दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (एनडीआर) की टीम ने अपराधियों पर नकेल कसने के अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। एसीपी/एनडीआर (क्राइम ब्रांच) श्री उमेश बर्थवाल के समग्र पर्यवेक्षण तथा इंस्पेक्टर योगेश और इंस्पेक्टर विनोद यादव के कुशल नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम ने साल 2020 से फरार चल रहे एक बेहद शातिर और क्रूर अपराधी ब्रह्मदेव भगत को बिहार के पूर्णिया से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ब्रह्मदेव भगत दिल्ली के थाना द्वारका सेक्टर-23 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 109/2020, धारा 342/394/397/506/34 आईपीसी के तहत दर्ज एक वीभत्स डकैती और पीड़ित के दोनों अंगूठे चाकू से काट देने के संगीन मामले में मुख्य आरोपी है। गिरफ्तारी से लगातार बचने और फरार रहने के कारण माननीय अदालत ने दिनांक 11 दिसंबर 2025 को आरोपी को ‘घोषित अपराधी’ (Proclaimed Offender) भी करार दिया था। पुलिस ने उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की शुरुआत 17 मार्च 2020 को हुई थी, जब शिकायतकर्ता सुरेंद्र नंदा, जो कि पेशे से एक इवेंट मैनेजर हैं, के मोबाइल फोन पर एक बड़ी पार्टी की बुकिंग के सिलसिले में एक कॉल आई। उसी दिन शिकायतकर्ता का दिल्ली के पटेल नगर में अपने डॉक्टर के साथ मेडिकल चेकअप का पहले से तय अपॉइंटमेंट था। इसी कारण, उन्होंने अपने मैनेजर कपिल चड्ढा को उस कॉलर से संपर्क करने और उनके स्थान पर बैठक में शामिल होने के लिए भेजा। मैनेजर कपिल चड्ढा ने जब कॉलर से बात की, तो उसने मिलने के लिए द्वारका बुलाया। जब कपिल वहां पहुंचे, तो वहां मौजूद आरोपियों ने इवेंट मैनेजर सुरेंद्र नंदा से ही व्यक्तिगत रूप से मिलने की जिद की और कपिल चड्ढा से कहकर उन्हें वहीं फोन कर बुलवाया।
मैनेजर कपिल का फोन आने पर सुरेंद्र नंदा अपने ड्राइवर रमेश के साथ अपनी इनोवा कार से पटेल नगर से द्वारका के लिए रवाना हो गए। रात करीब 08:00 बजे वह द्वारका सेक्टर-23 पहुंचे, लेकिन सटीक पता नहीं मिल पाने के कारण वह कश्मकश में थे। जब वह सेक्टर-23 स्थित एचडीएफसी बैंक के पास सीएनजी पेट्रोल पंप के नजदीक पहुंचे, तो एक मारुति कार उनके पास आई और उन्हें बैठक वाले गुप्त ठिकाने (मकान) की ओर ले गई। अंधेरा होने के कारण शिकायतकर्ता उस मारुति कार का रजिस्ट्रेशन नंबर नोट नहीं कर सके। जैसे ही सुरेंद्र नंदा ने उस परिसर में प्रवेश किया, वहां उनका पुराना सब्जी आपूर्तिकर्ता ब्रह्मदेव भगत अपने तीन अन्य साथियों के साथ पहले से घात लगाए बैठा था।
घर के भीतर दाखिल होते ही सभी आरोपियों ने सुरेंद्र नंदा पर लाठी-डंडों से बेरहमी से हमला कर दिया। इसी दौरान एक आरोपी ने चाकू की नोक पर सुरेंद्र नंदा से उनकी हीरे की अंगूठी जबरन छीन ली और उनके पर्स से 27,000 रुपये भी लूट लिए। इस बीच मुख्य आरोपी ब्रह्मदेव भगत उन्हें जान से मारने की लगातार धमकियां देता रहा। मौत के खौफ के साए में, आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने सुरेंद्र नंदा से जबरन उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए, जिसमें कथित तौर पर सब्जी के बकाए के रूप में 11 लाख रुपये के भुगतान की बात लिखी थी, जबकि सुरेंद्र नंदा के खातों के अनुसार ऐसा कोई बकाया देय ही नहीं था। इसके बाद क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने चाकू से सुरेंद्र नंदा के दोनों हाथों के अंगूठे काट दिए और उन्हें गंभीर रूप से घायल (Grievous Injury) कर दिया।
इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने सुरेंद्र नंदा और उनके मैनेजर कपिल चड्ढा को वहां से छोड़ दिया। वहां से मुक्त होने के बाद पीड़ित सुरेंद्र नंदा किसी तरह डीडीयू (दीनदयाल उपाध्याय) अस्पताल पहुंचे, जहां से पुलिस को इस घटना की सूचना दी गई। इस संबंध में अगले ही दिन यानी 18 मार्च 2020 को थाना द्वारका सेक्टर-23 में विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। स्थानीय पुलिस ने तफ्तीश के दौरान इस वारदात में शामिल तीन सह-आरोपियों—जितेंद्र, अमरदीप और गौतम को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन पीड़ित के दोनों अंगूठे काटने वाला मुख्य साजिशकर्ता और क्रूर आरोपी ब्रह्मदेव भगत लगातार फरार चल रहा था और जानबूझकर अपनी गिरफ्तारी से बच रहा था।
गंभीर अपराधों में वांछित अपराधियों को दबोचने के लिए काम कर रही क्राइम ब्रांच (एनडीआर) ने इस केस को सुलझाने के लिए सब-इनस्पेक्टर दिपेंद्र, हेड कांस्टेबल राजबीर, हेड कांस्टेबल राम निवास, हेड कांस्टेबल परमानंद, हेड कांस्टेबल कुलदीप और महिला कांस्टेबल ज्ञानवती की एक विशेष टीम को इस मुख्य आरोपी को ढूंढ निकालने का जिम्मा सौंपा। पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से आरोपी के संभावित ठिकानों पर नजर रखनी शुरू की। इसी कड़ी में 15 मई 2026 को हेड कांस्टेबल राम निवास को अपने विश्वसनीय मुखबिर से एक सटीक सूचना मिली कि आरोपी ब्रह्मदेव भगत इस समय बिहार के पूर्णिया में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत बिहार के लिए कूच किया और वहां छापेमारी कर जाल बिछा दिया।
अथक प्रयासों और लगातार जमीनी निगरानी के बाद, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने वांछित अपराधी ब्रह्मदेव भगत को बिहार के पूर्णिया से सफलतापूर्वक दबोच लिया। कड़ाई से की गई पूछताछ (Sustained Interrogation) के दौरान आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने साल 2020 में द्वारका में अंजाम दी गई इस खौफनाक वारदात में अपनी संलिप्तता पूरी तरह स्वीकार कर ली। उसने कबूला कि अपराध करने के बाद वह पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार दिल्ली से फरार था और अपनी पहचान छुपाने के लिए अलग-अलग राज्यों व शहरों में अपने ठिकाने बदल-बदल कर रह रहा था। वर्तमान में वह पूर्णिया में ही एक किराना दुकान चला रहा था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी ब्रह्मदेव भगत (उम्र 70 वर्ष), मूल रूप से मकान नंबर 26, गांव भडोला, आदर्श नगर, दिल्ली का रहने वाला है और उसने एक सरकारी स्कूल से केवल 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। आर्थिक तंगहाली के कारण बचपन में ही पढ़ाई छूटने के बाद उसने सड़कों पर रेहड़ी लगाकर सब्जी बेचना शुरू किया था और साल 2015 में वह आजादपुर सब्जी मंडी, दिल्ली में सब्जी का थोक व्यापार करने लगा था, जहां वह शिकायतकर्ता को सब्जी सप्लाई करता था। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश करने और आगे की सख्त कानूनी कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी है।












