दिल्ली में सर्दियों के मौसम में पैर पसारने वाले जानलेवा वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार ने अभी से अपनी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने आज ‘शीतकालीन वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था’ (Proactive Winter Air Quality Management Framework) को अधिसूचित कर दिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक अमूमन ऐसा होता था कि सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर होने या ग्रैप (GRAP) लागू होने के बाद ही पाबंदियों की घोषणा की जाती थी, जिससे आम जनता, व्यापारियों और उद्योगों को तैयारी का मौका नहीं मिलता था और काफी असुविधा होती थी। इसी व्यवस्था को बदलते हुए दिल्ली सरकार ने इस बार सर्दियों के आगमन से महीनों पहले ही संभावित प्रतिबंधों का पूरा रोडमैप देश के सामने रख दिया है।
यह अग्रिम फ्रेमवर्क पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया गया है, जो वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा जारी संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के पूरक के रूप में समानांतर रूप से कार्य करेगा।
बिना वैध ‘पीयूसीसी’ (PUCC) नहीं मिलेगा पेट्रोल, बाहर के वाहनों पर रोक
वाहनों से होने वाले धुएं पर कड़ा नियंत्रण लगाने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन दिया जाएगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) होगा। इसके साथ ही, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर बीएस-VI (Non-BS VI) वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को इस पाबंदी से पूरी छूट मिलेगी।
पार्किंग शुल्क होगा दोगुना; दफ्तरों में 50% कर्मचारी करेंगे ‘वर्क फ्रॉम होम’
सर्दियों के दौरान सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम करने और निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने के लिए कार्यालयों के समय में बदलाव (Staggered Office Timings) किया जाएगा। इसके तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत भौतिक उपस्थिति की अनुमति होगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) की व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू रहेगी।
दिसंबर-जनवरी के पीक सीजन में निर्माण कार्यों पर लग सकती है रोक
धूल प्रदूषण को रोकने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण (C&D) गतिविधियों को कड़े धूल नियंत्रण मानकों के तहत ही संचालित करना होगा। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच, जब प्रदूषण का स्तर सबसे खतरनाक स्तर पर होता है, जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए निर्माण कार्यों पर अतिरिक्त प्रतिबंध या पूर्ण रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, सभी प्रमुख निर्माण साइटों पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम का संचालन अनिवार्य होगा।
खुले में कूड़ा जलाने पर ड्रोन से नजर; साझी भागीदारी की अपील
ठंड के दिनों में खुले में कचरा, पत्तियां या प्लास्टिक जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली सरकार इस बार फील्ड सर्विलांस और अत्याधुनिक ड्रोन आधारित निगरानी तंत्र का इस्तेमाल करेगी। आरडब्ल्यूए (RWA) और संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षाकर्मियों के लिए सर्दियों में आग जलाने के बजाय वैकल्पिक हीटिंग (इलेक्ट्रिक हीटर) की व्यवस्था करें। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अंत में अपील करते हुए कहा कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना केवल सरकारी प्रयास से संभव नहीं है, इसके लिए हर नागरिक और संस्थान की साझी भागीदारी जरूरी है।







