- भजन क्लबिंग से बढ़ रही सांस्कृतिक चेतना, युवाओं की बढ़ती भागीदारी प्रेरणादायक-श्री रविन्द्र इन्द्राज
- बवाना में भजन क्लबिंग आयोजन, भक्ति संगीत और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
- नव संवत्सर के उपलक्ष्य में भजन क्लबिंग, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम
नई दिल्ली, 19 मार्च 2026 : राजीव गांधी स्टेडियम, बवाना में हिंदू नव वर्ष (संवत 2083) के उपलक्ष्य में आयोजित भक्ति संगीत कार्यक्रम “भजन क्लबिंग” में समाज कल्याण एवं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्री रविन्द्र इन्द्राज की ओर से इस पहल की सराहना की गई। कार्यक्रम में भक्ति गीतों और भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों, युवाओं एवं कला प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
मंत्री श्री रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि भजन क्लबिंग जैसे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति संगीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है, जो समाज में एकता, शांति और सद्भाव को सुदृढ़ करता है।
उन्होंने विशेष रूप से इस प्रकार के आयोजनों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने भक्ति संगीत के साथ-साथ आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियाँ भी दीं, जिन्होंने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त, विभिन्न सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास का संचार किया और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
भजनों की श्रृंखला के दौरान उपस्थित जनसमूह भक्ति रस में सराबोर नजर आया और पूरे कार्यक्रम स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और कला प्रेमियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर इस पहल की सराहना की तथा इस प्रकार के आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंत्री श्री रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि दिल्ली सरकार समाज के सभी वर्गों के समग्र विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी भजन क्लबिंग जैसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जाता रहेगा, जिससे सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना को और अधिक मजबूती मिल सके।












