट ने इस कलेक्शन को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखा। हर परिधान में डिज़ाइनर की वह खास शैली दिखी, जो विरासत को एक ऐसी डिज़ाइन भाषा में बदल देती है, जिससे आज की महिलाएं जुड़ाव महसूस करती हैं।

सिर्फ देखने में ही नहीं, बल्कि ‘सेनेह’ के पीछे एक बहुत ही व्यक्तिगत कहानी भी है—यह बताती है कि कैसे कपड़े यादों, पहचान और भावनाओं का खज़ाना बन जाते हैं। असमिया कारीगरी की एक नई और विचारपूर्ण व्याख्या के ज़रिए, इस कलेक्शन ने विरासत को केवल ‘बीते समय की कोई चीज़’ नहीं, बल्कि एक ‘जीवित परंपरा’ के रूप में पेश किया है, जो हर नई पीढ़ी के साथ लगातार विकसित होती रहती है। परिचित बनावटों की आत्मीयता, प्राकृतिक रंगों की सूक्ष्म समृद्धि और हाथ से की गई बारीकियों की नज़ाकत—इन सबको मिलाकर एक ऐसा कलेक्शन तैयार किया गया, जो अपनी प्रेरणा के स्तर पर बेहद आत्मीय है, और अपने आकर्षण के मामले में पूरी तरह समकालीन।

इस कलेक्शन के बारे में बात करते हुए, संजुक्ता दत्ता ने कहा, “’सेनेह’ (SENEH) मेरे लिए बहुत ही निजी कलेक्शन है, क्योंकि यह उन भावनाओं और यादों से उपजा है जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ती हैं। असम में, कपड़े सिर्फ पहनने की चीज़ नहीं हैं; इनमें हमारे परिवारों, हमारी परंपराओं और उन लोगों की कहानियाँ बसी हैं जिन्होंने हमें गढ़ा है। इस कलेक्शन के ज़रिए, मैं मुगा (Muga) से प्रेरित रंगों की गर्माहट, हाथ से बुने कपड़ों की ख़ूबसूरती और आज की महिलाओं के अनुकूल डिज़ाइनों के माध्यम से अपने स्नेह को व्यक्त करना चाहती थी। FDCI के साथ मिलकर लैक्मे फैशन वीक (Lakmē Fashion Week) में ‘सेनेह’ को पेश करना, असम की कारीगरी का जश्न मनाने और यह दिखाने का एक बेहतरीन मौक़ा रहा कि हमारी परंपराएँ कितनी ख़ूबसूरती से समय के साथ विकसित हो सकती हैं।”
‘सेनेह’ के ज़रिए, संजुक्ता दत्ता ने असम की वस्त्र-विरासत को सहेजने और उसे नए रूप में पेश करने के अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने एक ऐसा कलेक्शन प्रस्तुत किया, जो हाथ से बनी पारंपरिक कला की ख़ूबसूरती का जश्न मनाता है और साथ ही आज के दौर के फैशन की समझ को भी अपनाता है। स्नेह, पहचान और सदाबहार कारीगरी को दर्शाने वाले इस शो ने असमिया संस्कृति की गर्माहट को रैंप पर उतारा, और यह दिखाया कि कैसे आधुनिक डिज़ाइन के ज़रिए हमारी विरासत आज भी प्रासंगिक बनी हुई है।

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