सोशल मीडिया पर पाबंदी और आर्थिक विफलता को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

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नई दिल्ली, 19 मार्च 2026: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन एवं प्रवक्ता श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने आज एआईसीसी मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लोकतंत्र को राजतंत्र में बदलने की कोशिश कर रही है। श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि आज देश के सामने आर्थिक, कूटनीतिक और सामाजिक मोर्चों पर गंभीर संकट खड़ा है, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने वाले हर मंच को बंद करने पर आमादा है।

श्रीमती श्रीनेत ने सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब चैनलों पर की जा रही कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देश पर उन तमाम ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब अकाउंट्स को भारत में प्रतिबंधित (Withheld) किया जा रहा है जो सरकार से सवाल पूछते हैं। उन्होंने आईटी एक्ट की धारा 69ए के दुरुपयोग का हवाला देते हुए कहा कि अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व वाले मंत्रालय अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जिन अकाउंट्स को निशाना बनाया जा रहा है, उनमें से कई कांग्रेस की नीतियों के भी आलोचक रहे हैं, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ा होना अनिवार्य है।

आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने गिरते रुपये और गैस की किल्लत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रुपया ऐतिहासिक रूप से गिरकर 93.30 के पार पहुंच गया है, लेकिन मुख्यधारा का मीडिया इस पर मौन है। देश में एलपीजी की भारी किल्लत है, जिससे आम जनता त्रस्त है और कतारों में खड़े लोगों की मृत्यु तक हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विफल विदेश नीति के कारण रूस, चीन और पाकिस्तान एक साथ खड़े हो गए हैं, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और संप्रभुता खतरे में पड़ गई है।

अंत में, श्रीमती श्रीनेत ने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर सरकार आलोचना से इतनी डरी हुई क्यों है? उन्होंने जनता और युवाओं से अपील की कि वे अपनी आवाज उठाना बंद न करें। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही हजारों अकाउंट ब्लॉक कर दे, लेकिन वह जनता के सवालों और अपनी विफलताओं को उजागर होने से नहीं रोक पाएगी। कांग्रेस ने मांग की कि सरकार दमनकारी नीतियों को छोड़कर देश की ज्वलंत समस्याओं जैसे बेरोजगारी, महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे।

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