नई दिल्ली: देश की राजधानी को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने और टिकाऊ पर्यावरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने एक अनोखी पहल की है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत’, ‘मिशन लाइफ’ (LiFE) और ‘विकसित भारत @2047’ के विजन से प्रेरित होकर एनडीएमसी के उपाध्यक्ष श्री कुलजीत सिंह चहल ने आज “प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी.” (Develop Responsible Outlook for Plastic) का भव्य शुभारंभ किया। किआ इंडिया और इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (IPCA) के सहयोग से शुरू की गई यह परियोजना प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और पुनर्चक्रण (Recycling) को मजबूत करेगी।
इस विशेष अवसर पर एनडीएमसी उपाध्यक्ष ने पुनर्चक्रित (रीसायकल) किए गए प्लास्टिक कचरे से विशेष रूप से निर्मित डी.आर.ओ.पी. सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा एकत्र करने वाले एक विशेष संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस शुरुआत के साथ ही लुटियंस दिल्ली में प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक संग्रहण, पृथक्करण और रीसाइक्लिंग की एक आधुनिक और सुव्यवस्थित प्रणाली लागू हो गई है।
वैश्विक मंच पर पहुंचेगा इस पहल का संदेश: कुलजीत सिंह चहल
परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए एनडीएमसी के उपाध्यक्ष श्री कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत इसी एनडीएमसी क्षेत्र की वाल्मीकि बस्ती से की थी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से छोटा होने के बावजूद एनडीएमसी के अधिकार क्षेत्र में संसद भवन, केंद्रीय मंत्रालय और विदेशी दूतावास आते हैं। इसलिए यहां उठाए गए स्वच्छता के छोटे कदम भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश देते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2021 से आईपीसीए के साथ मिलकर 115 एरोबिन स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे हजारों किलोग्राम कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण हुआ है।
जनभागीदारी के बिना समाधान संभव नहीं: अनिल वाल्मीकि
इस अवसर पर एनडीएमसी परिषद के सदस्य श्री अनिल वाल्मीकि ने सहयोगी संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि प्लास्टिक कचरा न केवल पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी नगर निकाय अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकता। इस परियोजना की वास्तविक सफलता पूरी तरह से नागरिकों की जागरूकता और हर घर से प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग करने (Waste Segregation) की आदत पर निर्भर करती है। उन्होंने आरडब्ल्यूए और मार्केट एसोसिएशनों से इसमें सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
देश के लिए रोल मॉडल बनेगी यह परियोजना: किआ इंडिया
प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के शुभारंभ पर किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री अतुल सूद ने कहा कि भारत के तेजी से विकसित होते शहरी पारिस्थितिकी तंत्र में टिकाऊ कचरा प्रबंधन प्रणालियां बेहद जरूरी हो चुकी हैं। किआ इंडिया इस प्रोजेक्ट के माध्यम से जमीनी स्तर पर लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। आईपीसीए के सचिव श्री अजय गर्ग और उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल ने भी परियोजना का विस्तृत खाका प्रस्तुत करते हुए इसे देश के अन्य शहरों के लिए एक विस्तारणीय अर्बन सस्टेनेबिलिटी मॉडल बताया।
विभिन्न संगठनों और अधिकारियों ने जताई सामूहिक प्रतिबद्धता
इस ऐतिहासिक समारोह में एनडीएमसी क्षेत्र के विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) और मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशनों (MTA) के प्रतिनिधियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम में एनडीएमसी की मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव सहित स्वच्छता, उद्यान और सिविल इंजीनियरिंग विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी हितधारकों ने मिलकर देश की राजधानी के दिल (नई दिल्ली) को स्वच्छ, हरित और सतत बनाए रखने के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।











