दिल्ली की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त बनाने में डबल इंजन की भाजपा सरकारें पूरी तरह विफल – देवेन्द्र यादव

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*विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जारी आंकड़ो के अनुसार राजधानी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कमी से 20 नवजात शिशु प्रतिदिन मर रहे है, जो कि चिंता का विषय है- देवेन्द्र यादव


दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली की चरमरा चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश की राजधानी में पिछले 12 वर्षों से दिल्ली के लोगों की जिंदगी बचाने में पिछली केजरीवाल सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार ने सिर्फ लोगों को गुमराह करने वाली झूठी बयानबाजी की है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जारी रिपोर्ट के आंकड़े चौकाने वाले है क्योंकि देश की राजधानी दिल्ली में हर दिन 20 नवजात शिशुओं की मौत हो रही है और यह अत्यंत भयावह है कि दिल्ली में पिछले वर्ष 7439 नवजात शिशु मौत की भेट चढ़ गए, जिनकी मृत्यु दर हर वर्ष बढ़ रही है।


देवेन्द्र यादव ने कहा कि अत्यधिक शिशु मृत्यु दर का कारण कुपोषण, ठीक से विकास न होना, निमोनिया व सेप्टिसीमिया होने के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में एनआईसीयू की कमी और नवजात शिशुओं को बचाने में सुविधाओं की भारी कमी है। करोड़ों के स्वास्थ्य बजट मिलने के बावजूद अधिकतर सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी सिजेरियन सर्जरी की सुविधा नही है। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में आउट बार्न एनआईसीयू व पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट की भारी कमी है, जिसके कारण संकट में जरुरतमंद शिशुओं को इलाज नही मिल पाता। अस्पतालों में दवाईओं की भी भारी कमी है, जिसके कारण गरीब मातृ शिशु का समय पर पूर्ण रखरखाव नही किया जाता है।


देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा की सरकारें देश को आर्थिक तौर पर ट्रिलियन पावर बनाने के लिए अमेरिका से तुलना करते है जबकि अमेरिका में एक हजार जीवित जन्म लेने वाले शिशुओं में से 5-6 नवजात शिशु ही मर रहे है, जिसकी तुलना में राजधानी में शिशु मृत्यु दर कहीं अधिक है। सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की राजधानी में स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त होना भाजपा सरकारों की सबसे बड़ी नाकामी है जबकि यहां विश्व के देशां के कौने-कौने से लोग और डिप्लोमेट आते है और यहां अम्बेसी भी है।


देवेन्द्र यादव ने कहा कि यदि पिछले चार वर्षों के नवजात शिशु मृत्यु दर का आंकलन करें तो मृत्युदर साल दर साल बढ़ रही है, जबकि सरकारें स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर अपनी पीठथपाती है, हालात लगातार बदतर हो रहे हैं। 2020 में 6145 शिशु मौतों के साथ मृत्यु दर 20.37 प्रतिशत रही, 2021 में 6413 शिशु मौतों के साथ मृत्यु दर 23.60 प्रतिशत रही, जबकि 2022 में 7155 शिशु की मौतों के पर मृत्यु दर 23.82 प्रतिशत रही और 2023 में 7439 शिशु मौतों के साथ मृत्यु दर 23.61 प्रतिशत थी। वर्ष 2023 में मरने वाले नवजात शिशुओं में 4439 लड़कें और 2995 लड़कियां ने जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 7419 नवजात शिशुओं की मौत अस्पतालों में हुई जो दिल्ली के अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठाता है।


देवेन्द्र यादव ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बदहाल स्थिति पर पिछली सरकार की नाकामियों को उजागर करने का दावा करने वाली भाजपा ने अभी तक स्वास्थ्य क्षेत्र में बदहाली में सुधार करने के लिए कोई कदम नही उठा रही है। डबल इंजन की सरकार के बावजूद दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में जरुरी दवाएं तक नही है। एम्स, जीटीबी, दिल्ली कैंसर संस्थान, बुराड़ी सहित दिल्ली सरकार के बड़े अस्पतालों में जरुरी दवाओं, नेबुलाईजर, डुओलिन जैसे उपकरण, टेबलेट नाडोसु उपलब्ध नही है। डायलॉसिस के लिए फ्लूएडस, फिल्टर और ट्यूब तक गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को बाहर से लेने पड़ रहा है। यह चौकाने वाला है कि दिल्ली कैंसर अस्पताल में 178 आवश्यक दवाआें में से 100 से अधिक दवाएं स्टॉक से बाहर है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का ढ़िढोरा पीटने वाली भाजपा पहले दिल्ली के अस्पतालां के हालात में सुधार करें, क्योंकि यह बड़ा विषय है कि कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी दवाई जिनकी कीमत 20-30 हजार है सरकारी अस्पतालों में कभी उपलब्ध ही नही होती, जबकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अस्पतालों में हर बीमारी का इलाज मुफ्त किया जाता था।

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