प्रतिमा पांडे का ब्रांड ‘प्रमा’ (PRAMA), फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (FDCI) के साथ साझेदारी में लैक्मे फैशन वीक में ‘कथा’ (KATHA) पेश करेगा

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*कथकली की दृश्य भाषा से प्रेरित, यह कलेक्शन सिल्क चंदेरी टिश्यू, पैचवर्क,

*कांथा और सुजानी कढ़ाई को एक साथ लाता है, जो शिल्प के माध्यम से कहानी कहने की कला की पड़ताल करता है।

प्रतिमा पांडे का ब्रांड ‘प्रमा’ (PRAMA), FDCI के साथ साझेदारी में, इस अक्टूबर नई दिल्ली में लैक्मे फैशन वीक (Lakmē Fashion Week) में ‘कथा’ (Katha) पेश करेगा। यह कलेक्शन कथकली की समृद्ध दृश्य भाषा और रंगों, गतिविधियों, इशारों व वेशभूषा के ज़रिए कहानी कहने की भारत की सदियों पुरानी परंपरा से प्रेरित है। पारंपरिक कला के नाटकीय तत्वों को समकालीन डिज़ाइन की भाषा में ढालते हुए, इस कलेक्शन में सिल्क चंदेरी टिश्यू, पैचवर्क, कांथा और सुजानी कढ़ाई का इस्तेमाल किया गया है। यहाँ हर परिधान अपने आप में एक कहानी कहता है।
‘कथा’ के मूल में कहानी कहने का विचार ही निहित है। कथकली में एक विशिष्ट दृश्य भाषा के ज़रिए पात्रों, भावनाओं और कथाओं को व्यक्त करने की क्षमता होती है; प्रतिमा पांडे ने इसी खूबी को कपड़ों की बनावट, उनके आकार (सिल्हूट) और हस्तशिल्प के माध्यम से प्रस्तुत किया है। यह कलेक्शन पारंपरिक नाट्य शैली की हूबहू नकल नहीं करता, बल्कि उसकी मूल भावना को आधार बनाकर यह खोजता है कि कपड़ों के ज़रिए कहानियाँ कैसे बयां की जा सकती हैं।
इस कलेक्शन का आधार सिल्क चंदेरी टिश्यू है। अपनी चमक, कोमलता और बेहद हल्केपन के कारण, यह कथकली के नाटकीय प्रभाव में एक सहज प्रवाह (फ्लुइडिटी) जोड़ता है। इस हल्केपन के साथ, बारीक हस्तशिल्प गहराई और टेक्सचर (बनावट) लाते हैं, जिससे नाटकीयता और आत्मीयता के बीच एक संवाद सा कायम होता है।
‘कथा’ में पैचवर्क, कांथा और सुजानी कढ़ाई यादों की एक भाषा बन जाते हैं। अलग-अलग टुकड़े, परतें और टाँके मिलकर किसी पात्र, समय और जीवन के अनुभवों की निशानी को संजोते हैं। इस तरह, हाथ से की गई ये बारीकियाँ हर परिधान की कहानी का एक अभिन्न हिस्सा बन जाती हैं।
कपड़ों की बनावट और उनके आकार के बीच का यह तालमेल, मूर्तिकला जैसे सिल्हूट और बारीकी से सजाई गई सतहों में दिखाई देता है। यह भव्यता और संयम, तथा दिखावे और सूक्ष्म विवरणों के बीच एक सोची-समझी संतुलन (तनाव) पैदा करता है। यह कलेक्शन इन विपरीतताओं के बीच आगे बढ़ता है, जबकि साथ ही चंदेरी की कोमलता और हस्तशिल्प की अनूठी पहचान को भी बनाए रखता है।

इस कलेक्शन के बारे में बात करते हुए, ‘PRAMA by Pratima Pandey’ की फाउंडर और क्रिएटिव डायरेक्टर, प्रतिमा पांडे ने कहा, ” ‘कथा’ इस विचार पर आधारित है कि कपड़े, किसी परफॉरमेंस की तरह ही, कहानियों को अपने साथ रख सकते हैं और उन्हें बयां कर सकते हैं। कथकली की एक बहुत ही खास विज़ुअल भाषा होती है, जिसमें रंग, हरकतें, इशारे और वेशभूषा मिलकर एक कहानी बुनते हैं। मैं इसी भावना को शिल्प (craft) के नज़रिए से पेश करना चाहती थी। चंदेरी, पैचवर्क, कांथा और सुजनी के ज़रिए, कपड़े की हर परत और हर टांका एक बड़ी कहानी का हिस्सा बन जाता है—एक ऐसी कहानी जिसमें यादें, किरदार और हाथ से बनी चीज़ों की ख़ूबसूरती समाई होती है।”

‘कथा’ के ज़रिए, ‘PRAMA by Pratima Pandey’ हर कपड़े को अपने आप में एक कहानी की तरह पेश करता है, जिसे हाथों से तैयार किया गया है, जिसमें कई परतें हैं और जो जीवंत लगता है। यह कलेक्शन परंपरा को सिर्फ़ बीते कल की एक निशानी के तौर पर नहीं देखता, बल्कि एक ऐसी जीवित भाषा के रूप में देखता है, जो आज के डिज़ाइन के ज़रिए कहानियों को आगे ले जाने की क्षमता रखती है।

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