प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन और जनकल्याण के गौरवमयी 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दिल्ली भाजपा का देशव्यापी संपर्क अभियान पूरे उत्साह के साथ जारी है। इस विशेष अभियान के तहत भाजपा के सांसदों, विधायकों, पार्षदों और वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में आम जनता से घर-घर जाकर मुलाकात तो की ही, साथ ही समाज के प्रबुद्ध और विशिष्ट नागरिकों से भी सघन संपर्क साधा।
इसी कड़ी में आज प्रबुद्ध विशिष्ट नागरिक जनसंपर्क कार्यक्रम के अंतिम दिन चांदनी चौक से नवनिर्वाचित भाजपा सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने देश के जाने-माने शिक्षाविदों और विचारकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।
प्रसिद्ध समाजशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों से की मुलाकात
सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह सहित देश के कई प्रख्यात समाजशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों के एक विशिष्ट समूह से भेंट की। इस उच्च स्तरीय संवाद कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर श्री अभिषेक टंडन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के नीति-निर्धारकों और बुद्धिजीवियों के साथ सरकार की उपलब्धियों को साझा करना और भविष्य के भारत के निर्माण पर चर्चा करना था।
देश की प्रगति के लिए लिए गए सार्थक सुझाव
इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने उपस्थित विशिष्ट जनों को पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के विकास, बुनियादी ढांचे की मजबूती और गरीब कल्याण के लिए उठाए गए ऐतिहासिक कदमों से अवगत कराया। इसके साथ ही उन्होंने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने और सामाजिक ताने-बाने को और सुदृढ़ करने के संबंध में इन प्रख्यात अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों से विस्तृत चर्चा की और उनके बहुमूल्य व सार्थक सुझाव भी दर्ज किए।
नीतियों को जमीनी स्तर पर उतारने में प्रबुद्ध वर्ग की भूमिका अहम
सांसद खंडेलवाल ने प्रबुद्ध वर्ग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी मजबूत राष्ट्र और अर्थव्यवस्था के सुधार में बुद्धिजीवियों के विचार रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस बैठक से प्राप्त हुए सकारात्मक सुझावों को सरकार के नीतिगत एजेंडे में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर वैचारिक और बौद्धिक नेतृत्व करने वाले लोगों को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना है।







