-सरकार की चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई है और वह बेनकाब हो चुकी है: विजेंद्र गुप्ता
-कैग की ये 14 रिपोर्ट्स आप सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगी: विजेंद्र गुप्ता
-कैग की रिपोर्ट्स को छुपाना, दबाना और सदन में न रखना हत्या जैसा गंभीर अपराध: विजेंद्र गुप्ता
-सरकार ने दिन दहाड़े लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान की हत्या की है: विजेंद्र गुप्ता
-इन रिपोर्ट्स को सदन में रखवाने के लिये सड़क से अदालत तक की लड़ाई लड़ेगा विपक्ष: विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार पर जानबूझकर कैग की 14 रिपोर्ट्स को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार अपने भ्रष्टाचार और कारगुजारियों को छुपाने के लिए बार-बार विपक्ष की मांग और उपराज्यपाल के आदेश के बावजूद इन रिपोर्ट्स को विधानसभा में प्रस्तुत नहीं कर रही है । उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए अगले 48 घंटे के अंदर दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर तुरंत ही कैग की सभी 14 रिपोर्ट्स को सदन पटल पर रखने की मांग की है और कहा है कि यदि सरकार विधानसभा का विशेष सत्र नहीं बुलाती है तो भारतीय जनता पार्टी फिर से हाई कोर्ट जायेगी । ताकि कोर्ट कैग की रिपोर्ट्स को विधानसभा पटल पर रखने के लिए सरकार को आवश्यक निर्देश दे । उन्होंने कहा कि हम इन रिपोर्ट्स को सदन में रखने के लिए सरकार को विवश कर देंगे। चाहे कुछ भी हो सरकार को ये सभी रिपोर्ट्स सदन के पटल पर रखनी ही होंगी।
दिल्ली प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि कैग की रिपोर्ट्स को जिस तरह से दबाया गया, छुपाया गया और सदन में प्रस्तुत नहीं किया गया, उससे सरकार की चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई है और सरकार बेनकाब हो चुकी है । कैग की ये 14 रिपोर्ट्स आप सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगी। कैग की रिपोर्ट्स को छुपाना, दबाना और सदन में न रखना हत्या जैसा गंभीर अपराध है। आप सरकार ने इन्हें सदन में प्रस्तुत न करके दिन दहाड़े लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान की हत्या की है। क्योंकि सीएजी की रिपोर्ट को दबाने का अर्थ यह है कि बड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। संवाददाता सम्मेलन में भाजपा विधायक अभय वर्मा और भाजपा विधायक दल की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले वकील सत्यरंजन भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि India Against Corruption के आंदोलन से जन्म लेने वाली पार्टी ने उन लाखों युवाओं के अरमानों को भी कुचला है और उनकी भावनाओं का कत्ल किया है जो लोग भ्रष्टाचार को खत्म करने उद्देश्य से इस आंदोलन से जुड़े थे, संघर्ष किया था जिन्होंने वो सभी लोग आज अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि भ्रष्टाचार को खत्म करने के उद्देश्य से सत्ता में आई पार्टी आज खुद ही भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है।
उन्होंने बताया कि हमने ये मामला पिछले कई महीनों से चल रहा था। इस मामले को लेकर विपक्ष ने राष्ट्रपति महोदया से भी भेंट की, विधानसभा के सत्र में भी बहुत बार इस मुद्दे को उठाया, विधानसभा अध्यक्ष और मुख्य सचिव से भी मिले, लेकिन सरकार ने सबके दबाव के बावजूद कैग की ये रिपोर्ट्स सदन में प्रस्तुत नहीं की। उसके बाद नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की ओर से इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई । मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सुनवाई की निर्धारित तारीख को प्री-पोन करके सुनवाई की और सरकार को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई को 12 दिसम्बर को फिर से सुनवाई की तारीख निश्चित कर दी। सुनवाई के दौरान उपराज्यपाल, कैग और वित्त सचिव ने अपने शपथ पत्र दिये। याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि सरकार को विधानसभा के आगामी सत्र में इन रिपोर्ट्स को प्रस्तुत करने के लिये आदेश दिया जाये। लेकिन सरकार ने कोर्ट के सामने झूठ बोला और कहा कि विधानसभा का चल रहा सत्र अंतिम सत्र नहीं है और हम जल्द ही इन रिपोर्ट्स को विधानसभा के पटल पर रखेंगे । जबकि उस समय चल रहे सत्र को सरकार ने जल्दबाजी में तीन दिन के बजाय दो दिन में ही समेट दिया।
इसी बीच, सरकार ने अदालत के डर और खौफ तथा उसके संभावित फैसले के मद्देनजर जल्दबाजी में पहले 10 रिपोर्ट्स और बाद में बाकी 4 रिपोर्ट्स भी उपराज्यपाल को भेज दीं। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उपराज्यपाल से कहा कि वह दिल्ली सरकार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आदेश दें । उपराज्यपाल ने भी अदालत के आदेश का पालन करते हुए 24 घंटे के अंदर ही मुख्यमंत्री को ये सभी 14 रिपोर्ट्स भेजकर विशेष सत्र बुलाने का आदेश दे दिया। लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि उपराज्यपाल के आदेश के बावजूद सरकार ने अभी तक विशेष सत्र बुलाने के लिये कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है ।
गुप्ता ने कहा कि यह भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। इस सरकार ने ‘खाओ और खाने दो’ की नीति पर राज किया है। इनकी पॉलिसी यही है कि ‘लूटो और लूटने दो’। कैग की रिपोर्ट्स जनता के पैसे के खर्च का पूरा ब्यौरा होता है और संवैधानिक रूप से सरकार को इसे विधानसभा के सदन पर प्रस्तुत करना जरूरी होता है । उन्होंने कहा कि हम सरकार की ये तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे और सरकार को इन 14 रिपोर्ट्स को सदन पटल पर रखने के लिये मजबूर कर देंगे। सरकार द्वारा भेजी गई 14 रिपोर्ट्स में प्रदूषण और शराब नीति वाली रिपोर्ट बहुत ही महत्वपूर्ण है । प्रदूषण के मामले में सरकार ने ढुलमुल रवैया दिखाया है और शराब के मामले में चल रही ईडी की जांच और आप नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर इन मामलों से जुड़ी रिपोर्ट्स का सदन पटल पर रखना बहुत ही आवश्यक है, ताकि कैग द्वारा सरकार के खर्चे का हिसाब किताब पारदर्शितापूर्ण तरीके से विपक्ष के साथ-साथ दिल्ली की जनता के सामने भी आ सके । यदि सरकार विशेष सत्र नहीं बुलायेगी तो कोर्ट के निर्णय के अनुसार भाजपा विधायक दल को फिर से अदालत की शरण लेने का अधिकार है ।


