“भारतीय विधायकों ने स्वतंत्रता से पहले की विधायिकाओं में जो राजनीतिक परिपक्वता और नैतिक स्पष्टता दिखाई, वही स्वतंत्र भारत की संसदीय परंपराओं की नींव बनी” – विनय सहस्रबुद्धे
*“अरविंदो को भी उस वैचारिक पुनर्जागरण के सूत्रधार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, जिन्होंने राष्ट्रीय चेतना को दिशा दी” – राम बहादुर राय *“आज भारत की संवैधानिक विरासत से जुड़ने और उसके प्रारंभिक विधायकों की दूरदृष्टि से प्रेरणा लेने की अत्यंत आवश्यकता है” – विजेंद्र गुप्ता *1911–1946 केContinue Reading











